Goat Tehrvi Bhoj: कहते हैं प्यार की कोई भाषा और कोई जात नहीं होती, और जब यह प्यार किसी बेजुबान से हो जाए तो रिश्ता रूह का बन जाता है! इंसानों के जाने पर तो तेहरवीं और भोज आपने बहुत देखे होंगे, लेकिन मध्य प्रदेश के विदिशा में एक किसान ने अपनी 20 साल पुरानी चहेती बकरी ‘कटोरी’ की याद में जो किया, उसने अजब-गजब की एक अनोखी मिसाल कायम कर दी है. आइए जानते हैं पलंग पर सोने वाली ‘कटोरी’ की यह दिलचस्प कहानी.
मध्य प्रदेश के विदिशा में एक किसान ने अपनी 20 साल पुरानी पालतू बकरी ‘कटोरी’ के निधन पर इंसानियत और बेजुबान से अटूट प्रेम की मिसाल पेश की. बकरी की मौत के बाद परिवार ने पूरे रीति-रिवाज से तेहरवीं का आयोजन कर 600 लोगों को महाभोज कराया.
20 साल पुरानी बकरी ‘कटोरी’ की तेहरवीं में जुटा पूरा गांव (Goat Funeral Vidisha)
दुनिया में वफादारी और प्यार की बहुत सी कहानियां आपने सुनी होंगी, लेकिन मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के सिरोंज से जो खबर आई है, वो आपको हैरान भी करेगी और भावुक भी! यहां के भवानी नगर निवासी किसान नवल सिंह मालवीय की 20 साल पुरानी पालतू बकरी ‘कटोरी’ (उर्फ चमेली) का 3 अगस्त को निधन हो गया. लेकिन यह सिर्फ एक बेजुबान की मौत नहीं थी, बल्कि परिवार के एक अहम सदस्य की विदाई थी.
घर में चूल्हा तक नहीं जला (Nawal Singh Malviya Goat Katori)
‘कटोरी’ की जिंदगी भी किसी ‘रॉयल’ सदस्य से कम नहीं थी. उसे कभी खूंटे से नहीं बांधा गया, बल्कि वह घर के अंदर बाकायदा पलंग पर सोती थी. पूरे परिवार के सुख-दुख में शरीक रहने वाली कटोरी जब दुनिया से गई, तो मालवीय परिवार में मातम छा गया और उस दिन घर में चूल्हा तक नहीं जला.
600 लोगों के लिये विशाल महाभोज आयोजित हुआ (Goat Funeral Invitation Card)
मातम यही खत्म नहीं हुआ, किसान नवल सिंह ने 13 दिनों तक पूरा शोक मनाया. 15 अगस्त को बकायदा शोक पत्र यानी निमंत्रण कार्ड छपवाए गए और तेहरवीं (गंगाजली) का आयोजन हुआ. इस मौके पर पूरे गांव और रिश्तेदारों समेत 600 लोगों के लिए एक विशाल महाभोज का आयोजन किया गया. इस अनोखी तेहरवीं में पहुंचे हर शख्स की आंखें नम थीं और सब नवल सिंह के इस अनूठे बेजुबान प्रेम की मिसाल की तारीफ कर रहे थे.
-भारत एक्सप्रेस
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