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प्रधानमंत्री से मिले…और मिनटों में सुलझ गया करोड़ों का मैटर! असगर अली से पीएम मोदी ने ऐसे निभाई बचपन की दोस्ती

पीएम मोदी के पुराने स्कूलमेट असगर अली वोरा ने 8 सितंबर को भायंदर की 2,810 वर्गमीटर जमीन के विवाद को लेकर उनसे मुलाकात की थी.

Modi

पीएम मोदी और असगर अली वोरा की मुलाकात का दृश्य

PM Modi School Friend Land Dispute: सत्ता के गलियारों में एक पुरानी कहावत है कि ‘दोस्ती जब पीएम पद तक हो, तो बड़े से बड़े महारथी को बैकफुट पर आना ही पड़ता है.’ ठाणे के भायंदर-मीरा रोड से कुछ ऐसा ही हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके बचपन के 81 वर्षीय दोस्त असगर अली वोरा की एक मुलाकात ने करोड़ों रुपये के विवादित प्लॉट का पासा पलट दिया है.

पीएम मोदी से शिकायत मिलने के कुछ ही दिनों के भीतर बीजेपी के पूर्व विधायक नरेंद्र मेहता ने न सिर्फ विवादित ज़मीन से अपना कब्जा छोड़ने का ऐलान कर दिया, बल्कि बुजुर्ग वोरा पर दर्ज कराई गई शिकायत भी वापस ले ली है.

8 सितंबर को हुई थी ‘दोस्त’ से मुलाकात

पूरा मामला तब सुर्खियों में आया जब 8 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके बचपन के दोस्त 81 साल के असगर अली वोरा ने मुलाकात की थी. इस भावुक मुलाकात की तस्वीरें महाराष्ट्र के मंत्री प्रताप सरनाईक ने सोशल मीडिया पर शेयर की थीं. सरनाईक ने तब दावा किया था कि ‘प्रधानमंत्री अपने बचपन के दोस्त को न्याय ज़रूर दिलाएंगे.’ पीएम मोदी से मिलने के दौरान वोरा ने अपनी ज़मीन पर हुए कथित कब्जे का मुद्दा सीधे प्रधानमंत्री के सामने रखा था.

क्या था 2,810 वर्ग मीटर ज़मीन का करोड़ों वाला विवाद?(PM Modi School Friend Land Dispute)

असगर अली वोरा के मुताबिक, उन्होंने साल 1989 में भायंदर पूर्व के नवघर इलाके में करीब 2,810 वर्ग मीटर ज़मीन एक रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के ज़रिए खरीदी थी. उन्होंने यह ज़मीन न तो कभी किसी को बेची और न ही ट्रांसफर की. आरोप है कि साल 2011 में ‘स्वयं बिल्डर्स’ और जाली दस्तावेज़ों के ज़रिए उनकी जानकारी के बिना ज़मीन को दो टुकड़ों में बांट दिया गया.

इसमें से एक हिस्से का मालिकाना हक ‘सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस’ को दे दिया गया, जिसका सीधा संबंध बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व विधायक नरेंद्र मेहता से है.

‘PM की एंट्री’ के बाद बीजेपी विधायक के बदले सुर

पीएम मोदी से असगर अली वोरा की मुलाकात और मीडिया में मामला गरमाने के बाद स्थानीय राजनीति में हड़कंप मच गया. भारी राजनीतिक दबाव और आलाकमान के इशारे के बाद बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता ने मंगलवार को बड़ा ऐलान किया. मेहता ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे इस विवादित ज़मीन से अपना दावा और कब्जा पूरी तरह छोड़ रहे हैं.

इसके साथ ही उन्होंने ज़मीन पर मिली कंस्ट्रक्शन परमिशन को भी वापस लेने की आधिकारिक प्रक्रिया (PM Modi School Friend Land Dispute) शुरू कर दी है.

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चर्चा का विषय बनी ‘मोदी-वोरा की दोस्ती’

81 साल के असगर अली वोरा के लिए यह किसी बड़ी जीत से कम नहीं है. सालों तक कानूनी दांव-पेच और बिल्डर्स के चक्कर काटने के बाद आखिरकार अपने बचपन के दोस्त नरेंद्र मोदी से एक मुलाकात ने उन्हें अपनी ज़मीन वापस दिला दी. इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रधानमंत्री मोदी अपने पुराने रिश्तों और दोस्तों को नहीं भूले हैं, और जब बात अपनों को न्याय दिलाने की हो, तो पार्टी का विधायक भी नियम-कायदों से ऊपर नहीं हो सकता.

-भारत एक्सप्रेस



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