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सोने-चांदी के बाजार में भूचाल: फेड रिजर्व के फैसले के बाद देखिए क्या चल रहे हैं आज के ताजा भाव

फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले के बाद आज सोने और चांदी के बाजार में जोरदार हलचल देखने को मिल रही है. विदेशी बाजार में जहां सोने में तेजी है, वहीं घरेलू बाजार MCX पर सोने-चांदी के दामों में नरमी दर्ज की गई है. जानिए पूरी मार्केट रिपोर्ट.

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Gold Silver Price Today: अक्सर लोग कहते हैं कि जब अमेरिका के फेडरल रिजर्व में कुछ हलचल होती है, तो उसका सीधा असर भारत के आम आदमी की जेब और किचन से लेकर सर्राफा बाजार तक साफ दिखाई देता है. कुछ ऐसा ही इस बार भी देखने को मिला है. कल यानी बुधवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व की एक अहम बैठक के नतीजे सामने आए जिसके बाद आज यानी गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार उठापटक मची हुई है. अगर आप भी इन दिनों ज्वैलरी खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि इस समय मार्केट में क्या खेल चल रहा है.

विदेशी बाजारों में चमकता सोना, चांदी पड़ी सुस्त

अगर बात करें इंटरनेशनल मार्केट की तो वहां आज का नजारा काफी दिलचस्प है. सुबह 9 बजे तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी बाजार में सोना करीब 0.64% की तेजी के साथ उछलकर 4,062.50 डॉलर प्रति औंस के पार जा पहुंचा है. इसके उलट चांदी की चमक थोड़ी फीकी पड़ी है और यह 0.24% की हल्की गिरावट के साथ 57.950 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती नजर आ रही है. ग्लोबल मार्केट की इस उथल-पुथल का असर सीधे तौर पर हमारे घरेलू वायदा बाजार पर भी पड़ रहा है.

भारतीय बाजार पर क्या है हाल?

विदेशी बाजार के मुकाबले घरेलू मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चाल थोड़ी जुदा देखने को मिली. भारत में सोने के दामों में हल्की नरमी आई है और यह गिरकर करीब 1,43,267 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड करता दिखा. वहीं, चांदी के मोर्चे पर भी गिरावट दर्ज की गई सुबह 9 बजे के आसपास चांदी करीब 1,069 रुपये टूटकर 2,16,410 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर ट्रेड कर रही थी. बाजार के जानकारों का मानना है कि इन उतार-चढ़ावों के पीछे ग्लोबल संकेत और निवेशकों का बदलता रुख मुख्य वजह है.

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क्यों मची है बाजार में यह सनसनी?

इस पूरी हलचल के पीछे असली कहानी अमेरिकी फेडरल रिजर्व के उस फैसले की है, जिसमें लगातार पांचवीं बार ब्याज दरों को 3.50% से 3.75% के दायरे में स्थिर रखा गया है. हालांकि फैसला भले ही दरों को रोकने का रहा हो, लेकिन इसके अंदरखाने का माहौल काफी गर्म था. कच्चे तेल के बदलते तेवर और महंगाई के बढ़ते दबाव को देखते हुए कई बड़े अधिकारियों का मानना था कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जानी चाहिए. क्लीवलैंड फेड की बेथ हैमैक, मिनियापोलिस फेड के नील काशकारी और डलास फेड की लोरी लोगन जैसे दिग्गजों ने दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के पक्ष में वोट भी डाला.

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-भारत एक्सप्रेस



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