Bihar Drought: बिहार में इस साल मानसून की बेरुखी ने अन्नदाताओं की कमर तोड़ दी है. भीषण उमस और चिलचिलाती गर्मी के बीच रोहन (रोहिणी) और अदरा (आर्द्रा) जैसे मुख्य नक्षत्र बीत चुके हैं, लेकिन आसमान से राहत की बूंदें नहीं बरसीं. हालात इतने गंभीर हैं कि अब खेतों की प्यास बुझाने और अपनी फसलों को बचाने के लिए किसान भगवान की शरण में पहुंच गए हैं.
बिहार में मानसून की कमी के कारण जून में सामान्य से 50% कम बारिश हुई है, जिससे धान की खेती पर गंभीर संकट मंडरा रहा है. रोहिणी और आर्द्रा नक्षत्र बीतने के बाद भी खेत सूखे हैं. ‘धान का कटोरा’ माने जाने वाले पटना के बिहटा, पालीगंज और बिक्रम में बिचड़े सूख रहे हैं और रोपनी ठप है. मजबूर होकर बिहटा के आम्हारा और राघोपुर के किसान बोरिंग के सहारे फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं और बारिश के लिए मंदिरों में भगवान शिव का जलाभिषेक व विशेष अनुष्ठान कर रहे हैं.
क्या है पूरा मामला? (Drought in Bihar)
बिहार में मानसून की बेरुखी से आम जनजीवन बेहाल है और जून में औसत से 50% कम बारिश दर्ज की गई है. इस सूखे का सीधा असर खेती पर पड़ रहा है, जहां पानी की कमी से धान के बिचड़े (पौध) सूख रहे हैं. किसान भारी लागत लगाकर निजी बोरिंग और पंपसेट के सहारे फसलों को बचाने की आखिरी कोशिशों में जुटे हैं.
आसमान की ओर उम्मीद लगाए बैठे (Cultivation in Bihar)
पटना के पालीगंज, बिक्रम और बिहटा को ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है, लेकिन बारिश न होने से यहां धान की रोपनी पूरी तरह ठप है. आम्हारा गांव के किसान लालू सिंह के मुताबिक, 25 बीघा खेत होने के बावजूद वे पानी के अभाव में काम शुरू नहीं कर पाए हैं और किसान आसमान की ओर उम्मीद लगाए बैठे हैं.
बारिश के लिए भगवान भोलेनाथ विशेष अनुष्ठान (Patna-Paliganj-Bihta)
जब प्राकृतिक और सरकारी व्यवस्थाएं नाकाम साबित हुईं, तो ग्रामीणों ने आस्था का सहारा लिया है. राघोपुर के स्थानीय शिव मंदिरों में बारिश के लिए विशेष अनुष्ठान और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया जा रहा है. स्थानीय निवासी विकास मिश्रा ने बताया कि भीषण उमस और झुलसाने वाली गर्मी से लोग त्रस्त हैं और अब केवल भगवान की शरण ही आखिरी उम्मीद बची है.
भारत एक्सप्रेस
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