स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की संयुक्त सचिव और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष को दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत से बड़ी कानूनी राहत मिल गई है. अदालत ने वर्ष 2021 में एक विरोध-प्रदर्शन के दौरान दर्ज हुई एफआईआर (FIR) के मामले में उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (NBW) को आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया है. इससे पहले, ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास विजयश्री राठौर की अदालत ने सुनवाई के दौरान अगली तारीख तक आइशी घोष के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट के क्रियान्वयन (तामील) पर रोक लगाने का निर्देश दिया था.
पिछली सुनवाई के दौरान आइशी घोष की ओर से पेश हुए वकील ने अदालत को अवगत कराया था कि घोष के खिलाफ बीती 11 अप्रैल 2026 को गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था. हालांकि, यह वारंट उन तक भौतिक रूप से तामील नहीं कराया जा सका था और पुलिस रिपोर्ट में कहा गया था कि वह दिए गए पते पर मौजूद नहीं मिलीं. बाद में उन्हें फोन के जरिए इसकी सूचना दी गई, जिसके आधार पर कोर्ट ने उन्हें 30 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था.
IPC की इन धाराओं में दर्ज है FIR
उल्लेखनीय है कि यह पूरा मामला दिल्ली स्थित ‘बंगा भवन’ (Banga Bhawan) के बाहर हुए एक विरोध-प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है. उस समय अदालती कार्रवाई में हिस्सा न लेने के कारण आइशी घोष के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे. इस मामले में पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 188 (लोकसेवक के आदेश की अवहेलना), धारा 34 (समान नीयत) और धारा 447 (आपराधिक अतिचार) के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी.
मामले के रिकॉर्ड के अनुसार, आइशी घोष के खिलाफ इस केस में सबसे पहले 2021 में गैर-जमानती वारंट जारी हुआ था. इसके बाद 12 दिसंबर 2024 और फिर 11 अप्रैल 2026 को भी वारंट जारी किए गए थे.
पार्टी दफ्तर में पुलिस की घुसपैठ का आरोप
हाल ही में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि पुलिस अधिकारी आइशी घोष को गिरफ्तार करने के लिए जबरन उनके केंद्रीय मुख्यालय (हेडक्वार्टर) में दाखिल हुए थे.
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बुधवार को आइशी घोष का यह मुद्दा देश की संसद में भी जोरदार तरीके से गूंजा. राज्यसभा (Upper House) में सीपीआई(एम) के वरिष्ठ सांसद जॉन ब्रिटास ने इस घटनाक्रम को उठाते हुए कहा कि सादे कपड़ों में दिल्ली पुलिस की एक टीम वर्ष 2021 के एक पुराने प्रदर्शन मामले में आइशी घोष को गिरफ्तार करने के लिए पार्टी कार्यालय में घुस आई. उन्होंने पुलिस की इस दंडात्मक कार्रवाई पर कड़े सवाल खड़े करते हुए कहा कि आइशी घोष का एकमात्र ‘अपराध’ यह था कि उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए एक लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण प्रदर्शन में हिस्सा लिया था. अब कोर्ट से वारंट रद्द होने के बाद इस मामले में उन्हें बड़ी राहत मिली है.
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