पीएम मोदी के दौरे के बाद बदली लक्षद्वीप की तस्वीर
PM Modi Lakshadweep: कदमत, किल्तान, चेतलत, बितरा, एंड्रॉट, कल्पेनी और मिनिकॉय ये लक्षद्वीप के उन द्वीपों के नाम हैं, जहां दशकों तक पहुंच आसान नहीं रही. मुख्य भूमि से इन द्वीपों को जोड़ने के लिए अगत्ती की छोटी हवाई पट्टी और जहाज ही सबसे बड़े सहारे थे. लेकिन अब लक्षद्वीप की तस्वीर धीरे-धीरे बदल रही है. यहां पर्यटन बढ़ाने के साथ-साथ कनेक्टिविटी और रणनीतिक ढांचे पर भी तेजी से काम हो रहा है.
जनवरी 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लक्षद्वीप पहुंचे थे. उनकी यात्रा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुईं. इसके बाद देशभर में लक्षद्वीप घूमने को लेकर चर्चा तेज हो गई. कई लोगों ने भारतीय द्वीपसमूह को एक्सप्लोर करने की बात कही.
इसके बाद लक्षद्वीप में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं पर जोर दिया गया. नए रिसॉर्ट, होमस्टे और बेहतर कनेक्टिविटी की योजनाएं सामने आईं. इसमें हेलीकॉप्टर के जरिए कनेक्टिविटी बढ़ाने की योजना भी शामिल है.
पर्यटन से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर में हुआ बदलाव
लक्षद्वीप में अब जो बदलाव हो रहा है, वह सिर्फ पर्यटन तक सीमित नहीं है. बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट भी इस बदलाव का हिस्सा हैं. केंद्र सरकार ने अगत्ती एयरफील्ड के विस्तार को मंजूरी दी है. इसके अलावा मिनिकॉय में नया एयरफील्ड बनाने की भी योजना है.
खास बात यह है कि इन एयरफील्ड का इस्तेमाल सिर्फ नागरिक उड़ानों के लिए नहीं होगा. इन्हें सैन्य और नागरिक, दोनों तरह के ऑपरेशन को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है. सरकार का कहना है कि इससे मुख्य भूमि से कनेक्टिविटी बेहतर होगी, ऑपरेशनल क्षमता बढ़ेगी और पर्यटन के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा.
लक्षद्वीप में नौसेना ने भी बढ़ाया अपना दायरा
लक्षद्वीप में हो रहा बदलाव अब सुरक्षा के मोर्चे पर भी साफ दिखाई दे रहा है. 6 मार्च 2024 को मिनिकॉय में INS जटायु की शुरुआत हुई थी. यह प्रधानमंत्री मोदी की लक्षद्वीप यात्रा के करीब दो महीने बाद हुआ. नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार ने इसका उद्घाटन किया.
इसके साथ ही मिनिकॉय में मौजूद नेवल डिटैचमेंट को एक स्वतंत्र नौसैनिक बेस में बदल दिया गया. नौसेना के मुताबिक, इससे इलाके में निगरानी और ऑपरेशन करने की उसकी क्षमता बढ़ेगी. पश्चिमी अरब सागर में समुद्री डकैती और नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अभियान चलाने में भी यह बेस अहम भूमिका निभा सकता है.
मिनिकॉय लक्षद्वीप का सबसे दक्षिणी द्वीप है. यह हिंद महासागर के कई महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों के करीब है. यही वजह है कि नौसेना के लिए इसकी लोकेशन काफी अहम मानी जाती है. INS जटायु से पहले लक्षद्वीप में नौसेना का प्रमुख ठिकाना कवरत्ती में INS द्वीप्रक्षक था. मिनिकॉय में नया बेस बनने के बाद अब द्वीपसमूह में नौसेना की एक और स्थायी मौजूदगी हो गई है.
आखिर लक्षद्वीप इतना रणनीतिक क्यों है?
लक्षद्वीप की अहमियत सिर्फ इसके समुद्र, बीच और पर्यटन की वजह से नहीं है. ये द्वीप ऐसे समुद्री रास्तों के करीब हैं जो मध्य पूर्व को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ते हैं. यानी यहां की भौगोलिक स्थिति भारत की समुद्री सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है. अधिकारियों के मुताबिक, भारत के पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में समुद्री डकैती जैसी चुनौतियां और हिंद महासागर क्षेत्र का बढ़ता रणनीतिक महत्व लक्षद्वीप की भूमिका को और अहम बनाता है.
