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क्या वैश्विक मंच पर संघ का बढ़ रहा है दायरा? जानिए मोहन भागवत के ब्रिटेन-अमेरिका दौरे की खास बातें

RSS अपनी स्थापना के 100 साल पूरे होने पर देश-विदेश में कई कार्यक्रम आयोजित कर रहा है. इसी सिलसिले में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत लंदन दौरे पर हैं, जहां वे विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और सामुदायिक संगठनों से संवाद कर रहे हैं.

Mohan Bhagwat

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपनी स्थापना के 100 साल पूरे होने के मौके पर देश ही नहीं, विदेशों में भी कई कार्यक्रम आयोजित कर रहा है. इसी सिलसिले में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत इन दिनों ब्रिटेन के दौरे पर हैं. उनका लंदन दौरा 2 सितंबर से शुरू हुआ है और 7 सितंबर तक चलेगा. यह यात्रा संघ के शताब्दी वर्ष में चलाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय संवाद कार्यक्रम का अहम हिस्सा है.

RSS के मीडिया और संचार प्रमुख सुनील आंबेकर के मुताबिक, संघ की स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में की थी. हेडगेवार का मानना था कि देश को राजनीतिक और आर्थिक आजादी मिलने के बाद उसे लंबे समय तक कायम रखने के लिए समाज का मजबूत और संगठित होना जरूरी है. संघ के अनुसार, पिछले 100 वर्षों में उसका काम एक बड़े सामाजिक और सभ्यतागत आंदोलन के रूप में विकसित हुआ है, जिसमें स्वयंसेवक अलग-अलग क्षेत्रों में सेवा कार्य करते हैं.

सेवा कार्यों पर संघ का जोर

RSS की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में 1.52 लाख से ज्यादा सेवा पहलें चल रही हैं. इनका दायरा शिक्षा और स्वास्थ्य से लेकर समाज कल्याण, आत्मनिर्भरता और सामुदायिक विकास तक फैला हुआ है.

संघ की नियमित गतिविधियों का भी देशभर में बड़ा नेटवर्क है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 1.34 लाख से ज्यादा स्थानीय बैठकें नियमित रूप से होती हैं. इनमें दैनिक शाखाओं के साथ-साथ साप्ताहिक और मासिक बैठकें भी शामिल हैं.

संघ अपने शताब्दी वर्ष में पांच प्रमुख क्षेत्रों (सामाजिक सद्भाव, परिवार व्यवस्था को मजबूत करना, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी, आत्मनिर्भरता और नागरिक जिम्मेदारी) को प्राथमिकता दे रहा है. संघ का कहना है कि इन क्षेत्रों में काम करने से समाज के व्यापक हितों को बढ़ावा मिलेगा.

अमेरिका से कनाडा और अब ब्रिटेन तक पहुंचा संवाद

शताब्दी वर्ष में RSS ने अपने अनुभवों और विचारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा करने के लिए अलग-अलग देशों में संवाद कार्यक्रमों की शुरुआत की है. अप्रैल 2026 में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने ब्रिटेन, अमेरिका और जर्मनी का दौरा किया था.

लंदन में चैथम हाउस, अमेरिका में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और हडसन इंस्टीट्यूट तथा बर्लिन के प्रमुख नीति संस्थानों में उन्होंने शिक्षाविदों, सांसदों, कारोबारी नेताओं, सामुदायिक प्रतिनिधियों और भारतीय मूल के लोगों से बातचीत की. इन बैठकों में सभ्यतागत दृष्टिकोण, सामाजिक एकता और दुनिया के सामने खड़ी मौजूदा चुनौतियों जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई.

इसके बाद डॉ. मोहन भागवत ने इसी संवाद को अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन तक आगे बढ़ाया है.

न्यूयॉर्क में 6 हजार से ज्यादा लोगों की मौजूदगी

29 अगस्त को न्यूयॉर्क में भागवत ने AHEAD यानी अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग के निमंत्रण पर अलग-अलग धर्मों और संप्रदायों के नेताओं की एक बैठक को संबोधित किया. इस बैठक में करीब 175 प्रतिनिधि शामिल हुए.

इसके अलावा मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस’ सम्मेलन में भी उन्होंने हिस्सा लिया. इस कार्यक्रम में अमेरिका के 39 राज्यों और 853 शहरों से आए 6,000 से अधिक लोग शामिल हुए. ये प्रतिभागी करीब 250 संगठनों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. अमेरिका की विभिन्न यूनिवर्सिटीज के लगभग 250 छात्र भी इस संवाद का हिस्सा बने. सर्व-धर्म नेताओं की बैठक में पांच सूत्रीय ‘कॉल फॉर एक्शन’ प्रस्ताव भी अपनाया गया.

टोरंटो में भी हुआ बड़ा सम्मेलन

न्यूयॉर्क के बाद भागवत कनाडा के टोरंटो पहुंचे. यहां CHORD यानी कैनेडियन हिंदूज फॉर आउटरीच, रिलेशंस एंड डायलॉग के निमंत्रण पर उन्होंने ‘हिंदू विश्व बंधु’ सम्मेलन को संबोधित किया.

इस कार्यक्रम में कनाडा के सभी 10 प्रांतों से आए 175 संगठनों के प्रतिनिधियों समेत 2,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया. यहां भी सामाजिक संबंधों, आपसी संवाद और समुदायों के बीच सहयोग जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहे.

अमेरिका और कनाडा के बाद अब शताब्दी आउटरीच कार्यक्रम का अंतिम पड़ाव लंदन है. ब्रिटेन में इस कार्यक्रम का नेतृत्व और समन्वय ‘इंटीग्रल’ नाम की संस्था कर रही है. यह संस्था ब्रिटेन के भीतर और ब्रिटेन-भारत के बीच संवाद, सहयोग और लंबे समय तक चलने वाले संबंधों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न समुदायों और नेताओं को एक मंच पर लाने का काम करती है.

इस कार्यक्रम में ब्रिटेन की 115 से ज्यादा सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाएं भी सहयोग कर रही हैं.

लंदन प्रवास के दौरान मोहन भागवत धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और अन्य प्रमुख लोगों से मुलाकात कर रहे हैं. इसी क्रम में उन्होंने विल्सडेन स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर और खालसा जत्था ब्रिटिश आइल्स गुरुद्वारे का दौरा किया है. वे लंदन के एक जैन मंदिर भी जाएंगे.

6 सितंबर को होगा ‘एकता का उत्सव’

लंदन दौरे का एक प्रमुख कार्यक्रम 6 सितंबर 2026 को आयोजित किया जाएगा. ‘एकता का उत्सव’ नाम से होने वाले इस कार्यक्रम में सामुदायिक नेताओं के लिए स्वागत समारोह और सभ्यतागत संवाद रखा गया है.

इस पहल की शुरुआत हिंदू स्वयंसेवक संघ UK ने ‘इंटीग्रल’ के साथ मिलकर की है. ब्रिटेन में 1966 में स्थापित HSS UK एक हिंदू सामाजिक और सांस्कृतिक संस्था है. आयोजकों के मुताबिक, इस कार्यक्रम में पूरे ब्रिटेन से 310 से ज्यादा सामुदायिक संस्थाओं और संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है.

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-भारत एक्सप्रेस



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