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ब्लैक मंडे: खुलते ही स्वाहा हुए 6 लाख करोड़, सेंसेक्स 1000 अंक टूटा; युद्ध की आहट से कांपा दलाल स्ट्रीट?

Black Monday Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1000 अंक से ज्यादा टूट गया.

Black Monday

लाल निशान में सेंसेक्स-निफ्टी और गिरता शेयर बाजार दिखाता सिनेमैटिक फाइनेंशियल विजुअल, PC-@Chatgpt

Black Monday Stock Market Crash: सप्ताह के पहले ही कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में ‘ब्लैक मंडे’ जैसी स्थिति देखने को मिली. बाजार खुलते ही बिकवाली की ऐसी आंधी आई कि महज कुछ ही घंटों में निवेशकों के लगभग 6 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो गए. सुबह 11 बजे तक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 1000 अंक (1.30%) से ज्यादा टूटकर धड़ाम हो गया, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 300 से अधिक अंकों की बड़ी गिरावट के साथ 22,900 के अहम स्तर के नीचे आ गिरा. इस बड़ी गिरावट के पीछे ग्लोबल स्तर पर मंडरा रहे युद्ध के बादल और क्रूड ऑयल की आग मुख्य वजह है.

ट्रंप के बयान से बाजार में आई दहशत?(Stock Market Crash)

दलाल स्ट्रीट में इस हाहाकार की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच गहराता तनाव है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर नए सैन्य हमलों की संभावना को खारिज नहीं किया है. ट्रंप द्वारा ईरान के 7 दिन के सीजफायर और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने के प्रस्ताव को ठुकराने के बाद वैश्विक निवेशकों में युद्ध लंबा खींचने का डर बैठ गया है.

कच्चे तेल में भड़की आग भी बनी वजह

मिडिल ईस्ट में सप्लाई बाधित होने की आशंका से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उबाल आ गया है. ब्रेंट क्रूड 2 फीसदी उछलकर 107 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गया है, वहीं WTI क्रूड भी 94 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है, ऐसे में क्रूड का महंगा होना भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों के मार्जिन के लिए सीधा खतरा है.

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20 साल के रिकॉर्ड स्तर पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड

अमेरिकी बॉन्ड मार्केट में आई तेजी ने भी शेयर बाजार का खेल (Stock Market Crash) बिगाड़ दिया है. अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 5.2 फीसदी के पार पहुंच गई है, जो साल 2004 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है. बॉन्ड यील्ड में इस रिकॉर्ड उछाल के कारण विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय शेयर बाजार से पैसे निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड्स में डाल रहे हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

मार्केट एनालिस्ट्स के मुताबिक, जब तक मिडिल ईस्ट में जियोपॉलीटिकल तनाव कम नहीं होता और क्रूड ऑयल के दाम काबू में नहीं आते, तब तक भारतीय बाजार पर दबाव बना रहेगा. निवेशकों को फिलहाल निचले स्तरों पर जल्दबाजी में आक्रामक खरीदारी करने से बचने और सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है.

-भारत एक्सप्रेस



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