सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह हत्याकांड में मौत की सजा पाए दोषी बलवंत सिंह राजोआना की दया याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए केंद्र सरकार को और समय दे दिया है. अदालत अब इस मामले की अगली सुनवाई आगामी 28 अक्टूबर को करेगी. न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) के.एम. नटराज की मांग पर यह समय प्रदान किया.
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें
याचिकाकर्ता का पक्ष: सुनवाई के दौरान राजोआना की ओर से पेश वकील ने अदालत को अवगत कराया कि इस मामले में पिछले कई वर्षों से लगातार सुनवाई टलती आ रही है. याचिका में उनकी फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील करने की मांग की गई है, क्योंकि उनकी दया याचिका वर्ष 2012 से यानी पिछले लंबे समय से लंबित है.
पूर्व की टिप्पणियां और 29 साल की कैद
पिछली सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी थी कि यह मामला पूर्व सीजेआई एस.ए. बोबडे के कार्यकाल से चल रहा है और राजोआना पिछले 29 वर्षों से जेल में बंद हैं, इसलिए उन्हें अब रिहा किया जाना चाहिए. उस दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार से सख्त लहजे में कहा था कि या तो सरकार इस पर फैसला ले, अन्यथा अदालत खुद मामले के गुण-दोष (Merits) के आधार पर सुनवाई करेगी.
मानसिक पीड़ा और अनुच्छेद 21 का हवाला
याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक साल से अधिक समय पहले सक्षम प्राधिकारी को दया याचिका पर निर्णय लेने का निर्देश दिए जाने के बावजूद कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है. जीवन को लेकर अनुचित रूप से लंबे समय से बनी इस अनिश्चितता के कारण दोषी को अकल्पनीय मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ रहा है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है.
केंद्र सरकार का रुख
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एएसजी के.एम. नटराज ने पूर्व में अदालत को बताया था कि यह मामला बेहद संवेदनशील प्रकृति का है और इस संबंध में अन्य सुरक्षा व जांच एजेंसियों से और अधिक विस्तृत जानकारी जुटाने की आवश्यकता है.
क्या है पूरा मामाल
यह घटना 31 अगस्त 1995 की है, जब चंडीगढ़ के सिविल सचिवालय के गेट पर हुए एक भीषण बम विस्फोट में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह और 16 अन्य व्यक्ति मारे गए थे. इस मामले में विशेष अदालत ने जुलाई 2007 में बलवंत सिंह राजोआना को मौत की सजा सुनाई थी.
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बलवंत सिंह राजोआना का जन्म अगस्त 1967 में पंजाब के लुधियाना जिले के राजोआना कलां गांव में हुआ था. लुधियाना के जीएचजी खालसा कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद वह 1 अक्टूबर 1987 को पंजाब पुलिस में शामिल हुए थे. उनके पिता मलकीत सिंह को आतंकवादियों ने मार दिया था. इसी दौरान एक अन्य मामले में संदिग्ध उनके दोस्त हरपिंदर सिंह उर्फ गोल्डी को पंजाब पुलिस ने गोली मार दी थी, जिसके बाद 1993 में गोल्डी के माता-पिता (जसवंत सिंह और सुरजीत कौर) ने बलवंत सिंह को कानूनी रूप से गोद ले लिया था.
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