मणिपुर में फिर भड़की हिंसा
Manipur Violence: मणिपुर के कई पहाड़ी जिलों में रविवार (11 अक्टूबर 2026) को भी माहौल पूरी तरह सामान्य नहीं हो सका. हाल के दिनों में दो समुदायों के बीच हुई हिंसक घटनाओं के बाद तनाव लगातार बना हुआ है. ताजा झड़पों में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 9 पहुंच गई है. हालात को देखते हुए प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं. राज्य सरकार ने शांति कायम करने के लिए लोगों से सहयोग करने की अपील की है.
मुख्यमंत्री ने लोगों से संयम बरतने को कहा
बिगड़ती स्थिति के बीच मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की हिंसा और निर्दोष लोगों की हत्या स्वीकार नहीं की जा सकती. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि हालात को जल्द नियंत्रित किया जाए और कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाए. उन्होंने सभी समुदायों से बातचीत, भाईचारे और धैर्य का रास्ता अपनाने को कहा.
तीन जिलों में हुईं सबसे ज्यादा हिंसक घटनाएं
हाल के दिनों में सामने आईं अधिकांश हिंसक घटनाएं कामजोंग, उखरुल और कांगपोकपी जिलों में हुईं. शुक्रवार और शनिवार के दौरान इन इलाकों में कई हमले और झड़पें सामने आईं, जिनमें कई लोगों की जान चली गई. स्थिति को गंभीर देखते हुए कामजोंग जिला प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश लागू कर दिए हैं. संवेदनशील गांवों और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत कर दी गई है.
सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने सोशल मीडिया पर भी अपनी प्रतिक्रिया साझा की. उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों की हत्या बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और इसकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए. उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने, हिंसा पर रोक लगाने, शांति बहाल करने और सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में सभी समुदायों को जिम्मेदारी दिखाते हुए शांति को प्राथमिकता देनी चाहिए.
कांगपोकपी और कामजोंग में बढ़ाई गई सुरक्षा
अधिकारियों के अनुसार हिंसा से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. खासतौर पर कांगपोकपी और कामजोंग जिलों में सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी कर दी गई है. कई संवेदनशील जगहों पर जवानों को तैनात किया गया है और लगातार गश्त की जा रही है ताकि किसी भी नई घटना को रोका जा सके.
पांच बच्चों की मां की हत्या के बाद भड़की हिंसा
हिंसा की शुरुआत शुक्रवार रात हुई एक बड़ी घटना के बाद और तेज हो गई. नगा बहुल कामजोंग जिले के कुकी बहुल चसाद गांव में पांच बच्चों की 22 वर्षीय मां की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी. इस घटना के बाद कुकी और नगा सशस्त्र समूहों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई, जो शनिवार सुबह तक जारी रही. इस झड़प में 42 साल के एक व्यक्ति की भी मौत हुई. इसके अलावा 10 मकानों को आग के हवाले कर दिया गया. आगे हालात न बिगड़ें, इसके लिए गांव में BNSS की धारा 162 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई.
कांगपोकपी में हमलों में तीन लोगों की मौत
अधिकारियों ने बताया कि चसाद की घटना के बाद शनिवार को कांगपोकपी जिले के तापन और मकुई गांवों में संदिग्ध उग्रवादियों ने हमला किया. इस दौरान नगा समुदाय के दो ग्राम रक्षक एम. दैमाई और आर. गंगमेई की मौत हो गई. इनके अलावा रिंगकांगमाई नामक एक अन्य व्यक्ति ने भी जान गंवा दी. दूसरी ओर, नगा समुदाय के संगठन वर्किंग कमेटी जेटीसी मणिपुर ने दावा किया कि 52 वर्षीय ग्रामीण अजिनबोउ आर. का सिर कलम कर दिया गया. संगठन ने उनके शव के कटे हुए सिर को अंतिम संस्कार के लिए वापस सौंपने की मांग की है.
निंगचौ गांव में घुसे हमलावर
अधिकारियों के मुताबिक शनिवार को कुछ संदिग्ध उग्रवादी भारत-म्यांमार सीमा के नजदीक स्थित निंगचौ गांव में भी पहुंचे. यह बस्ती तंगखुल नगा समुदाय की है. यहां हुई गोलीबारी में 35 साल के नगाचांसो निंगशेन और 48 साल के लेइशिशान लेइशादांग की मौत हो गई. घटना की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे. स्थानीय लोगों का कहना है कि हमला करने के बाद हमलावर सीमा पार कर म्यांमार की ओर भाग गए.
उखरुल में कार पर हमला
उखरुल जिले में भी शनिवार को हिंसा की एक और घटना सामने आई. चेपू याओलेन गांव के पास संदिग्ध उग्रवादियों ने एक कार पर फायरिंग कर दी. इस हमले में 40 वर्षीय संदीप राय की मौत हो गई. अधिकारियों ने बताया कि संदीप कार चला रहे थे और गोली लगने से वाहन के अंदर ही उनकी जान चली गई. वहीं कांगपोकपी जिले के मकुई अशांग और तापन क्षेत्रों में भी सशस्त्र समूहों के बीच भारी गोलीबारी की खबरें मिली हैं.
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फरवरी से अब तक 40 से ज्यादा लोगों की जान गई
मणिपुर में इस साल फरवरी से कुकी और नगा जनजातीय समुदायों के बीच लगातार तनाव बना हुआ है. इस दौरान हुई हिंसक घटनाओं में 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और बड़ी संख्या में घरों को आग के हवाले किया गया है. इससे पहले राज्य में इंफाल घाटी के मैतेई समुदाय और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले कुकी समुदाय के बीच भी बड़े पैमाने पर जातीय हिंसा हुई थी, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी. मौजूदा हालात को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां किसी भी नई घटना को रोकने के लिए लगातार सतर्क बनी हुई हैं.
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