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Loan EMI Alert: RBI बढ़ा सकता है रेपो रेट, होम-ऑटो लोन की बढ़ेगी EMI; जानिए कितना बढ़ेगा जेब पर बोझ

RBI Repo Rate Hike Loan EMI Impact: महंगाई और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते RBI आगामी मौद्रिक नीति बैठकों में रेपो रेट 0.50% तक बढ़ा सकता है. दरें बढ़ने से होम, ऑटो और पर्सनल लोन की EMI महंगी होगी, हालांकि FD पर ब्याज दरें बढ़ने से बचतकर्ताओं को फायदा मिलेगा.

RBI Repo Rate Hike Loan EMI Impact

RBI Repo Rate Hike Loan EMI Impact- bharat express

RBI Repo Rate Hike Loan EMI Impact: अगर आपने बैंक से होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन ले रखा है, तो आने वाले महीनों में आपकी EMI बढ़ सकती है. बाजार के जानकारों और कुछ बड़े विदेशी बैंकों के अनुमान के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अक्टूबर और दिसंबर की मॉनेटरी पॉलिसी बैठकों में रेपो रेट में 0.25-0.25 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकता है. यानी कुल आधा फीसदी तक दरें बढ़ सकती हैं.

महंगाई बनी सबसे बड़ी चिंता

अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, RBI के सामने सबसे बड़ी चुनौती महंगाई को नियंत्रित रखना है. अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 फीसदी हो गई, जबकि जुलाई में यह 4.45 फीसदी थी. SBI के विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले समय में महंगाई 6.5 फीसदी के पार भी जा सकती है. ऐसे में महंगाई पर काबू पाने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को सख्त कर सकता है.

कच्चे तेल और मौसम का भी असर

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी RBI की चिंता बढ़ा सकती है. अगर क्रूड ऑयल महंगा होता है, तो परिवहन लागत बढ़ने के साथ कई वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव पड़ सकता है. इसके अलावा अल नीनो और खराब मौसम से फसलों को नुकसान होने की आशंका खाद्य महंगाई को बढ़ा सकती है.

US Fed की नीति पर भी नजर

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर नीति भी भारत के लिए महत्वपूर्ण है. अगर अमेरिका में दरें बढ़ती हैं और भारत में ब्याज दरें स्थिर रहती हैं, तो दोनों देशों के बीच दरों का अंतर कम हो सकता है. जानकारों के मुताबिक, इससे विदेशी निवेश के प्रवाह पर असर पड़ने की संभावना रहती है.

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Deutsche Bank, SBI और HSBC का अनुमान

Deutsche Bank का अनुमान है कि RBI अक्टूबर से दरें बढ़ाना शुरू कर सकता है और 2027 की शुरुआत तक रेपो रेट में कुल 1 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है. SBI के मुताबिक अक्टूबर और दिसंबर में 0.25-0.25 फीसदी की दो बढ़ोतरी के बाद दरों में विराम आ सकता है. HSBC का अनुमान है कि महंगाई अगले 9 महीनों तक 5 फीसदी से ऊपर रह सकती है.

EMI के साथ FD पर भी असर

रेपो रेट बढ़ने पर बैंकों के लिए फंडिंग महंगी हो सकती है, जिसका असर होम, ऑटो और पर्सनल लोन की ब्याज दरों और EMI पर पड़ सकता है. दूसरी ओर, FD और सेविंग्स पर ब्याज दरें बढ़ने से बचत करने वालों को फायदा मिल सकता है.

भारत एक्सप्रेस



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