रावण के साथ जलेगा 15 फीट का 'कॉकरोच'
रिपोर्ट- नीरज त्यागी/ मुजफ्फरनगर
Dussehra 2026: उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर के नुमाइश ग्राउंड में दशहरा महोत्सव की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं. हर साल की तरह इस बार भी बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक रावण, कुंभकरण और मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन किया जाएगा. हालांकि इस बार आयोजन में एक नया और अलग आकर्षण जोड़ा गया है, जिसने लोगों के बीच चर्चा पैदा कर दी है.
इस बार बने हैं चार पुतले
आयोजकों ने इस वर्ष पारंपरिक तीन पुतलों के अलावा एक चौथा पुतला भी तैयार कराया है. इस विशेष पुतले की ऊंचाई 15 फीट रखी गई है और इसे ‘कॉकरोच’ नाम दिया गया है. आयोजन समिति का कहना है कि यह पुतला उन ताकतों का प्रतीक होगा जो देश में अस्थिरता फैलाने का काम करती हैं. इसी वजह से इस साल लोगों की उत्सुकता केवल रावण दहन तक सीमित नहीं है, बल्कि कॉकरोच नाम के इस नए पुतले को लेकर भी काफी चर्चा हो रही है.
कितने ऊंचे होंगे तीनों प्रमुख पुतले?
दशहरा आयोजन के लिए बनाए गए पुतलों में रावण सबसे ऊंचा होगा, जिसकी लंबाई 60 फीट रखी गई है. इसके अलावा कुंभकरण का पुतला 55 फीट और मेघनाद का पुतला 50 फीट ऊंचा तैयार किया गया है. आयोजकों ने इन पुतलों को पहले के मुकाबले और भी आकर्षक बनाने की कोशिश की है ताकि दहन के समय दर्शकों को भव्य दृश्य देखने को मिल सके.
आग उगलेंगे पुतले, रिमोट से होगा दहन
इस बार तकनीक का भी खास इस्तेमाल किया गया है. पुतलों के मुंह और आंखों से आग निकलने की व्यवस्था की गई है. इतना ही नहीं, जब पुतलों का दहन होगा तो उनके ऊपर से अनार और आतिशबाजी के विशेष प्रभाव भी दिखाई देंगे. पूरे कार्यक्रम को और सुरक्षित तथा आकर्षक बनाने के लिए पुतलों को रिमोट कंट्रोल के जरिए जलाया जाएगा.
वर्षों से पुतले बना रही है शफीक की टीम
इन विशाल पुतलों को तैयार करने की जिम्मेदारी शफीक और उनकी पांच सदस्यीय टीम ने संभाली है. यह टीम लंबे समय से दशहरा आयोजनों के लिए पुतले तैयार करती आ रही है. इस बार भी टीम ने सभी पुतलों को अंतिम रूप दे दिया है और आयोजन स्थल पर तैयारियां पूरी कर ली हैं.
‘कॉकरोच’ नाम रखने के पीछे क्या है वजह?
श्रीराम सेवा दल के महासचिव अशोक कुमार ने बताया कि हर साल मुख्य पुतलों के अलावा एक अतिरिक्त प्रतीकात्मक पुतला बनाया जाता है. अलग-अलग वर्षों में उसका नाम भ्रष्टाचार, आतंकवाद जैसे सामाजिक मुद्दों के आधार पर रखा जाता रहा है. उन्होंने बताया कि इस बार इस विशेष पुतले को ‘कॉकरोच’ नाम दिया गया है. उनका कहना है कि जो भी व्यक्ति, संगठन या ताकत देश में अस्थिरता पैदा करने का प्रयास करेगी, उसे प्रतीकात्मक रूप से इसी नाम से जोड़ा जाएगा.
समाज को देना चाहते हैं खास संदेश
आयोजकों के मुताबिक इस 15 फीट ऊंचे पुतले का उद्देश्य केवल प्रदर्शन नहीं है, बल्कि समाज को एक संदेश देना भी है. उनका कहना है कि देश और समाज में स्थिरता बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है. इसी सोच के साथ इस बार रावण, कुंभकरण और मेघनाद के साथ-साथ ‘कॉकरोच’ का पुतला भी दहन किया जाएगा, ताकि लोगों तक यह संदेश पहुंचे कि समाज और देश को कमजोर करने वाली प्रवृत्तियों का मिलकर विरोध किया जाना चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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