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UP Teacher Promotion News: उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में कार्यरत करीब 70,000 शिक्षकों के लिए एक बड़ी और खुशखबरी सामने आई है. पिछले लगभग 10 सालों से पदोन्नति (Promotion) की बाट जोह रहे इन शिक्षकों की इंतजार की घड़ियां 7 नवंबर तक खत्म हो जाएंगी. बेसिक शिक्षा परिषद ने प्रमोशन प्रक्रिया को तय सीमा में पूरा करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं. इसके साथ ही माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के चयन वेतनमान, प्रोन्नत वेतनमान और एरियर भुगतान को लेकर भी सरकार ने राहत भरा बड़ा फैसला लिया है.
उत्तर प्रदेश सरकार ने परिषदीय एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को दीवाली से पहले बड़ा तोहफा दिया है. 10 साल से अटके 70 हजार शिक्षकों के प्रमोशन की प्रक्रिया 7 नवंबर तक पूरी होगी, जिसके लिए 23 अक्टूबर तक सीनियरिटी लिस्ट मांगी गई है. प्रमोशन के लिए टीईटी और न्यूनतम अनुभव अनिवार्य रहेगा. इसके अलावा माध्यमिक शिक्षकों के वेतनमान व एरियर संबंधी समस्याओं का समाधान करते हुए अब साल में दो बार पे-स्केल लाभ देने की व्यवस्था लागू की गई है.
23 अक्टूबर तक आएगी फाइनल सीनियरिटी लिस्ट
प्रमोशन प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए बेसिक शिक्षा परिषद ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को निर्देश दिया है कि वे 23 अक्टूबर तक शिक्षकों की अंतिम सीनियरिटी लिस्ट परिषद कार्यालय को प्रस्तुत करें. प्रक्रिया की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर एक विशेष समिति बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता संबंधित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) के प्राचार्य करेंगे.
प्रमोशन के लिए TET और अनुभव की अनिवार्यता
बेसिक शिक्षा परिषद ने प्रमोशन के लिए तय मानकों को स्पष्ट कर दिया है. इसके तहत शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य होगा. इसके अतिरिक्त अनुभव के मानक इस प्रकार हैं:
- जूनियर बेसिक स्कूल के हेडमास्टर/सहायक अध्यापक: पदोन्नति के लिए न्यूनतम 5 वर्ष का निरंतर शिक्षण अनुभव आवश्यक है.
- सीनियर बेसिक स्कूल के हेडमास्टर: इस पद पर पदोन्नति पाने के लिए न्यूनतम 3 वर्ष का निरंतर शिक्षण अनुभव होना जरूरी है.
माध्यमिक शिक्षकों को साल में दो बार मिलेगा पे-स्केल लाभ
राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत करीब 6,000 शिक्षकों को भी बड़ा फायदा मिलने जा रहा है. अब सेलेक्शन पे-स्केल और प्रोमोटेड पे-स्केल की प्रक्रिया साल में दो बार—जनवरी और जुलाई में आयोजित की जाएगी. इससे पहले कई जिलों में यह प्रक्रिया साल में केवल एक बार आयोजित होती थी, जिसके कारण शिक्षकों का एरियर व वेतनमान का भुगतान लंबे समय तक अटका रहता था.
-भारत एक्सप्रेस
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