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पीएम मोदी ने साझा किया नीतिशतकम् का पावरफुल श्लोक: बताया ‘अमृत’ मिलने तक क्यों नहीं रुके देवता

PM Modi Niti Shatakam Shlok: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भर्तृहरि के नीतिशतकम् का श्लोक साझा कर धैर्य, साहस और लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहने का संदेश दिया.

PM Modi Sanskrit Shloka

पीएम मोदी ने संस्कृत सुभाषित साझा किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (ट्विटर) पर महर्षि भर्तृहरि के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘नीतिशतकम्’ का एक बेहद प्रेरणादायक श्लोक साझा किया है. पीएम मोदी ने इस सुभाषित संदेश के जरिए देशवासियों को धैर्य, साहस और दृढ़ निश्चय का मूल मंत्र देते हुए बताया कि एक सच्चा धीर व्यक्ति अपने निश्चित लक्ष्य की प्राप्ति तक बिना रुके निरंतर प्रयत्नशील रहता है.

पीएम मोदी ने शेयर किया श्लोक

प्रधानमंत्री ने संस्कृत श्लोक “रत्नैर्महाब्धेस्तुतुषुर्न देवा न भेजिरे भीमविषेण भीतिम्. सुधां विना न प्रययुर्विरामं न निश्चितार्थाद्विरमन्ति धीराः॥” साझा करते हुए इसका भावार्थ समझाया. उन्होंने लिखा कि समुद्र मंथन के दौरान देवताओं को बहुमूल्य रत्न मिले, फिर भी वे संतुष्ट नहीं हुए; भयंकर विष निकला, फिर भी वे डरे नहीं और जब तक उन्हें अमृत की प्राप्ति नहीं हो गई, तब तक वे नहीं रुके. ठीक इसी प्रकार धैर्यवान और दृढ़ निश्चयी लोग अपने परम लक्ष्य को पाए बिना कभी विश्राम नहीं करते.

न छोटे प्रलोभनों में फंसे, न भयंकर संकट से डरे

पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवताओं और दैत्यों ने मिलकर क्षीरसागर का मंथन किया, तो उससे ऐरावत, पारिजात और कौस्तुभ मणि जैसे अद्भुत रत्न निकले. कोई सामान्य व्यक्ति इन छोटे प्रलोभनों को पाकर ही संतुष्ट हो सकता था, लेकिन देवताओं का अंतिम ध्येय केवल ‘अमृत’ पाना था. रास्ते में जब भयंकर विष ‘हलाहल’ निकला, तब भी देवताओं ने घबराकर अपने कदम पीछे नहीं खींचे और निरंतर प्रयास करते रहे.

लक्ष्य से भटकाने वाली राहों से ऊपर उठने की प्रेरणा

इस श्लोक का सीधा संदेश यह है कि जीवन में बड़ी सफलता हासिल करने के लिए व्यक्ति को तात्कालिक लाभ या प्रलोभनों से ऊपर उठना पड़ता है. राह में आने वाले भीषण संकटों और चुनौतियों से घबराए बिना अपने ध्येय के प्रति अडिग रहना ही असली सफलता की कुंजी है. जब तक अंतिम लक्ष्य हासिल न हो जाए, तब तक प्रयास रोक देना धीर पुरुषों का स्वभाव नहीं होता.

देशवासियों को जीवन में उतारने की दी सीख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर देशवासियों और युवाओं को प्रेरित करने के लिए प्राचीन संस्कृत ग्रंथों से सुभाषित और श्लोक साझा करते रहते हैं. उनका यह संदेश हर उस व्यक्ति के लिए मार्गदर्शन का काम करता है जो अपने जीवन में किसी बड़े लक्ष्य की ओर अग्रसर है और राह की बाधाओं या छोटे प्रलोभनों से जूझ रहा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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