Bharat Express DD Free Dish

राष्ट्र सेवा के 25 साल पूरे होने पर पीएम मोदी को बधाई, स्वामी अवधेशानंद गिरि बोले- उनकी राह किसी तपस्या से कम नहीं

जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्र सेवा के प्रति ‘अविचल निष्ठा’ की सराहना की और उनके 25 वर्षों के कार्यकाल को राष्ट्र के प्रति समर्पण, दृढ़ संकल्प और प्रतिबद्धता का एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया.

जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने पर उनकी जमकर सराहना की है. उन्होंने पीएम मोदी की राष्ट्र सेवा के प्रति प्रतिबद्धता को दृढ़ संकल्प और समर्पण का उदाहरण बताया. अवधेशानंद गिरि ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री को इस अवसर पर बधाई दी.

उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में समाज और लोगों की भलाई के लिए किया गया काम किसी तपस्या से कम नहीं माना जाता. जब कोई व्यक्ति अपना समय, ऊर्जा और संकल्प देश के विकास में लगाता है, तो उसका असर सिर्फ सरकार या व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आम लोगों के जीवन में भी उम्मीद पैदा करता है.

अवधेशानंद गिरि ने याद दिलाया कि नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत की थी. उनके मुताबिक, इस सफर के 25 साल पूरे होना देश के प्रति सेवा और निरंतर मेहनत की एक लंबी यात्रा को दर्शाता है.

महिलाओं और युवाओं पर जोर

अवधेशानंद गिरि ने प्रधानमंत्री के विकास मॉडल में महिला और युवा सशक्तीकरण को भी अहम बताया. उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों, महिलाओं की अगुवाई वाले कारोबार और ‘लखपति दीदी’ जैसी पहलों ने बड़ी संख्या में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर दिया है.

उनके अनुसार, शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप और इनोवेशन पर बढ़ते जोर से युवाओं को अपनी प्रतिभा और नए विचारों को आगे बढ़ाने के मौके मिले हैं. उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर महिलाएं और आत्मविश्वास से भरे युवा किसी भी मजबूत और खुशहाल देश की बुनियाद होते हैं.

मेक इन इंडिया से डिजिटल इंडिया तक

भारत की आर्थिक प्रगति का जिक्र करते हुए अवधेशानंद गिरि ने देश के तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बने रहने को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा कि इसमें किसानों, मजदूरों, कारोबारियों और वैज्ञानिकों की मेहनत के साथ-साथ नीतिगत नेतृत्व की भी बड़ी भूमिका है.

उन्होंने ‘मेक इन इंडिया’ का उल्लेख करते हुए कहा कि मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने की कोशिशों से आत्मनिर्भरता की सोच को मजबूती मिली है. सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में रिसर्च, डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग पर ध्यान को उन्होंने भविष्य की तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखकर उठाया गया कदम बताया.

डिजिटल तकनीक के विस्तार को भी उन्होंने आम लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाने वाला बताया. यूपीआई, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और सरकारी सेवाओं की ऑनलाइन डिलीवरी ने लोगों के लिए कई सुविधाओं तक पहुंच आसान की है.

इंफ्रास्ट्रक्चर और रक्षा क्षेत्र का भी जिक्र

अवधेशानंद गिरि ने पीएम गति शक्ति के तहत हाईवे, रेलवे, एयरपोर्ट और ग्रामीण सड़कों के विस्तार का भी उल्लेख किया. उनका कहना था कि अलग-अलग क्षेत्रों को जोड़कर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की कोशिशों से आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के नए अवसर बढ़ सकते हैं.

रक्षा उत्पादन और स्वदेशी सैन्य उपकरणों के निर्माण में भारत की बढ़ती क्षमता को उन्होंने देश की रणनीतिक मजबूती से जोड़ा. उनके मुताबिक, जब सैनिकों का साहस, वैज्ञानिकों की तकनीकी क्षमता और उद्योग जगत की कार्यकुशलता एक स्पष्ट राष्ट्रीय नीति के साथ आगे बढ़ती है, तो देश की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता दोनों मजबूत होती हैं.

काशी, अयोध्या और महाकाल का भी किया उल्लेख

प्रधानमंत्री के कार्यकाल के सांस्कृतिक और धार्मिक पहलुओं पर भी अवधेशानंद गिरि ने विस्तार से बात की. उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक और केदारनाथ धाम में हुए विकास कार्यों को खास तौर पर महत्वपूर्ण बताया. उनका कहना है कि इन परियोजनाओं से तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं बेहतर हुई हैं और इन धार्मिक स्थलों की भव्यता और गरिमा भी बढ़ी है.

उन्होंने अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण और श्री रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का भी उल्लेख किया. अवधेशानंद गिरि के मुताबिक, ये घटनाएं देश और दुनिया में मौजूद लाखों श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक खुशी और आस्था का बड़ा अवसर बनीं.

उन्होंने काशी, अयोध्या और महाकाल की आध्यात्मिक परंपराओं को अलग-अलग संदेशों से जोड़ते हुए कहा कि इन तीर्थस्थलों से मिलने वाली प्रेरणा समाज में सेवा, अनुशासन, करुणा और आपसी मेलजोल की भावना को मजबूत करनी चाहिए.

‘विकसित भारत’ के लक्ष्य पर जोर

अवधेशानंद गिरि ने भारत की सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक विकास के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि अपनी परंपराओं और विरासत का सम्मान करते हुए आधुनिक विकास की दिशा में बढ़ना देश के आत्मविश्वास को मजबूत करता है.

उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान वैक्सीन के विकास और उत्पादन, बड़े पैमाने पर टीकाकरण और जरूरतमंदों तक खाद्यान्न पहुंचाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया. ‘वैक्सीन मैत्री’ के जरिए दूसरे देशों के साथ सहयोग को उन्होंने भारत की वैश्विक जिम्मेदारी और सहयोग की भावना से जोड़ा.

अंत में उन्होंने 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को देश के सामने भविष्य की एक बड़ी दिशा बताया. उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल सरकार ही नहीं, बल्कि हर नागरिक की भागीदारी जरूरी होगी.

यह भी पढ़ें: पीएम मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन को समर्पित सेवा सप्ताह शुरू, पटियाला में 400 जरूरतमंद परिवारों को मिला राशन

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read