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जापान की धरती पर छा गए हिमाचल के लाल… आर्मीमैन सावन बरवाल पर गदगद हुए पीएम मोदी

भारतीय मैराथन धावक और आर्मीमैन सावन बरवाल ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुष मैराथन स्पर्धा में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाते हुए ऐतिहासिक रजत पदक अपने नाम किया है. उनके हासिल पर पीएम मोदी गदगद हो गए हैं.

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भारतीय एथलेटिक्स जगत के लिए एशियन गेम्स 2026 का मंच एक बार फिर स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया है. हिमाचल प्रदेश के रहने वाले 28 वर्षीय आर्मीमैन और स्टार डिस्टेंस रनर सावन बरवाल ने पुरुष मैराथन स्पर्धा में अपने अदम्य साहस, कड़ी मेहनत और शानदार स्टैमिना का प्रदर्शन करते हुए ऐतिहासिक रजत (सिल्वर) पदक अपने नाम किया है. सावन ने इस दौरान अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ते हुए 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड का नया और शानदार समय दर्ज किया. उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने एशियन गेम्स की इस कठिन स्पर्धा में देश के 44 साल लंबे सूखे को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है.

नागोया में रचा नया इतिहास, तोड़ा खुद का ही रिकॉर्ड

जापान के नागोया में आयोजित इस कड़े मुकाबले में सावन बरवाल ने शुरुआत से ही अपनी शानदार लय बनाए रखी. उन्होंने जापान के इचिताका यामाशिता (2:10:49) के बाद दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि चीन के पेइयू फेंग (2:12:13) तीसरे स्थान पर रहे. उल्लेखनीय है कि सावन ने इसी साल अप्रैल में रॉटरडैम मैराथन में 2:11:58 का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था, जिसने शिवनाथ सिंह के 48 साल पुराने रिकॉर्ड को तोड़ा था. अब नागोया की इस प्रतिष्ठित रेस में उन्होंने अपने ही रिकॉर्ड को 21 सेकंड और बेहतर कर दिया है.

यह भारत का एशियन गेम्स के इतिहास में चौथा मैराथन पदक है. इससे पहले 1951 में छोटा सिंह ने स्वर्ण और सूरत सिंह माथुर ने कांस्य जीता था, जबकि 1982 के दिल्ली एशियाई खेलों में होसुर कुक्कप्पा सीतारण ने कांस्य पदक हासिल किया था. लेकिन सावन बरवाल पहले ऐसे भारतीय बन गए हैं जिन्होंने देश के बाहर किसी एशियाई खेल में मैराथन का पदक जीता है. अपनी 15-16 वर्षों की लंबी तपस्या और मेहनत का फल मिलने पर सावन ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य देश के लिए पदक जीतना था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी बधाई

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर सावन की इस अभूतपूर्व सफलता की सराहना करते हुए लिखा, “सावन बरवाल को एशियाई खेलों में पुरुष मैराथन में ऐतिहासिक रजत पदक पर बधाई. नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड और 40 से अधिक वर्षों बाद इस इवेंट में भारत का पहला पदक, जो देश के बाहर जीता गया पहला एशियाई खेल मैराथन पदक है. उनकी सहनशक्ति और दृढ़ संकल्प ने देश को गर्व दिलाया. आगे की यात्रा के लिए शुभकामनाएं.” सावन की यह सफलता देश के करोड़ों युवाओं और उभरते एथलीटों के लिए एक प्रेरणा है.



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