UP चुनाव में कितने पानी में बीजेपी
UP Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है. त्योहारों का दौर खत्म होते ही राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है. सत्ताधारी बीजेपी अपनी चुनावी तैयारियों को धार देने में जुट जाएगी. पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई बड़े नेताओं के प्रदेश दौरे शुरू हो सकते हैं. दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच संभावित गठबंधन को लेकर बातचीत जारी है. दोनों दल सीटों के बंटवारे पर रणनीति बनाने में लगे हुए हैं और इस मुद्दे पर अंदरखाने लगातार मंथन चल रहा है.
सहयोगी दल भी दिखा रहे हैं सख्त रुख
बीजेपी के साथ सरकार में शामिल दल भी अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने में पीछे नहीं हैं. निषाद पार्टी और ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) आरक्षण के मुद्दे को लेकर दबाव की राजनीति करती नजर आ रही हैं. दोनों दल अपने-अपने समुदायों के लिए आरक्षण की मांग उठा रहे हैं. वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय लोकदल की भूमिका और उसकी सीटों को लेकर अपेक्षाएं भी चुनावी समीकरणों का अहम हिस्सा बन सकती हैं.
दस साल की सत्ता के बाद बढ़ी जिम्मेदारी
योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी लगातार करीब दस वर्षों से उत्तर प्रदेश की सत्ता में बनी हुई है. ऐसे में पार्टी को स्वाभाविक रूप से सत्ता विरोधी माहौल यानी एंटी-इनकम्बैंसी का भी सामना करना पड़ सकता है. इसके साथ ही सामाजिक और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी उसके सामने है. पार्टी और संघ से जुड़े आंतरिक सर्वे में कुछ विधायकों के प्रति असंतोष की बातें सामने आई हैं. यही कारण है कि बीजेपी संगठन चुनाव से पहले अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम कर रहा है.
कार्यकर्ताओं की शिकायतें बनी चिंता
बीजेपी संगठन के वरिष्ठ नेता बीएल संतोष और प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े जब कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से मिले तो कई लोगों ने अपनी नाराजगी खुलकर रखी. कार्यकर्ताओं की ओर से पुलिस थानों और प्रशासनिक तंत्र में पर्याप्त सुनवाई नहीं होने की शिकायतें सामने आईं. इसके अलावा कुछ विधायकों के कामकाज को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया गया. पार्टी के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है और चुनाव से पहले इसे दूर करना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है.
नाराजगी दूर करने की कोशिश में बीजेपी
इन चुनौतियों से निपटने के लिए बीजेपी लगातार अपने कार्यकर्ताओं से संवाद कर रही है. दिल्ली से आने वाले वरिष्ठ नेता अलग-अलग जिलों में जाकर फीडबैक ले रहे हैं और लोगों को अपनी बात रखने का अवसर दे रहे हैं. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि पार्टी लगभग 40 प्रतिशत मौजूदा विधायकों के टिकट बदल सकती है. माना जा रहा है कि ऐसे कदमों के जरिए बीजेपी जनता और संगठन दोनों के बीच मौजूद नाराजगी को कम करने की कोशिश करेगी.
योगी की लोकप्रियता और कानून व्यवस्था सबसे बड़ी ताकत
बीजेपी की चुनौतियों के बीच उसकी सबसे बड़ी ताकत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता मानी जा रही है. राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार की सख्त छवि बनी है. उत्तर प्रदेश में पहले भी कल्याण सिंह और मायावती जैसे नेताओं को मजबूत प्रशासन और कानून व्यवस्था के लिए याद किया जाता रहा है. योगी आदित्यनाथ ने भी इसी छवि के बल पर व्यापक जनसमर्थन हासिल किया है. हालांकि यूजीसी से जुड़े मुद्दों के कारण कुछ सवर्ण वर्गों में नाराजगी की चर्चा है. बीजेपी नेताओं का मानना है कि क्योंकि यह मामला केंद्र सरकार से जुड़ा है, इसलिए मतदान तक माहौल बदल सकता है. इसी दिशा में पार्टी ने राज्यसभा के लिए दो ब्राह्मण और एक राजपूत नेता को भेजकर संदेश देने की कोशिश की है. साथ ही ईडब्ल्यूएस कोटे की आय सीमा में बदलाव जैसे विकल्पों पर भी चर्चा बताई जा रही है. कुल मिलाकर बीजेपी के सामने चुनौतियां जरूर हैं लेकिन सीएम योगी का चेहरा और सामाजिक समीकरण अभी भी उसके लिए मजबूत राजनीतिक पूंजी बने हुए हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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