दीपावली के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ के बस्तर पहुंचे पीएम मोदी ने सुरक्षा बलों के जवानों के बीच एक ऐतिहासिक और आक्रामक संबोधन दिया. प्रधानमंत्री ने दो टूक शब्दों में चेताया कि हालांकि जंगलों से हथियारबंद नक्सली अब लगभग समाप्त हो चुके हैं. जंगलों से हथियारबंद नक्सली खत्म हो चुके हैं लेकिन अब देश के सामने एक नई चुनौती है. दिमागी नक्सलियों ने कई राजनीतिक दलों और अलग-अलग संगठनों में घुसपैठ कर ली है.
राजनीतिक दलों और संगठनों में घुसपैठ
प्रधानमंत्री ने देशवासियों और सुरक्षा बलों को आगाह करते हुए कहा कि ये तथाकथित दिमागी नक्सली आज भी विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों में छिपे हुए हैं और लोगों को देश के संविधान तथा लोकतंत्र के खिलाफ भड़काने का षड्यंत्र रच रहे हैं.
A very special Diwali with our brave security forces in Bastar, Chhattisgarh. https://t.co/7I5aOQdMSk
— Narendra Modi (@narendramodi) November 8, 2026
पुरानी सियासत पर तीखा प्रहार
अतीत के दर्दनाक पन्नों को पलटते हुए पीएम मोदी ने वर्ष 2010 के उस खौफनाक दौर को याद किया जब दंतेवाड़ा में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हो गए थे और उसी जिले में 44 निर्दोष नागरिकों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. उन्होंने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि 2004 से 2013 के बीच हर साल नक्सलियों के हाथों शहीद होने वाले जवानों की संख्या मारे गए नक्सलियों से ज्यादा हुआ करती थी. उन्होंने तंज कसते हुए कहा-
“जब यह धरती वीरों के रक्त से भीग रही थी, तब महलों में रहने वाले नामदारों की आंखों से न तो कोई आंसू निकले और न ही उनके चेहरे पर कोई संवेदना दिखाई दी”
मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति से बदली तस्वीर
पीएम ने कहा कि 2014 में देश की जनता द्वारा सेवा का अवसर मिलने के बाद राष्ट्र प्रथम की भावना और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी गई. इसी का नतीजा है कि पिछले 47 वर्षों में यह पहला ऐसा साल रहा है जब ड्यूटी के दौरान सीआरपीएफ का एक भी जवान शहीद नहीं हुआ.
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बस्तर में विकास का महा-अभियान
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ-साथ विकास की रफ्तार का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि इन इलाकों में 1,500 किलोमीटर से अधिक सड़कें, 9,500 से ज्यादा मोबाइल टावर, लगभग 200 एकलव्य विद्यालय, और 50 से अधिक आईटीआई व कौशल विकास केंद्र खोले गए हैं. साथ ही, विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने गर्व के साथ कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश में 50 करोड़ लोग भीषण गरीबी से बाहर निकले हैं, जिसमें नक्सलवाद और अलगाववाद के खिलाफ लड़ी गई इस निर्णायक लड़ाई की बहुत बड़ी भूमिका रही है.
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