हम अक्सर वफादारी की मिसाल देने के लिए कुत्तों का नाम लेते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि किसी कुत्ते की वफादारी इस कदर रही हो कि उसके नाम पर बाकायदा एक मंदिर बनवा दिया जाए? राजस्थान के जालौर जिले के तिलोरा गांव में कुछ ऐसा ही अनोखा नजारा देखने को मिलता है. यहां के लोग किसी देवी-देवता के आगे नहीं, बल्कि एक ‘वफादार कुत्ते’ के आगे सिर झुकाते हैं. इस मंदिर को स्थानीय लोग ‘कूतरा बावजी का मंदिर’ कहते हैं. यह जगह आज वफादारी और अटूट आस्था की एक ऐसी मिसाल बन चुकी है, जिसकी कहानी सुनकर आप भी दंग रह जाएंगे.
खौफनाक सूअर और जांबाज शिकारी
कहानी शुरू होती है कई दशक पहले, जब तिलोरा गांव के आसपास का इलाका घने जंगलों से घिरा हुआ था. उन दिनों एक आदमखोर जंगली सूअर ने पूरे इलाके में दहशत फैला रखी थी. वह न सिर्फ किसानों की फसलें बर्बाद कर रहा था, बल्कि इंसानों पर भी हमला कर देता था. इस खौफ को खत्म करने के लिए बाकरपुरा के ठाकुर खंगाल सिंह राठौड़ अपने शिकारी दल के साथ निकले.
पीछा करते-करते वे तिलोरा के जंगलों में पहुंचे, जहां झाड़ियों में छिपे सूअर ने अचानक ठाकुर पर जानलेवा हमला कर दिया. उस वक्त ठाकुर की जान बचाने के लिए उनका वफादार कुत्ता मौत के सामने खड़ा हो गया. कुत्ते और उस खूंखार सूअर के बीच ऐसी खूनी लड़ाई हुई कि ठाकुर को संभलने का मौका मिल गया. ठाकुर ने सूअर को तो मार गिराया, लेकिन उनका वो वफादार साथी इस जंग में बुरी तरह घायल हो गया और उसने वहीं दम तोड़ दिया.
नजरअंदाज किया बलिदान, तो शुरू हुआ संकटों का दौर
कहा जाता है कि उस वक्त कुत्ते के इस बलिदान को एक साधारण जानवर की मौत समझकर अनदेखा कर दिया गया. लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था. कुछ सालों बाद ठाकुर परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा. जब एक साधु से सलाह ली गई, तो उन्होंने बताया कि उस वफादार जीव की आत्मा को शांति नहीं मिली है और उसकी याद में मंदिर बनवाना ही एकमात्र समाधान है. बस, फिर क्या था! उसी जगह पर ‘कूतरा बावजी’ की स्थापना की गई.
आज भी कायम है वफादारी की ये अनूठी विरासत
स्थानीय निवासी श्यामलाल बताते हैं कि आज भी गांव के लोग इस मंदिर को बहुत जागृत मानते हैं. ठाकुर परिवार हर साल यहां विशेष पूजा-अर्चना के लिए आता है. गांव वालों का मानना है कि ‘कूतरा बावजी’ की कृपा से उनके गांव पर आने वाले संकट टल जाते हैं. यह मंदिर हमें सिखाता है कि वफादारी चाहे इंसान की हो या जानवर की, अगर वो सच्ची है, तो वक्त उसे भुला नहीं पाता बल्कि उसे ‘आस्था’ का दर्जा दे देता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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