आजम खान पर ED का शिकंजा
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान एक बार फिर कानूनी विवादों के केंद्र में आ गए हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में उन्हें हिरासत में लिया है. अधिकारियों के अनुसार, उन्हें गाजियाबाद की अदालत में पेश किया जाएगा, जहां औपचारिक गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. इससे कुछ समय पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में उन्हें राहत देते हुए जमानत दी थी, जिसके बाद वह रामपुर जेल से बाहर आए थे. हालांकि अब ईडी की कार्रवाई ने उनकी परेशानियां फिर बढ़ा दी हैं.
रिहाई के बाद कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल
जेल से बाहर आने के बाद आजम खान ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि उनके पास अब कहने के लिए ज्यादा कुछ नहीं बचा है और उन्हें लगता है कि कानून का अस्तित्व कमजोर हो गया है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या उनके साथ हो रही कार्रवाई उनकी पहचान से जुड़ी है. साथ ही उन्होंने जौहर यूनिवर्सिटी और शिक्षा संस्थानों की स्थापना को लेकर भी अपनी बात रखी.
जौहर ट्रस्ट की संपत्तियों पर ईडी का बड़ा एक्शन
इस पूरे मामले में ईडी ने आजम खान से जुड़े मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की संपत्तियों पर भी कार्रवाई की है. जांच एजेंसी ने जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और भवनों समेत 426.46 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है. एजेंसी के अनुसार, इन संपत्तियों का अनुमानित बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये है.
ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी पर जांच एजेंसियों की नजर
रामपुर के सिंहनखेड़ा गांव में स्थित जौहर यूनिवर्सिटी का पूरा परिसर मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के नाम दर्ज है. इस ट्रस्ट की स्थापना आजम खान द्वारा की गई थी और उस पर उनका प्रभाव बताया जाता है. वह विश्वविद्यालय के मानद चांसलर की भूमिका भी निभा चुके हैं.
किसानों की जमीन कब्जाने के आरोपों से शुरू हुई जांच
ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत अपनी जांच रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 एफआईआर के आधार पर शुरू की. इन मामलों में आईपीसी की धारा 384 सहित अन्य धाराओं के तहत आरोप लगाया गया कि जौहर यूनिवर्सिटी के विस्तार के लिए किसानों की कृषि भूमि पर कथित रूप से दबाव बनाकर कब्जा किया गया था.
शत्रु संपत्ति पर भी अवैध कब्जे का आरोप
जांच के दौरान जिला प्रशासन की रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि सिंहनखेड़ा क्षेत्र में लगभग 34 एकड़ में फैली शत्रु संपत्ति के 45 प्लॉटों का भी इस्तेमाल किया गया. आरोप है कि इस भूमि को विश्वविद्यालय परियोजना में जोड़ा गया, जबकि गृह मंत्रालय द्वारा नियुक्त कस्टोडियन पहले ही संबंधित लीज को रद्द कर चुका था. बाद में जिला प्रशासन के माध्यम से इस जमीन का नियंत्रण वापस लिया गया.
सरकारी धन के दुरुपयोग की भी जांच
ईडी की जांच में यह आरोप भी सामने आया कि सार्वजनिक विकास कार्यों के लिए स्वीकृत धन का इस्तेमाल विश्वविद्यालय से जुड़े कार्यों में किया गया. एजेंसी का दावा है कि कुछ सरकारी परियोजनाएं निजी परिसर में कराई गईं और सरकारी ठेके लेने वाले कुछ ठेकेदारों से धन ट्रस्ट तक दान के रूप में पहुंचाया गया.
नई एफआईआर में साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप
जांच एजेंसी ने पीएमएलए की धारा 66(2) के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ सूचनाएं साझा की थीं. इसके आधार पर 13 अक्टूबर 2026 को रामपुर के अजीमनगर थाने में एफआईआर संख्या 0224/2026 दर्ज की गई. मामले में आजम खान, ट्रस्ट और अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 और 13 के तहत केस दर्ज किया गया.
2016 के बुलडोजर और लूटपाट मामलों की भी जांच
ईडी ने रामपुर पुलिस द्वारा दर्ज 28 अन्य एफआईआर को भी अपनी जांच में शामिल किया है. इनमें अधिकांश मामलों में पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. आरोप है कि वर्ष 2016 में रामपुर शहर में कई मकानों को बुलडोजर चलाकर गिराया गया था. प्रभावित परिवारों में बड़ी संख्या उन लोगों की थी जो वक्फ संपत्तियों पर किरायेदार के रूप में रह रहे थे.
मारपीट और लूटपाट के भी आरोप
एफआईआर और चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि कुछ अधिकारियों और अन्य लोगों की मौजूदगी में मकानों को ध्वस्त किया गया. शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि लोगों के साथ मारपीट हुई, उन्हें मुकदमों में फंसाने की धमकियां दी गईं और उनकी नकदी, गहने तथा मवेशी भी छीन लिए गए. जांच में यह दावा भी शामिल है कि तोड़े गए मकानों का मलबा जौहर यूनिवर्सिटी परिसर तक पहुंचाया गया था.
ये भी पढ़ें-बारिश से प्रभावित लोगों की मदद में जुटे प्रशासन, मुख्यमंत्री ने दिए तत्काल राहत के निर्देश
नगर पालिका की मशीनरी पर भी सवाल
ईडी की जांच में रामपुर नगर पालिका से जुड़ा एक और मामला सामने आया है. आरोप है कि नगर पालिका के लिए खरीदी गई सफाई मशीनों को विश्वविद्यालय परिसर में इस्तेमाल के लिए भेज दिया गया था. जांच एजेंसी अब इन सभी मामलों से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग पहलुओं की गहराई से पड़ताल कर रही है, जिससे आजम खान की कानूनी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



