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पाकिस्तान को उसी की सरजमीं पर यूएन चीफ ने दिया बड़ा झटका! कश्मीरी राग अलाप रहे पत्रकार की हुई बोलती बंद

Guterres Pakistan Visit: UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की पाकिस्तान यात्रा के दौरान जम्मू-कश्मीर और UNSC की भूमिका का मुद्दा चर्चा में रहा.

Pakistan

Guterres Pakistan Visit: संयुक्त राष्ट्र (UN) में हर बार कश्मीर का रोना रोकर अंतरराष्ट्रीय हमदर्दी बटोरने की कोशिश करने वाले पाकिस्तान को उसी के घर में बहुत बड़ा राजनयिक थप्पड़ लगा है. पाकिस्तान दौरे पर गए संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कश्मीरी राग अलाप रहे एक पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल की हवा निकालते हुए सीधे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के वजूद और उसकी वैधता पर ही हमला बोल दिया.

यूएन चीफ के इस दोटूक बयान से न सिर्फ पाकिस्तानी पत्रकार का मुंह बंद हो गया, बल्कि इस्लामाबाद के हुक्मरानों के होश उड़ गए.

पत्रकार के सवाल को यूएन चीफ ने सरकाया

इस्लामाबाद में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब एक पाकिस्तानी पत्रकार ने पूरी अकड़ के साथ सवाल पूछा कि “जम्मू-कश्मीर पर UNSC के पुराने प्रस्ताव दशकों बीत जाने के बाद भी लागू क्यों नहीं हो पा रहे हैं?”

इस पर तनिक भी वक्त गंवाए बिना एंटोनियो गुटेरेस ने करारा जवाब देते हुए कहा कि सुरक्षा परिषद (UNSC) आज की आधुनिक दुनिया का प्रतिनिधित्व ही नहीं करती है. इसके पास वैधता और प्रभावशीलता की भारी कमी है. इसका मौजूदा ढांचा 1945 के दूसरे विश्व युद्ध के दौर का है, न कि 21वीं सदी की भू-राजनीति का.

 

भारत के स्टैंड को मिला अप्रत्यक्ष समर्थन

राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि गुटेरेस का यह बयान पाकिस्तान के लिए एक करारा अंतरराष्ट्रीय झटका है. पाकिस्तान हमेशा 1948-49 के आउटडेटेड प्रस्तावों की आड़ लेकर भारत को घेरने की नाकाम कोशिश करता है. यूएन प्रमुख ने साफ कर दिया कि जो संस्था खुद 80 साल पुरानी सोच पर अटकी हुई है और अपनी प्रासंगिकता खो चुकी है, उसके पुराने प्रस्तावों का आज की तारीख में कोई व्यावहारिक मोल नहीं रह गया है. यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से भारत के उस रुख पर मुहर लगाता है, जिसमें भारत लगातार UNSC में स्थायी सदस्यता और बड़े सुधारों की व मांग कर रहा है.

यूएन ने फिर ठुकराया तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप?

संयुक्त राष्ट्र सचिवालय ने एक बार फिर अपना आधिकारिक स्टैंड दोहराते हुए स्पष्ट किया है कि जम्मू-कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच का विशुद्ध द्विपक्षीय (Bilateral) मामला है. यूएन के अनुसार, इस मुद्दे का समाधान केवल शिमला समझौते और लाहौर घोषणापत्र के तहत दोनों देशों के बीच सीधी और शांतिपूर्ण बातचीत से ही संभव है.

भारत शुरू से कहता आया है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इसमें किसी तीसरे देश या संस्था की मध्यस्थता का सवाल ही पैदा नहीं होता.

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अपनी विश्वसनीयता खो चुका है संयुक्त राष्ट्र?

विश्व राजनीति के जानकारों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो पॉवर (Veto Power) रखने वाले 5 स्थायी सदस्य (P5) अपनी मनमर्जी चलाकर वैश्विक शांति कायम करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं. चाहे रूस-यूक्रेन युद्ध हो या मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी भयंकर जंग, UNSC एक मूकदर्शक बनी हुई है. ऐसे में पाकिस्तान जिस सुरक्षा परिषद के नाम पर रोना रोता है, उसकी अपनी साख पूरी तरह से शून्य हो चुकी है.

-भारत एक्सप्रेस

 



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