सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की ओर से दायर उस याचिका का निपटारा कर दिया है, जिसमें भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड को वैकल्पिक निवेश फंड, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों और भारत में उनके मध्यस्थों के वास्तविक लाभार्थी मालिकों और निवेश पोर्टफोलियो का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की गई थी.
जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस डीके उपाध्याय की पीठ ने महुआ मोइत्रा से सवाल किया गया एक सांसद को जनहित याचिका दाखिल करने की जरूरत क्यों पड़ी? मामले की सुनवाई के दौरान महुआ मोइत्रा की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि वह देश की नागरिक है और सांसद होने के नाते आम नागरिकों के मुकाबले इस मुद्दे की ज्यादा जानकारी रखती है.
उन्होंने कहा कि महुआ मोइत्रा पहले वित्तीय कंपनियों में काम कर चुकी है और उन्हें इस क्षेत्र का अनुभव है. प्रशांत भूषण ने कहा कि अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारतीय शेयर बाजार में करीब 100 लाख करोड़ रुपए का निवेश रखते हैं. ऐसे में इन फंडों के असली मालिकों की पहचान और जानकारी सार्वजनिक होना जरूरी है.
भूषण ने कहा कि वर्ष 2018 से पहले वास्तविक लाभार्थी मालिकों की जानकारी सार्वजनिक करने की व्यवस्था थी, लेकिन बाद में इसे समाप्त कर दिया गया. इसके बाद संबंधित संस्थाओं को मुख्य रूप से धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत निर्धारित आवश्यकताओं का पालन करना पड़ता है.
सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा की याचिका पर उठाए सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा को लेकर सवाल किया गया महुआ मोइत्रा सांसद है और अगर उन्हें इस मुद्दे पर चर्चा करानी है, तो वह संसद में यह मामला उठा सकती है. कोर्ट ने कहा कि संसद में चर्चा के लिए उपलब्ध रास्ते के बजाए अनुच्छेद 32 के तहत जनहित याचिका दाखिल करने के पीछे क्या वजह है. यह समझना जरूरी है.
कोर्ट ने यह भी कहा कि सांसदों और आम नागरिकों की न्याय तक पहुंच एक जैसी नहीं है. आम नागरिक के मुकाबले सांसद के पास अपनी बात रखने के अधिक मौके होते हैं. भूषण ने कहा कि संसद में इस तरह के मुद्दों पर चर्चा कराना आसान नहीं है. उन्होंने दलील दी कि संसद में चर्चा करना सुप्रीम कोर्ट के उस अधिकार का विकल्प नही हो सकता, जिसके तहत वह नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए निर्देश दे सकता है.
उन्होंने कहा कि इस याचिका का मकसद छोटे और आम निवेशकों के हितों की रक्षा करना है. वही केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रशांत भूषण की दलीलों को राजनीतिक बयान बताया है. उन्होंने कहा कि इस मामले से जुड़े मुद्दों पर पहले ही कोर्ट की ओर से बनाई गई समिति विचार कर चुकी है. कोर्ट ने कहा कि जिन निवेशकों के हितों की बात की जा रही है, वे खुद अदालत के सामने नहीं आए हैं.
इसपर प्रशांत भूषण ने कहा कि महुआ मोइत्रा खुद निवेशक भी है. इसके जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अगर याचिका निजी निवेश हितों से जुड़ी है, तो इसे जनहित याचिका नही कहा जा सकता.
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-भारत एक्सप्रेस
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