Jamui News: पुरुषोत्तम कुमार/जमुई: बिहार के जमुई शहर में बीती रात एक दर्दनाक घटना के बाद भारी अफरा-तफरी मच गई. अतिथि पैलेस के पास स्थित शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. एस.एन. झा के क्लिनिक में इलाज करा रही 10 महीने की एक बच्ची की मौत हो गई, जिसके बाद गुस्साए परिजनों ने जमकर हंगामा किया.
बच्ची की मौत से आक्रोशित परिजनों ने न केवल क्लिनिक में तोड़फोड़ की, बल्कि जमुई-लखीसराय मुख्य मार्ग को भी जाम कर दिया, जिससे रात साढ़े दस बजे तक आवागमन पूरी तरह ठप रहा. एक तरफ जहां परिवारिक सदस्य अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही और मारपीट का आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अस्पताल प्रबंधन ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए भीड़ पर गंभीर मारपीट और तोड़फोड़ करने का काउंटर आरोप लगाया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.
जमुई में मासूम की मौत पर बवाल, क्लिनिक में तोड़फोड़ और सड़क जाम
जमुई शहर के अतिथि पैलेस के नजदीक स्थित शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. एस.एन. झा के क्लिनिक में बीती रात एक 10 माह की बच्ची की मौत के बाद माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया. मौत से गुस्साए परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल में तोड़फोड़ की और न्याय की मांग करते हुए जमुई-लखीसराय मुख्य मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया. देर रात लगभग साढ़े दस बजे तक सड़क पर यातायात बाधित रहा. मृतका की पहचान लखीसराय जिले के रहने वाले कार्तिक पांडेय की 10 माह की बेटी त्रिशा कुमारी के रूप में हुई है, जो अपनी नानी के घर जमुई के नारडीह आई थी.
परिजनों के गंभीर आरोप: इलाज में लापरवाही और अभद्रता
बच्ची के पिता कार्तिक पांडेय का कहना है कि बुधवार सुबह करीब 6 बजे बुखार की शिकायत पर उन्होंने अपनी बेटी को इस क्लिनिक में भर्ती कराया था. परिजनों का आरोप है कि शाम को दवा पिलाने के बाद बच्ची को लगातार उल्टियां होने लगीं और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई. जब वे लोग सवाल करने पहुंचे तो अस्पताल कर्मियों ने शुरुआत में बातचीत का भरोसा दिया, लेकिन बाद में कथित तौर पर उनके साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई. परिजनों का यह भी आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में महिलाओं और पुरुषों के साथ अभद्रता की गई.
अस्पताल प्रबंधन का पक्ष: आरोपों को नकारा और मारपीट का दावा
दूसरी ओर, अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. क्लिनिक के कंपाउंडर संजीव कुमार के मुताबिक, बच्ची को सुबह बुखार की शिकायत पर लाया गया था और प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत में सुधार होने पर परिजन उसे अपने घर ले गए थे. प्रबंधन का दावा है कि बच्ची की मौत घर पर हुई, जिसके बाद परिजन शव को लेकर वापस अस्पताल पहुंचे और हंगामा शुरू कर दिया. कंपाउंडर ने आरोप लगाया कि भीड़ ने आईसीयू और सामान्य वार्ड के शीशे तोड़ दिए तथा अस्पताल कर्मियों सचिन कुमार और नीतीश कुमार के साथ मारपीट की, जिसमें सचिन गंभीर रूप से घायल हो गए. घटना के वक्त क्लिनिक में करीब 50 बच्चे भर्ती थे.
पुलिस ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही टाउन थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची. पुलिस ने दोनों पक्षों की बात सुनी और आक्रोशित लोगों को समझा-बुझाकर किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच-पड़ताल कर रही है.
-भारत एक्सप्रेस
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