Russia Plague Scare: कोरोना महामारी के जख्म अभी पूरी तरह भरे भी नहीं थे कि दुनिया पर एक बार फिर इतिहास की सबसे घातक और खौफनाक महामारी ‘प्लेग’ (Black Death) का साया मंडराने लगा है. रूस के साइबेरियाई शहर इरकुत्स्क स्थित ‘एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट’ में 28 साल की युवा वैज्ञानिक दर्या शिपिलोवा की रहस्यमयी परिस्थितियों में दर्दनाक मौत के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मच गया है.
लैब में ‘टेस्ट ट्यूब’ टूटने और खतरनाक बैक्टीरिया के हवा में लीक होने की खबरों के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) हाई-अलर्ट पर आ गया है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सीधी बात करने का ऐलान कर दिया है.
जानिए कितना खौफनाक है प्लेग का इतिहास?(Russia Plague Scare)
जिस ‘प्लेग’ के बैक्टीरिया लीक होने की आशंका से आज पूरी दुनिया कांप रही है, वह मानव इतिहास का सबसे जानलेवा संक्रमण माना जाता है:
ब्लैक डेथ (Black Death): 14वीं शताब्दी (1346-1353) के दौरान यूरोप और एशिया में प्लेग की महामारी ने भयानक तबाही मचाई थी, जिसमें करीब 20 करोड़ (200 मिलियन) से अधिक लोग ज़िंदा जल या गलकर मर गए थे.
इंसानों का नामो-निशान मिटाने की ताकत: यह ‘येर्सिनिया पेस्टिस’ नाम के बैक्टीरिया से फैलता है. अगर यह फेफड़ों तक पहुंच जाए, तो महज 24 से 48 घंटे के भीतर इंसान के फेफड़े पानी बनकर खत्म हो जाते हैं और मरीज तड़प-तड़पकर दम तोड़ देता है.
लैब में टूटा बैक्टीरिया से भरा टेस्ट ट्यूब?
यह पूरा बवाल तब शुरू हुआ जब इरकुत्स्क के एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में कार्यरत 28 वर्षीय दर्या शिपिलोवा को अचानक सांस लेने में भयंकर तकलीफ हुई और 2 अक्टूबर को गंभीर निमोनिया की वजह से उनकी मौत हो गई. मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि लैब में काम के दौरान प्लेग के बैक्टीरिया से भरा एक टेस्ट ट्यूब टूट गया था, जिसके जरिए दर्या शिपिलोवा संक्रमित हो गईं.
हालांकि, रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसे ‘अज्ञात निमोनिया’ करार देते हुए लैब लीक की बात से इनकार किया है, लेकिन कोई भी इस थ्योरी पर भरोसा करने को तैयार नहीं है.
संपर्क में आए 200 लोग अचानक क्वारंटाइन
दर्या शिपिलोवा की मौत के तुरंत बाद रूसी प्रशासन ने आनन-फानन में कड़े कदम उठाते हुए उनके संपर्क में आए करीब 200 सहकर्मियों, डॉक्टरों और परिजनों को मेडिकल निगरानी (Quarantine) में रख दिया है. एक सीक्रेट बायो-रिसर्च सेंटर से जुड़े इतने बड़े समूह को अचानक एकांतवास में भेजने से अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं. लोगों को डर है कि कहीं रूस इस लैबोरेट्री में खतरनाक जैविक हथियारों (Bio-weapons) पर तो काम नहीं कर रहा था?
WHO ने रूस से मांगा जवाब
प्लेग लीक होने की खबरें फैलते ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इंटरनेशनल हेल्थ रेगुलेशन्स (IHR) के तहत रूस की सरकार से तत्काल पूरी मेडिकल रिपोर्ट तलब की है. हालांकि रूस ने WHO को लिखित में जवाब दिया है कि देश में प्लेग का कोई कन्फर्म केस नहीं मिला है और क्वारंटाइन किए गए लोगों में केवल सामान्य वायरल लक्षण हैं.
इसके बावजूद WHO ने रूस से दर्या शिपिलोवा की विस्तृत ऑटोप्सी रिपोर्ट, लैब टेस्ट के नतीजे और दूसरे बीमार कर्मचारियों का पूरा ब्योरा मांगा है.
पुतिन को सीधा फोन मिलाएंगे डोनाल्ड ट्रंप
रूस के इस घटनाक्रम (Russia Plague Scare) पर अमेरिका ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेतावनी देते हुए कहा कि जो कीटाणु और बैक्टीरिया पहले काबू में आ जाते थे, वे अब म्यूटेंट होकर किसी क्रूर आर्मी की तरह चालाक और मजबूत हो चुके हैं. प्लेग कोई मामूली बीमारी नहीं है.
साथ ही ट्रंप ने ऐलान किया है कि वे इस लैब लीक और महामारी के खतरे पर बहुत जल्द रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से टेलीफोन पर “गहरी और सख्त चर्चा” करेंगे. पूरी दुनिया इस वक्त सांस रोककर रूस के अगले कदम का इंतजार कर रही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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