नौसेना की बढ़ी मौजूदगी का मकसद इलाके में निगरानी और किसी भी खतरे की स्थिति में तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता को मजबूत करना है. सरकार ने लक्षद्वीप में एयरफील्ड के विकास को भी रक्षा और नागरिक, दोनों जरूरतों से जोड़ा है.
मार्च 2024 में नौसेना के कमांडर्स कॉन्फ्रेंस के दौरान INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य को लक्षद्वीप के पास तैनात किया गया था. इससे भी इस द्वीपसमूह के बढ़ते रणनीतिक और ऑपरेशनल महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है.
बितरा में बन सकता है नौसेना का एक और ठिकाना
लक्षद्वीप में अब उत्तर की तरफ स्थित बितरा पर भी नजर है. यह करीब 200 लोगों की आबादी वाला लक्षद्वीप का सबसे छोटा आबाद द्वीप है. बितरा में संभावित रूप से एक फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस बनाने पर विचार किया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित सुविधा के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर सोशल इंपैक्ट असेसमेंट यानी सामाजिक प्रभाव आकलन की प्रक्रिया चल रही है.
अगर यह योजना आगे बढ़ती है तो उत्तरी लक्षद्वीप में नौसेना की निगरानी क्षमता बढ़ सकती है. इसका मकसद इस इलाके में मौजूद निगरानी से जुड़े अंतर को कम करना और नौसेना की ऑपरेशनल पहुंच बढ़ाना है. हालांकि, स्थानीय लोगों के बीच इस प्रस्ताव को लेकर उम्मीद और चिंता दोनों हैं.
लोगों को उम्मीद है कि अगर यहां पूरा नौसैनिक बेस बनता है तो रोजगार के नए मौके मिलेंगे और मेडिकल सुविधाएं भी बेहतर हो सकती हैं. दूसरी तरफ, यह इलाका पर्यावरण के लिहाज से काफी संवेदनशील है. ऐसे में संभावित विस्थापन को लेकर भी चिंता जताई जा रही है.
एक ही इंफ्रास्ट्रक्चर से पर्यटन और सुरक्षा दोनों
लक्षद्वीप में बन रहा नया इंफ्रास्ट्रक्चर अब एक ऐसे मॉडल की ओर बढ़ रहा है, जिसका इस्तेमाल नागरिक और रक्षा, दोनों जरूरतों के लिए किया जा सके. अगत्ती एयरफील्ड का विस्तार और मिनिकॉय में प्रस्तावित एयरफील्ड इसी योजना का हिस्सा हैं. सरकार के मुताबिक, इन सुविधाओं पर सैन्य विमानों के साथ नागरिक विमानों का संचालन भी किया जा सकेगा.
इससे एक तरफ मुख्य भूमि से लक्षद्वीप की कनेक्टिविटी बेहतर होगी तो दूसरी तरफ सेना की लॉजिस्टिक और ऑपरेशनल जरूरतों को भी पूरा करने में मदद मिलेगी. मिनिकॉय एयरफील्ड परियोजना को द्वीपों में चल रहे व्यापक इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार से भी जोड़कर देखा जा रहा है. बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
नौसेना के लिए यही कनेक्टिविटी लॉजिस्टिक सपोर्ट देने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री इलाकों तक पहुंच आसान बनाने में मदद कर सकती है.
दो साल में कितना बदल गया लक्षद्वीप?
जनवरी 2024 में प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीरों के वायरल होने के बाद देशभर में लक्षद्वीप को लेकर अचानक चर्चा शुरू हुई थी. लेकिन दो साल बाद तस्वीर सिर्फ पर्यटन के लिहाज से नहीं बदल रही है. पर्यटन अभी भी इस बदलाव का बड़ा हिस्सा है, लेकिन इसके साथ-साथ इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा पर भी तेजी से काम हो रहा है.
अगत्ती के बढ़ाए जा रहे एयरफील्ड से लेकर मिनिकॉय के नौसैनिक बेस और बितरा में प्रस्तावित सुरक्षा ठिकाने तक, लक्षद्वीप को अब भारत की मुख्य भूमि के इंफ्रास्ट्रक्चर और समुद्री सुरक्षा नेटवर्क से पहले के मुकाबले ज्यादा मजबूती से जोड़ा जा रहा है.
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यानी लक्षद्वीप अब सिर्फ छुट्टियां बिताने की खूबसूरत जगह नहीं रह गया है. एक तरफ इसे बड़ा पर्यटन केंद्र बनाने की कोशिश हो रही है और दूसरी तरफ हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक मौजूदगी मजबूत करने के लिए भी इसका महत्व बढ़ रहा है. यही दोनों पहलू मिलकर लक्षद्वीप की बदलती तस्वीर तैयार कर रहे हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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