तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अब दो सप्ताह बाद सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए अदालत से एक हफ्ते का समय मांगा.
जस्टिस जॉयमाल्या बागची की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान मामले पर चिंता व्यक्त की. याचिका में महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया है कि उन्हें कृष्णानगर से सांसद के रूप में अपने संसदीय दायित्वों को निभाने में लगातार रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है.
सुप्रीम कोर्ट ने पत्र पर जताई चिंता
सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने 1 सितंबर के उस आधिकारिक पत्र की ओर ध्यान दिलाया, जिसमें सांसद को अपने दौरों की अग्रिम सूचना देने की बात कही गई थी. जस्टिस बागची ने कहा कि कोर्ट सांसद की चिंताओं से सहमत है और उन्होंने एसजी मेहता से पूछा कि क्या उन्होंने 1 सितंबर के पत्र का अवलोकन किया है. इस पर एसजी तुषार मेहता ने कहा कि उनके पास इसका जवाब है और वह 5 अक्टूबर को अपना हलफनामा अदालत के समक्ष दाखिल कर देंगे.
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा विवाद पश्चिम बंगाल के नदिया स्थित सर्किट हाउस को जबरन खाली कराने के आदेश से जुड़ा हुआ है. महुआ मोइत्रा के अनुसार, वह 14 अगस्त की शाम नदिया सर्किट हाउस पहुंची थीं, जहां उन्हें उनका नियमित कमरा आवंटित किया गया था. शाम 7 बजे उन्हें चाय और रात 9:20 बजे डिनर दिया गया, लेकिन इसके तुरंत बाद जिलाधिकारी (DM) के निर्देश पर उन्हें अचानक सर्किट हाउस खाली करने को कह दिया गया.
इस घटना के बाद महुआ मोइत्रा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को विशेषाधिकार हनन (Privilege Notice) का नोटिस भेजा था. उन्होंने तीन वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रोटोकॉल के गंभीर उल्लंघन और अपमानजनक व्यवहार का आरोप लगाते हुए कहा कि यह कार्रवाई उन्हें बतौर सांसद काम करने से रोकने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा है.
महुआ मोइत्रा के समर्थन में आया विपक्षी दल
इस मुद्दे पर कई विपक्षी नेता महुआ मोइत्रा के समर्थन में उतर आए हैं. टीएमसी के राज्यसभा उपनेता डेरेक ओ’ब्रायन ने राज्य में प्रशासनिक रवैये पर सवाल उठाए, जबकि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने पूछा कि क्या देर रात सांसद को निकालना विशेषाधिकार हनन नहीं है. वहीं, सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे अस्वीकार्य बताया और लोकसभा स्पीकर से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की.
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-भारत एक्सप्रेस
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