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मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देश की राजधानी दिल्ली में सियासी पारा चढ़ गया है. रविवार, 4 अक्टूबर को आम आदमी पार्टी समेत कई छात्र संगठनों और विपक्षी नेताओं ने इंडिया गेट की ओर विरोध मार्च निकाला. हाथों में पोस्टर-बैनर लिए सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों ने जोरदार नारेबाजी की. इस बीच, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आप के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया.
पुलिस की धक्का-मुक्की पर भड़के AAP अध्यक्ष
हिरासत में लिए जाने के दौरान मीडिया से बातचीत में सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली पुलिस के रवैये पर कड़ा ऐतराज जताया. उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कहा, ‘पुलिस मुझे इस तरह उठाकर पटक रही है, मानो मैं कोई फुटबॉल होऊं. यहां इतनी बड़ी पुलिस फोर्स तैनात है, लेकिन वे अपने ही एक एसीपी के खिलाफ ना तो एफआईआर दर्ज कर रहे हैं और ना ही उसे गिरफ्तार कर रहे हैं.”
भारद्वाज ने आरोप लगाया कि जब जनप्रतिनिधियों और पत्रकारों के साथ पुलिस का ऐसा बर्ताव है, तो आम नागरिक की सुरक्षा का क्या हाल होगा.
दिल्ली पुलिस पर अभद्रता और छेड़खानी का भी आरोप
इसी दौरान शांगरी-ला होटल के पास AISA से जुड़े छात्र-छात्राओं ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया, जहां से आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा को समर्थकों सहित हिरासत में भेज दिया गया. विरोध मार्च में शामिल माकपा (CPM) की वरिष्ठ नेता वृंदा करात ने पुलिस प्रशासन पर सीधा हमला बोला. उन्होंने एक महिला प्रदर्शनकारी के साथ दिल्ली पुलिस के एक एसीपी द्वारा कथित तौर पर अभद्रता और छेड़खानी करने का आरोप लगाया.
वृंदा करात ने गुस्से में कहा कि दिल्ली पुलिस सबूत के तौर पर वीडियो मांग रही है, जो शर्मनाक है. उन्होंने सवाल उठाया कि किसी एसीपी को महिला को इस तरह छूने की हिम्मत कैसे हुई? क्या उन्हें पुलिस प्रोटोकॉल और एसओपी (SOP) का जरा भी अंदाजा नहीं है? नेताओं ने साफ कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, यह आंदोलन थमने वाला नहीं है.
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-भारत एक्सप्रेस
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