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पितृ पक्ष 2026: आज है चतुर्थी श्राद्ध, जानें विधि, नियम और विशेष धार्मिक महत्व

Pitru Paksha 2026: 30 सितंबर (बुधवार) को चतुर्थी तिथि का श्राद्ध किया जाएगा. सनातन परंपरा के अनुसार, जिन पूर्वजों का निधन किसी भी माह की चतुर्थी तिथि को हुआ हो, उनका श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान इसी दिन करने का विधान है.

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30 सितंबर को है चतुर्थी श्राद्ध (इमेज- AI Generated)

Edited by Sahil Singh

Pitru Paksha 2026: भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू हुआ 16 दिनों का पवित्र पितृ पक्ष हमारे पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और आभार व्यक्त करने का पावन समय है. इस वर्ष 26 सितंबर से शुरू हुआ यह पितृ पक्ष 10 अक्टूबर तक चलेगा. इसी कड़ी में आज 30 सितंबर (बुधवार) को चतुर्थी तिथि का श्राद्ध किया जाएगा. सनातन परंपरा के अनुसार, जिन पूर्वजों का निधन किसी भी माह की चतुर्थी तिथि को हुआ हो, उनका श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान इसी दिन करने का विधान है.

चतुर्थी श्राद्ध का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान हमारे पूर्वज पितृलोक से धरती पर आते हैं और अपने वंशजों के बीच अदृश्य रूप में वास करते हैं. इस दौरान श्रद्धापूर्वक किया गया तर्पण और दान पितरों की आत्मा को परम तृप्ति प्रदान करता है. जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष हो, उनके लिए इस दिन पूजा-पाठ और दान करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है. इससे घर में सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य का वास होता है.

श्राद्ध और पूजन की सरल विधि

पितरों को प्रसन्न करने के लिए इस दिन पूरी पवित्रता के साथ निम्नलिखित विधि से पूजन करें:

स्नान व संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें. इसके बाद हाथ में जल लेकर पूर्वजों का स्मरण करते हुए श्राद्ध का संकल्प लें.

तर्पण: दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके हाथ में जल, कुशा, अक्षत और काले तिल लेकर पितरों को जलांजलि (तर्पण) दें.

पिंडदान: पके हुए चावल, जौ के आटे, तिल और घी को मिलाकर पिंड बनाएं और पूर्वजों को अर्पित करें.

पंचबलि भोग: श्राद्ध का भोजन तैयार होने पर सबसे पहले पंचबलि निकालें. यानी भोजन का अंश गाय, कुत्ते, कौवे, देव और चींटियों के लिए अलग रखें. इन्हें पितरों का प्रतिनिधि माना जाता है.

ब्राह्मण भोज व दान: अंत में सम्मानपूर्वक सात्विक भोजन कराकर योग्य ब्राह्मण को वस्त्र, तिल और यथाशक्ति दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लें.

शुभ मुहूर्त

शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध कर्म हमेशा दोपहर के समय यानी कुटुप काल या अभिजीत मुहूर्त में ही करना चाहिए. सुबह या शाम के समय श्राद्ध करना वर्जित माना गया है. पूरी श्रद्धा और नियम से किया गया यह कार्य परिवार पर पितरों की कृपा बनाए रखता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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