प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मां दुर्गा की स्तुति में संस्कृत का एक श्लोक साझा किया. इस श्लोक के जरिए उन्होंने देवी की महिमा और भक्तों की रक्षा करने वाली उनकी शक्ति का संदेश दिया. पोस्ट में मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए बताया गया कि जो लोग सच्चे मन से देवी का स्मरण करते हैं, उनकी उन्नति होती है और मां उन्हें संकटों से बचाती हैं.
प्रधानमंत्री की ओर से साझा किया गया श्लोक है:
“यैस्तु भक्त्या स्मृता नूनं तेषां वृद्धिः प्रजायते. ये त्वां स्मरन्ति देवेशि रक्षसे तान्न संशयः॥”
इसका अर्थ है कि जो भक्त पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मां दुर्गा को याद करते हैं, उनके जीवन में तरक्की और समृद्धि आती है. वहीं, जो लोग सच्चे मन से देवी का ध्यान करते हैं, मां उनकी रक्षा करती हैं. उनकी कृपा से भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है.
यैस्तु भक्त्या स्मृता नूनं तेषां वृद्धिः प्रजायते।
ये त्वां स्मरन्ति देवेशि रक्षसे तान्न संशयः।। https://t.co/d5la5pSefG
— Narendra Modi (@narendramodi) October 19, 2026
देवी कवच का आठवां श्लोक है यह मंत्र
प्रधानमंत्री मोदी ने जिस संस्कृत श्लोक को साझा किया, वह श्रीदेवीकवचम् यानी दुर्गा कवच का आठवां श्लोक है. दुर्गा कवच में मां दुर्गा की महिमा, उनके अलग-अलग स्वरूपों और भक्तों की रक्षा करने वाली शक्ति का वर्णन मिलता है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी का स्मरण मन में विश्वास और साहस पैदा करता है. इस श्लोक से पहले के प्रसंग में भी संकट, युद्ध और भय से मुक्ति का उल्लेख मिलता है. ऐसे में इस मंत्र का संदेश केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि मुश्किल समय में आस्था बनाए रखने और हिम्मत से आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देता है.
महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा
नवरात्र के अंतिम दिन सोमवार को मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जा रही है. नवरात्र के नौवें दिन को महानवमी कहा जाता है. इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है और घरों में भी श्रद्धालु मां की आराधना करते हैं.
मां सिद्धिदात्री के नाम का अर्थ भी उनके स्वरूप की विशेषता बताता है. ‘सिद्धि’ का मतलब पूर्णता या विशेष सामर्थ्य है, जबकि ‘दात्री’ का अर्थ देने वाली होता है. धार्मिक मान्यता है कि मां अपने भक्तों को आठ प्रकार की सिद्धियां प्रदान करती हैं. इनमें अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशत्व और वशित्व शामिल हैं.
मां सिद्धिदात्री को सिंह पर सवार दिखाया जाता है. उनकी चार भुजाएं हैं. उनके दाहिने हाथों में गदा और चक्र, जबकि बाएं हाथों में कमल का फूल और शंख सुशोभित रहते हैं. देवी का यह रूप शक्ति, ज्ञान और सिद्धि का प्रतीक माना जाता है.
मां सिद्धिदात्री की कृपा से अर्धनारीश्वर बने भगवान शिव
पौराणिक कथाओं में मां सिद्धिदात्री का संबंध भगवान शिव से भी बताया गया है. मान्यता है कि मां की कृपा से भगवान शिव को अनेक सिद्धियां प्राप्त हुई थीं. इसी से जुड़ी धार्मिक कथा के अनुसार, देवी की शक्ति से शिव के आधे शरीर में शक्ति का स्वरूप प्रकट हुआ और वे अर्धनारीश्वर कहलाए.
अर्धनारीश्वर स्वरूप में भगवान शिव के आधे भाग में पुरुष और आधे में स्त्री स्वरूप दिखाई देता है. इसे शिव और शक्ति की एकता के साथ-साथ सृष्टि में स्त्री और पुरुष ऊर्जा के संतुलन का प्रतीक माना जाता है.
महानवमी पर भोग और कन्या पूजन का विशेष महत्व
महानवमी के दिन मां सिद्धिदात्री को खीर, हलवा, पूरी, काले चने और मौसमी फलों का भोग लगाने की परंपरा है. मां को लाल और नीले रंग के फूल भी अर्पित किए जाते हैं. इनमें कमल के फूल का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन कन्या पूजन भी नवरात्र की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है. श्रद्धालु छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं और उन्हें भोजन कराते हैं. इसके बाद दक्षिणा और उपहार देकर उनका आशीर्वाद लेते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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