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‘डार्क वेब पर बिक रहा भारतीयों का डेटा…’, सुप्रीम कोर्ट की चिंता, निजता की सुरक्षा पर उठाए गंभीर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने साइबर सिक्योरिटी और नागरिकों के निजी डेटा की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है. कोर्ट ने कहा कि तकनीक के तेजी से बदलते दौर में बिना अनुमति डिजिटल डेटा तक पहुंच बनाने के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं.

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सुप्रीम कोर्ट ने साइबर सिक्योरिटी और लोगों के निजी डेटा की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि तकनीकी के तेजी से बदलते दौर में बिना अनुमति किसी के डिजिटल डेटा तक पहुंच बनाने के तरीके लगातार बदल रहे है.

ऐसे में लोगों की निजी जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए मौजूद सुरक्षा व्यवस्था को भी समय के साथ लगातार मजबूत करने की जरूरत है. जस्टिस जॉयमाल्या बागची की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि यह बात अब आम जानकारी है कि भारतीय नागरिकों का डेटा डार्क वेब पर बेचा जा रहा है.

कोर्ट की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन सेवाओं और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है. कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि साइबर अपराधी जिस तेजी से डेटा सुरक्षा के उपायों को भी अपडेट किया जाना चाहिए. केवल मौजूदा सुरक्षा उपायों पर निर्भर रहने के बजाए लगातार बदलते साइबर खतरों को ध्यान में रखते हुए लगातार बदलते साइबर खतरों को ध्यान में रखते हुए फायरवॉल, सुरक्षा प्रोटोकॉल और अन्य गार्डरेल्स को मजबूत करना जरूरी है.

साइबर सुरक्षा व्यवस्था को लगातार अपडेट करना जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि साइबर सुरक्षा कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है, जिसे एक बार लागू करने के बाद छोड़ दिया जाए. जैसे-जैसे बिना अनुमति डिजिटल सिस्टम में प्रवेश करने के नए तरीके सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे सुरक्षा तंत्र में भी बदलाव जरूरी है. कोर्ट का कहना था कि लोगों के व्यक्तिगत डेटा को अनधिकृत पहुंच, चोरी और गलत इस्तेमाल से बचाने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था होनी चाहिए. इसमें डेटा स्टोरेज से लेकर उसके ट्रांसफर और इस्तेमाल तक हर स्तर पर सुरक्षा उपायों को प्रभावी बनाए रखना जरूरी है.

व्यक्तिगत डेटा के लीक होने से किसी व्यक्ति की पहचान, वित्तीय जानकारी, संपर्क विवरण या अन्य संवेदनशील डिजिटल जानकारी के दुरुपयोग का खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में कोर्ट ने डेटा सुरक्षा को केवल तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि आम लोगों की निजता और सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय माना. सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का व्यापक संदेश यह है कि साइबर सुरक्षा व्यवस्था को लगातार विकसित होने वाली तकनीक के अनुरूप तैयार करना होगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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