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Karwa Chauth 2026: कहीं दिखा चांद तो कहीं बने रहे बादल, जानिए चंद्र दर्शन न होने पर कैसे पूरा करें व्रत

Karwa Chauth 2026 पर कई शहरों में चंद्र दर्शन हुए, जबकि कुछ जगहों पर बादलों ने बाधा डाली. जानिए चांद न दिखने पर व्रत कैसे खोलें, पूजा का शुभ मुहूर्त, विभिन्न शहरों में चंद्रोदय का समय और अर्घ्य के दौरान बोले जाने वाले मंत्र.

Chauth

चांद न दिखे तो कैसे खोलें व्रत?

Karwa Chauth 2026: करवा चौथ का पर्व पूरे देश में उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया. कई राज्यों और शहरों में सुहागिन महिलाओं को चंद्रमा के दर्शन हो गए, जिसके बाद उन्होंने अपने व्रत का पारण किया. असम की राजधानी गुवाहाटी सहित कई इलाकों में आसमान साफ रहने से चांद आसानी से दिखाई दिया.

हालांकि, उत्तर भारत के कुछ हिस्सों, खासकर दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में मौसम ने परेशानी बढ़ा दी. बादल और खराब मौसम के कारण कई जगह महिलाओं को चंद्र दर्शन नहीं हो सके. इसके बावजूद निर्धारित चंद्रोदय समय पूरा होने के बाद महिलाओं ने परंपराओं के अनुसार अपना व्रत संपन्न किया.

अलग-अलग शहरों में अलग रहा चंद्रोदय का समय

करवा चौथ पर चंद्रमा निकलने का समय हर शहर में अलग रहा. दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में चांद निकलने का समय रात 8:17 बजे निर्धारित था. वहीं गुरुग्राम में यह समय 8:18 बजे रहा. लखनऊ में चंद्र दर्शन का समय रात 8:06 बजे, जयपुर में 8:28 बजे और मुंबई में रात 9:00 बजे निर्धारित किया गया. कोलकाता में शाम 7:47 बजे जबकि बेंगलुरु में रात 8:55 बजे चंद्रोदय का समय रहा.

बादलों की वजह से नहीं दिखे चंद्रदेव

कई इलाकों में महिलाओं को लंबे समय तक चांद का इंतजार करना पड़ा, लेकिन मौसम की खराब स्थिति के चलते आसमान पूरी तरह साफ नहीं हो पाया. ऐसे में अनेक महिलाओं के सामने यह सवाल खड़ा हो गया कि यदि चांद दिखाई न दे तो व्रत कैसे खोला जाए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसी परिस्थितियों में भी व्रत को विधि-विधान के साथ पूरा किया जा सकता है और इसके लिए विशेष उपाय बताए गए हैं.

चंद्र दर्शन न होने पर क्या करें?

धार्मिक परंपराओं में माना जाता है कि भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रदेव विराजमान रहते हैं. इसलिए यदि आसमान में चंद्रमा दिखाई न दे तो महिलाएं घर के मंदिर में स्थापित भगवान शिव की प्रतिमा या तस्वीर के दर्शन कर सकती हैं. कई लोग इस स्थिति में शिवजी के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा का स्मरण कर पूजा पूर्ण करते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से व्रत की धार्मिक प्रक्रिया बाधित नहीं होती.

दिनभर निर्जला व्रत के बाद होता है पारण

करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से रखती हैं. पूरे दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए व्रत रखने के बाद शाम को पूजा-अर्चना की जाती है. चंद्रमा के दर्शन होने पर महिलाएं अर्घ्य अर्पित करती हैं और पति की खुशहाली की प्रार्थना करती हैं. इसके बाद परंपरागत रीति से छलनी के माध्यम से चांद और पति का चेहरा देखने की रस्म निभाई जाती है.

सरगी से शुरू होती है करवा चौथ की परंपरा

इस पर्व की शुरुआत सूर्योदय से काफी पहले होती है. महिलाएं सुबह सरगी ग्रहण करने के बाद व्रत का संकल्प लेती हैं. दिनभर उपवास रखने के बाद शाम के समय शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश और करवा माता की आराधना की जाती है. पूजा के बाद सभी की निगाहें चंद्रमा के उदय पर टिकी रहती हैं. जैसे ही चांद नजर आता है, महिलाएं पूजा की थाली लेकर अर्घ्य अर्पित करती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं.

छलनी से चांद देखने की परंपरा

करवा चौथ की सबसे खास रस्मों में से एक छलनी से चंद्रमा देखना माना जाता है. धार्मिक परंपरा के अनुसार महिलाएं पहले छलनी से चांद को निहारती हैं और फिर उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखती हैं. इसके बाद पति के हाथों पानी पीकर व्रत खोला जाता है. कई परिवारों में इस अवसर पर मिठाई खिलाने की परंपरा भी निभाई जाती है. पूजा पूरी होने के बाद महिलाएं घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेती हैं.

करवा चौथ का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार इस वर्ष चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को रात 1 बजकर 6 मिनट से शुरू हुई और रात 10 बजकर 9 मिनट तक रहेगी. शाम की पूजा के लिए शुभ समय 5:38 बजे से 6:56 बजे तक बताया गया. वहीं राजधानी दिल्ली में चंद्रोदय का निर्धारित समय रात 8:17 बजे रहा.

प्रमुख शहरों में चंद्रोदय का समय

दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में रात 8:17 बजे चंद्रमा निकलने का समय रहा. गुरुग्राम में यह समय 8:18 बजे निर्धारित किया गया. लखनऊ में 8:06 बजे, जयपुर में 8:28 बजे, मुंबई में 9:00 बजे, कोलकाता में 7:47 बजे और बेंगलुरु में 8:55 बजे चंद्र दर्शन का समय निर्धारित किया गया था.

ये भी पढ़ें-सात भाइयों की लाडली वीरवती की वह कथा, जिसके बिना अधूरा है करवा चौथ का व्रत

अर्घ्य देते समय इन मंत्रों का करें जाप

करवा चौथ की पूजा में चंद्रदेव को अर्घ्य देने के दौरान मंत्रों का विशेष महत्व माना जाता है. श्रद्धालु महिलाएं पूजा करते समय “ॐ चन्द्राय नमः” और “ॐ सोमाय नमः” मंत्रों का उच्चारण कर सकती हैं. मान्यता है कि इन मंत्रों के साथ चंद्रदेव की आराधना करने से वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है. पूजा पूरी होने के बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत का पारण किया जाता है और करवा चौथ की सभी धार्मिक रस्में संपन्न होती हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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