Aaj Ka Panchang 25 October 2026: रविवार, 25 अक्टूबर 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है. आज अश्विन पूर्णिमा व्रत रखा जा रहा है. इसके साथ ही रविवार व्रत, सूर्य पूजा, कोजागरा पूजा, शरद पूर्णिमा और रास पूर्णिमा का भी शुभ अवसर है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन शाम के समय माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा का विशेष महत्व होता है. पंचांग के मुताबिक आज आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि दिन में 11:55 बजे तक रहेगी, जिसके बाद पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हो जाएगी.
नक्षत्र, योग और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति
आज रेवती नक्षत्र शाम 7:22 बजे तक प्रभावी रहेगा, इसके बाद अश्विनी नक्षत्र शुरू होगा. हर्षण योग शाम 5:22 बजे तक रहेगा, फिर वज्र योग का आरंभ होगा. करण की बात करें तो वणिज करण सुबह से 11:55 बजे तक रहेगा, उसके बाद विष्टि करण रात 10:52 बजे तक रहेगा और फिर बव करण प्रारंभ होगा. चंद्रमा आज शाम 7:22 बजे तक मीन राशि में रहेंगे, इसके बाद उनका गोचर मेष राशि में हो जाएगा. साथ ही आज पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा.
रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ प्रभाव
आज का दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग दोनों का निर्माण हो रहा है. रवि योग सूर्योदय के साथ सुबह 6:28 बजे से शुरू होकर शाम 7:22 बजे तक रहेगा. इसके बाद शाम 7:22 बजे से अगले दिन 26 अक्टूबर की सुबह 6:29 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा. इन दोनों योगों को धार्मिक और मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है.
पंचक और भद्रा के कारण बरतें सावधानी
आज सुबह 6:28 बजे से लेकर शाम 7:22 बजे तक पंचक रहेगा. वहीं भद्रा का प्रभाव दिन में 11:55 बजे से शुरू होकर रात 10:52 बजे तक रहेगा. खास बात यह है कि भद्रा का वास शाम 7:22 बजे तक मृत्यु लोक में रहेगा, इसलिए इस दौरान कोई नया या शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है. इसके बाद भद्रा स्वर्ग लोक में चली जाएगी.
अश्विन पूर्णिमा व्रत रखने वाले क्या करें?
जो श्रद्धालु आज अश्विन पूर्णिमा का व्रत कर रहे हैं, उन्हें सुबह के समय भगवान सत्यनारायण की पूजा-अर्चना कर कथा का श्रवण करना चाहिए. पूरे दिन फलाहार का पालन करने के बाद शाम को सूर्यास्त पश्चात कोजागरा पूजा करनी चाहिए. इस पूजा में माता लक्ष्मी और इंद्रदेव की आराधना की जाती है. पूजा में अक्षत, फूल, सिंदूर, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं.
चंद्रमा को अर्घ्य और खीर रखने की परंपरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रात 8 बजे के बाद चंद्रदेव को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है. यही वह दिन है जब भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास किया था, इसलिए इसे रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. रात 9 बजे के बाद खीर बनाकर उसे चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा है. खीर को पूरी रात खुले आसमान के नीचे रखा जाता है. मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों में अमृत तत्व मौजूद रहता है और उसकी ऊर्जा खीर में समाहित हो जाती है. अगले दिन सुबह इस खीर का सेवन करने से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है.
कोजागरा की रात क्यों मानी जाती है खास?
कथाओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात निशिता मुहूर्त में इंद्रदेव और माता पार्वती पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं और पूछते हैं कि कौन जाग रहा है. माना जाता है कि जो लोग इस रात लक्ष्मी पूजा कर दीपक जलाकर जागरण करते हैं, उनके घर सुख-समृद्धि और धन की कृपा बनी रहती है.
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा का समय
आज सूर्योदय सुबह 6:28 बजे होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 5:42 बजे होगा. चंद्रोदय का समय शाम 5:00 बजे निर्धारित है. वहीं चंद्रास्त 26 अक्टूबर की सुबह 6:23 बजे होगा.
आज के प्रमुख शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:46 बजे से 5:37 बजे तक रहेगा. अभिजीत मुहूर्त 11:42 बजे से 12:27 बजे तक होगा. विजय मुहूर्त दोपहर 1:57 बजे से 2:42 बजे तक रहेगा. अमृत काल शाम 5:05 बजे से 6:36 बजे तक रहेगा. निशिता मुहूर्त रात 11:40 बजे से 12:31 बजे तक रहेगा.
दिन के शुभ चौघड़िया में चर 7:52 बजे से 9:16 बजे तक, लाभ 9:16 बजे से 10:41 बजे तक, अमृत 10:41 बजे से 12:05 बजे तक और शुभ 1:29 बजे से 2:53 बजे तक रहेगा.
वहीं रात्रि के शुभ चौघड़िया में शुभ 5:42 बजे से 7:18 बजे तक, अमृत 7:18 बजे से 8:54 बजे तक, चर 8:54 बजे से 10:29 बजे तक, लाभ 26 अक्टूबर को 1:41 बजे से 3:17 बजे तक और शुभ 4:53 बजे से 6:29 बजे तक रहेगा.
आज के अशुभ समय पर भी रखें नजर
आज यमगण्ड दोपहर 12:05 बजे से 1:29 बजे तक रहेगा. गुलिक काल 2:53 बजे से 4:18 बजे तक प्रभावी रहेगा. दुर्मुहूर्त 4:12 बजे से 4:57 बजे तक रहेगा. राहुकाल शाम 4:18 बजे से 5:42 बजे तक रहेगा. पंचक सुबह 6:28 बजे से शाम 7:22 बजे तक रहेगा और भद्रा का प्रभाव 11:55 बजे से रात 10:52 बजे तक बना रहेगा.
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शिववास की स्थिति
पंचांग के अनुसार आज शिववास सुबह से 11:55 बजे तक भोजन में रहेगा. इसके बाद शिववास श्मशान में माना जाएगा. धार्मिक मान्यताओं में शिववास का भी विशेष महत्व बताया गया है और कई लोग पूजा-पाठ एवं अनुष्ठान के समय इसे ध्यान में रखते हैं.
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