PM Narendra Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 अक्टूबर को महान स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी नेता श्यामजी कृष्ण वर्मा की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. पीएम मोदी ने औपनिवेशिक गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने और देश के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए उनके अटूट समर्पण और संघर्ष को याद किया.
4 अक्टूबर 1857 को गुजरात के कच्छ स्थित मांडवी में जन्मे श्यामजी कृष्ण वर्मा ने विदेश की धरती से भारत की आजादी का बिगुल फूंका था. उन्होंने लंदन में प्रसिद्ध ‘इंडिया हाउस’ की स्थापना की, जो वीर सावरकर जैसे तमाम युवा क्रांतिकारियों का प्रमुख केंद्र बना. इसके अलावा उन्होंने ‘द इंडियन सोशियोलॉजिस्ट’ पत्रिका के माध्यम से भारत की स्वाधीनता की आवाज को दुनिया भर में बुलंद किया.
महान क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा को उनकी जयंती पर सादर नमन। मां भारती की पराधीनता की बेड़ियों को तोड़ने के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया। मातृभूमि के स्वाभिमान की रक्षा के लिए उन्होंने जिस पराक्रम और पुरुषार्थ का परिचय दिया, कृतज्ञ राष्ट्र उसे कभी भुला नहीं सकता।
— Narendra Modi (@narendramodi) October 4, 2026
महान स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा की जयंती पर पीएम मोदी ने किया नमन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 अक्टूबर को क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी श्यामजी कृष्ण वर्मा की जयंती के अवसर पर उन्हें नमन किया. पीएम मोदी ने कहा कि श्यामजी कृष्ण वर्मा का जीवन औपनिवेशिक बेड़ियों को तोड़ने और भारत के आत्मसम्मान व संप्रभुता की रक्षा के लिए समर्पित रहा. देश की आजादी में उनके अतुलनीय योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा.
मांडवी से लंदन तक: आजादी की अलख जगाने वाला महान विद्वान
श्यामजी कृष्ण वर्मा का जन्म 4 अक्टूबर 1857 को गुजरात के कच्छ जिले के मांडवी में हुआ था. वह एक मेधावी विद्वान, बैरिस्टर और कई रियासतों में दीवान के पद पर कार्यरत रहे. लेकिन देश प्रेम के जज्बे के कारण उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम का रास्ता चुना और विदेश जाकर अंग्रेजों के खिलाफ भारतीय स्वाधीनता आंदोलन की नींव मजबूत की.
‘इंडिया हाउस’ और क्रांतिकारी विचारों का प्रचार
साल 1905 में श्यामजी कृष्ण वर्मा ने लंदन में ‘इंडिया हाउस’ की स्थापना की, जिसने विदेश में रह रहे भारतीय राष्ट्रवादियों और युवाओं को एक मंच प्रदान किया. यह जगह वीर सावरकर जैसे महान क्रांतिकारियों का प्रमुख केंद्र बनी. उन्होंने ‘द इंडियन सोशियोलॉजिस्ट’ नाम से एक समाचार पत्र भी निकाला, जिसके जरिए विदेश की धरती से भारत की आजादी और स्वशासन की पुरजोर वकालत की गई.
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-भारत एक्सप्रेस
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