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समुद्र बन गया रेगिस्तान और दफन हो गया इतिहास! जानिए कैसे मिला 1533 में लापता हुआ ‘बॉम जीसस’

Bom Jesus, namibia: अफ्रीका के नामिब रेगिस्तान में पुरातत्वविदों ने 500 साल पहले डूबे उस समुद्री जहाज की खोज कर ली है जो भारत जाते वक्त समुद्र में डूब गया था. इस जहाज का नाम बॉम जीसस था. जो अटलांटिक महासागर में व्यापारिक यात्रा पर निकला था.

Bom Jesus Discovery

अफ्रीका के नामिब रेगिस्तान में पुरातत्वविदों ने 500 साल पहले डूबे उस समुद्री जहाज की खोज कर ली है जो भारत जाते वक्त समुद्र में डूब गया था. पुरातत्वविदों को इस जहाज से भारी मात्रा में सोना, तांबा, हाथीदांत सहित कई कीमती सामान मिले हैं. इस जहाज का नाम बॉम जीसस था. जो अटलांटिक महासागर में व्यापारिक यात्रा पर निकला था, लेकिन भारत पहुंचने से पहले ही डूब गया था. क्या है इस बाम जीसस जहाज की कहानी. क्यों इसे कहा जा रहा जीता-जागता इतिहास आइये बताते हैं.

1533 का साल था. दिल्ली की गद्दी पर मुगल बादशाह हुमायूं तख्तनशीन था. उधर गयासुद्दीन महमूद शाह ने भी बंगाल की सत्ता संभाल ली थी. अबतक भारत के बारे में यूरोपीय देशों को पता चल गया था. क्योंकि वास्कोडिगामा 1498 में ही समुद्री मार्ग से भारत पहुंचने वाले रास्ते की खोज कर चुके थे. भारत के मसाले, लकड़ी, हाथी के दांत सहित कई चीजों की यूरोप में भारी डिमांड थी. यूरोपीय देशों में भारत से व्यापार की होड़ मची थी. ये देश भारत पहुंचने के लिए ‘केप ऑफ गुड होप’ मार्ग का इस्तेमाल करते थे. हिंदी में इसका अर्थ होता है वैसा द्वीप जहां से अच्छी आशा दिखती है. यह मार्ग दक्षिण अफ्रीका के दक्षिणी सिरे पर मौजूद एक प्रायद्वीप को दर्शाता था. जहां से भारत पहुंचना आसान था. ‘केप ऑफ गुड होप’ को याद रखियेगा क्योंकि कहानी में इसका बार-बार जिक्र होगा.

अब आते हैं मेन कहानी पर. भारत के साथ व्यापार से पुर्तगाल को काफी लाभ हो रहा था. वास्कोडिगामा भी पुर्तगाल के ही रहने वाले थे. पुर्तगाल के राजा जोआओ तृतीय ने भारत के साथ व्यापार को और ज्यादा बढ़ाने के लिए एक ऐसे जहाज के निर्माण का आदेश दिया. जो ज्यादा से ज्यादा माल ढुलाई में कारगर हो. कुछ ही महीनों में लंबी दूरी के व्यापार के लिए एक बड़े जहाज का निर्माण किया गया. जिसका नाम रखा गया बॉम जीसस.

Bom JesusBom Jesus

लंबी समुद्री यात्रा के लिए था बॉम जीसस

बॉम जीसस एक बड़े पाल वाला जहाज था. जो लंबी दूरी की समुद्री यात्राओं के लिए डिजाइन किया गया था. इस जहाज में तीन मस्तूल लगे थे. आम तौर पर जहाजों में एक ही मस्तूल होता है. इसका कारण ये था कि जहाज समुद्री हवाओं का ज्यादा से ज्यादा उपयोग कर तेज रफ्तार हासिल कर सके. इसकी चौड़ी बीम और ऊंचा फोरकास्टल लंबी दूरी की यात्राओं के दौरान जहाज की स्थिरता और माल ढुलाई की क्षमता को बढ़ाता था.

7 मार्च 1533 को बॉम जीसस जहाज पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन से भारत के लिए रवाना हुआ. यह भारत के मसाला बंदरगाहों के लिए जाने वाले 7 जहाजों के पुर्तगाली बेड़े का हिस्सा था. इस जहाज की कमान कप्तान डी. फ्रांसिस्को डी नोरोन्हा के हाथों में थी. जहाज में नाविकों, व्यापारियों और रईसों सहित 300 से अधिक यात्री सवार थे.

मार्च 1533 में भारत के लिए हुआ रवाना

मार्च की शुरुआत में लिस्बन से निकलने के बाद बॉम जीसस दक्षिण की ओर रवाना हुआ, लेकिन 1533 के मध्य वह केप ऑफ गुड होप के पास एक भयंकर समुद्री तूफान में फंस गया. तूफान इतना खतरनाक था कि उसने जहाज को उत्तर की ओर अपने मार्ग से बहुत दूर धकेल दिया. अंत में जहाज ऑरेंज नदी के मुहाने पर चट्टानों में फंस गया. आज यह इलाका नामीबिया का स्केलेटन कोस्ट है. इसी जगह पर पुर्तगाल की शान के नाम से मशहूर बॉम जीसस जहाज डूब गया. पुर्तगाली अभिलेखागार के मुताबिक इस हादसे में जहाज पर सवार सभी 300 लोग मारे गए.

अप्रैल 2008 में नामीबिया के ओरंजेमुंड के पास प्रतिबंधित क्षेत्र में पुरातत्वविदों के द्वारा खनन किया जा रहा था. तभी एक भूवैज्ञानिक को एक जहाज का मस्तूल दिखाई दिया. जब पुरातत्वविदों ने पूरे इलाके की बारीकी से खनन किया, तो उन्हें पूरा का पूरा बॉम जीसस जहाज मिल गया. खास बात ये थी कि जिस जगह यह जहाज डूबा था वो उथले पानी का इलाका था, जो 500 सालों बाद रेगिस्तान में तब्दील हो चुका था.

पुरातत्वविदों को मिला अनमोल खजाना

जब पुरातत्वविदों ने जहाज के अंदर खोज की तो उन्हें कलाकृतियों का बेहतरीन खजाना मिला. इस जहाज से 2000 सोने के सिक्के भी मिले. जो मुख्य रूप से स्पेन के राजा फर्डिनेंड और इसाबेला के शासनकाल के थे. पुरातत्वविदों को कुछ सिक्के राजा जोआओ तृतीय के शासनकाल के भी मिले. इसके अलावा 22 टन तांबे की सिल्लियां, 2 टन वजन के 105 हाथी दांत, तोपें, तलवारें, मस्कट, चेन मेल इत्यादी चीजें भी इस जहाज से मिलीं.

समुद्र कैसे बन गया रेगिस्तान?

पुरातत्वविदों के मुताबिक नामीबिया के नामीब रेगिस्तान में जिस जगह बॉम जीसस जहाज का मलबा मिला, वह मूल रूप से ऑरेंज नदी के मुहाने का क्षेत्र था. समय के साथ नदी से आने वाले तलछटों की वजह से नदी ने अपना स्थान परिवर्तित कर लिया और यह इलाका बंजर हो गया. समय के साथ नामीब रेगिस्तान से उड़कर आने वाली रेत ने इस इलाके को ढंक दिया. जिससे पुर्तगाल का बॉम जीसस जहाज धरती के गर्भ में दफन हो गया.

-भारत एक्सप्रेस



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