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अमेरिका का बड़ा झटका! खत्म होने जा रहा है H-1B वीजा का ‘डेफरेंस’, 10 लाख भारतीयों पर संकट

US Deference Policy: H-1B वीजाधारकों के लिए बुरी खबर: अमेरिका सरकार ‘डेफरेंस टू प्रायर अप्रूवल्स’ पॉलिसी खत्म करने की तैयारी में है. अब हर वीजा रिन्यूअल की नए सिरे से होगी जांच, 10 लाख से अधिक भारतीयों पर मंडराया संकट.

अमेरिका में H-1B वीजा एक्सटेंशन के कड़े नियम होने से भारतीय कर्मचारियों की चिंता बढ़ी.

(AI IMAGE)

US Deference Policy: अमेरिका में रह रहे और काम कर रहे लाखों भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए एक बुरी खबर है. ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा एक्सटेंशन से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण ‘डेफरेंस टू प्रायर अप्रूवल्स’ (Deference to Prior Approvals) पॉलिसी को समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है. एंप्लॉयमेंट-बेस्ड ग्रीन कार्ड के लंबे इंतजार के बीच इस नियम के बदलने से भारतीय आईटी और टेक कर्मचारियों के अमेरिका में लीगल स्टेटस और रिन्यूअल पर गहरा असर पड़ सकता है.

अमेरिका द्वारा H-1B वीजा एक्सटेंशन की ‘डेफरेंस पॉलिसी’ खत्म करने का प्रस्ताव ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे 10 लाख से अधिक भारतीयों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. हर रिन्यूअल को नए आवेदन की तरह जांचने के नियम से वीजा प्रोसेसिंग में लंबी देरी और रिजेक्शन का जोखिम बढ़ जाएगा, जिससे अमेरिका में कार्यरत भारतीय प्रोफेशनल्स और उनके परिवारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

क्या है ‘डेफरेंस पॉलिसी’ और क्या बदलने जा रहा है?

मौजूदा इमिग्रेशन नियमों के तहत, जब USCIS किसी ऐसे वीजा एक्सटेंशन आवेदन की समीक्षा करता है जिसमें पुरानी कंपनी, कर्मचारी और काम के तथ्य समान होते हैं, तो अधिकारी पिछले फैसले को प्राथमिकता (Deference) देते हैं. यानी जब तक कोई बड़ी गलती या नई नकारात्मक जानकारी न मिले, पिछला अप्रूवल ही मान्य माना जाता है. हालांकि, नए प्रस्ताव के लागू होने के बाद अधिकारियों के लिए पुराने फैसले को प्राथमिकता देना जरूरी नहीं होगा. अब हर रिन्यूअल को एक नए आवेदन की तरह देखा जाएगा और योग्यता, जॉब रोल व सैलरी की दोबारा पूरी जांच होगी.

अमरीकी सरकार क्यों खत्म करना चाहती है यह नियम?

ट्रंप सरकार और डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) का तर्क है कि पुरानी पॉलिसी अधिकारियों के हाथ बांध देती है और गहन जांच में रुकावट बनती है. सरकार का मानना है कि इस नियम की आड़ में गलत या बिना योग्यता वाले आवेदन भी रिन्यू होते चले जाते हैं. नए बदलाव का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि आवेदक हर रिन्यूअल के समय सभी आवश्यक शर्तों को पूरा करता हो.

अमेरिका में बसे 10 लाख भारतीयों पर क्या होगा असर?

फाइनेंशियल ईयर 2025 में H-1B वीजा पाने वालों में करीब 71% भारतीय थे. वर्तमान में करीब 10 लाख भारतीय एंप्लॉयमेंट-बेस्ड ग्रीन कार्ड के भारी बैकलॉग में फंसे हैं, जहाँ EB-2 श्रेणी में 179 साल और EB-3 श्रेणी में 38 साल तक का संभावित इंतजार है. ऐसे में वर्क वीजा एक्सटेंशन ही उनके अमेरिका में रहने का एकमात्र सहारा है. नियम बदलने से आवेदनों की प्रोसेसिंग में भारी देरी (‘Request for Evidence’ या RFE की बढ़ोतरी) हो सकती है, जिससे काम रुकने का खतरा पैदा हो जाएगा. साथ ही, H-4 वीजा पर रह रहे जीवनसाथियों के वर्क ऑथराइजेशन (EAD) पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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