Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

एक नहीं साल में 2 बार होती है पुत्रदा एकादशी, जानिए दोनों के पीछे का खास कारण और मान्यता

हिंदू धर्म में पुत्रदा एकादशी का व्रत बेहद खास माना जाता है. सालभर में आने वाली 24 एकादशियों में यह इकलौता ऐसा व्रत है जो एक नहीं बल्कि साल में दो बार रखा जाता है. जानें संतान प्राप्ति के लिए रखे जाने वाले इस व्रत का क्या महत्व है.

Putrada Ekadashi

साल में 2 बार क्यों मनाई जाती है Putrada Ekadashi?

Putrada Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का बहुत बड़ा महत्व है. मान्यता है कि सालभर में कुल 24 एकादशियां आती हैं, क्योंकि हर महीने में दो बार (कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में) यह व्रत रखा जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पुत्रदा एकादशी साल में एक नहीं बल्कि 2 बार आती है? जी हां, तो चलिए जानते हैं कि आखिर यह व्रत साल में दो बार क्यों आता है और इसका क्या महत्व है.

साल में दो बार क्यों आती है Putrada Ekadashi?

धार्मिक पंचांग के अनुसार पुत्रदा एकादशी साल में दो अलग-अलग महीनों में मनाई जाती है. पहली बार यह पौष मास यानी दिसंबर से जनवरी के बीच और दूसरी बार श्रावण मास यानी जुलाई से अगस्त के बीच आती है.

इस व्रत के साल में दो बार आने का मुख्य कारण यह है कि विभिन्न धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में इन दोनों ही तिथियों का फल एक समान यानी संतान प्राप्ति, संतान की सुरक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए बेहद खास बताया गया है. दोनों ही व्रतों का उद्देश्य और मिलने वाला पुण्य एक जैसा होने के कारण दोनों को ही ‘पुत्रदा एकादशी’ यानी संतान प्रदान करने वाली एकादशी के नाम से जाना जाता है.

संतान सुख के लिए खास

मान्यताओं के अनुसार इस पवित्र दिन पर भगवान विष्णु की पूजा उनके बाल रूप में की जाती है. जिन दंपत्तियों को संतान सुख की इच्छा होती है या जो अपनी संतान के सुखी जीवन की कामना करते हैं, वे पूरे विधि-विधान से यह व्रत रखते हैं. इस व्रत को बेहद पवित्र माना जाता है, जिससे भक्तों के मन की शुद्धि होने के साथ-साथ पुराने पापों से भी मुक्ति मिलती है.

ये भी पढे़ं- कजलियां क्यों मनाई जाती हैं? जानिए भुजरिया पर्व की मान्यता और महत्व

सावन की Putrada Ekadashi का महत्व

श्रावण मास में आने वाली पुत्रदा एकादशी को कई जगहों पर ‘पवित्रा एकादशी’ के नाम से भी पुकारा जाता है. सावन का महीना वैसे ही देवों के देव महादेव भगवान शिव की आराधना के लिए समर्पित होता है. ऐसे में इस महीने में पड़ने वाली एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव की पूजा का भी दुर्लभ संयोग बन जाता है जिससे भक्तों को दोगुना आशीर्वाद और पुण्य फल की प्राप्ति होती है.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital