बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) से पहले जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपनी अंतरराष्ट्रीय विस्तार योजनाओं का अब तक का सबसे बड़ा और स्पष्ट रोडमैप पेश किया है. मुंबई में देशभर के ब्रोकर्स के साथ आयोजित एक संवाद सत्र में जियो प्लेटफॉर्म्स के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने बताया कि कंपनी लगभग 12 रणनीतिक साझेदारियों के जरिए वैश्विक स्तर पर 1.5 अरब (150 करोड़) अतिरिक्त उपभोक्ताओं तक अपनी पहुंच बना सकती है. कंपनी अमेरिका और जर्मनी जैसे तकनीकी रूप से विकसित देशों के अलावा पूर्वी एशिया, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के बाजारों में भी तेजी से संभावनाओं की तलाश कर रही है.
सीधे टेलीकॉम ऑपरेटर बनने के बजाय लोकल पार्टनर्स को देगी ‘टेक स्टैक’
विदेशी बाजारों में विस्तार की रणनीति को स्पष्ट करते हुए आकाश अंबानी ने बताया कि जियो का इरादा इन देशों में खुद सीधे टेलीकॉम ऑपरेटर बनने का नहीं है. बल्कि कंपनी वहां के स्थानीय टेलीकॉम ऑपरेटरों के साथ रणनीतिक गठजोड़ करेगी और उन्हें अपना स्वदेशी व इन-हाउस विकसित ‘टेक्नोलॉजी स्टैक’ (Technology Stack) मुहैया कराएगी. विशेष रूप से जियो का इंटीग्रेटेड होम ब्रॉडबैंड स्टैक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े कारोबारी अवसर के रूप में देखा जा रहा है.
विकसित देशों में फाइबर रोलआउट की स्थिति दे रही बड़े मौके
आकाश अंबानी ने रेखांकित किया कि जियो के लिए संभावनाएं केवल कमजोर डिजिटल ढांचे वाले विकासशील देशों तक सीमित नहीं हैं. अमेरिका और जर्मनी जैसे संपन्न बाजारों में भी फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क बिछाने की मौजूदा गति और आवश्यकताएं जियो की स्केलेबल तकनीक के लिए बड़े अवसर खोल रही हैं. उन्होंने कहा कि तकनीक का निर्माण करना और उसे करोड़ों उपभोक्ताओं के विशाल पैमाने पर सफलतापूर्वक लागू करना दो अलग-अलग क्षमताएं हैं, और जियो ने भारतीय बाजार में इन दोनों ही मोर्चों पर अपनी दक्षता को पूरी तरह साबित किया है.
टेक्नोलॉजी आयातक से निर्यातक बनने की राह पर भारत
यह पहल केवल एक कॉर्पोरेट विस्तार भर नहीं है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की तकनीकी साख के लिए भी एक ऐतिहासिक बदलाव है. दशकों तक भारत केवल बहुराष्ट्रीय तकनीकी कंपनियों के लिए एक बड़ा उपभोक्ता (कंज्यूमर) बाजार रहा है. अब जियो भारत में विकसित और 40 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं के बीच परखी जा चुकी स्वदेशी तकनीक को दुनिया भर में निर्यात करने की दिशा में अग्रसर है. होम ब्रॉडबैंड के साथ-साथ 5G तकनीक भी इस वैश्विक विस्तार का प्रमुख स्तंभ बनेगी, जिससे कंपनी के लिए अंतरराष्ट्रीय राजस्व का एक नया और मजबूत स्रोत विकसित होगा.
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