Wildlife Safe Road: देश में सड़क निर्माण के साथ-साथ अब पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा पर भी गंभीरता से ध्यान दिया जाने लगा है. इसी दिशा में एक बड़ी और सराहनीय पहल करते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने भारत की पहली वाइल्डलाइफ-सेफ रोड शुरू की है. यह खास सड़क मध्य प्रदेश के नेशनल हाईवे-45 पर बनाई गई है, जो वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व और नौरादेही वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी जैसे संवेदनशील इलाकों से होकर गुजरती है.
‘इस सड़क की सबसे खास बात है इसका अनोखा डिजाइन, जिसमें पहली बार टेबल-टॉप रेड मार्किंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इसका मकसद साफ है, हाईवे पर दौड़ते वाहनों और जंगल से गुजरने वाले जानवरों के बीच टकराव को कम करना.
क्या है टेबल-टॉप रेड मार्किंग?
यह तकनीक दुबई की मशहूर शेख जायद रोड से प्रेरित है. सड़क पर 5 मिलीमीटर मोटी लाल रंग की खास परत बिछाई गई है, जो हल्की उभरी हुई होती है. जैसे ही वाहन इस हिस्से पर पहुंचते हैं, ड्राइवर को सतह के बदलते अहसास से खुद-ब-खुद सतर्कता मिलती है और गाड़ी की रफ्तार कम हो जाती है. खास बात यह है कि इसमें झटका नहीं लगता और अचानक ब्रेक लगाने की जरूरत भी नहीं पड़ती.
यह लाल रंग की थर्मोप्लास्टिक परत उस इलाके में डाली गई है, जिसे डेंजर जोन के तौर पर चिन्हित किया गया है. तेज लाल रंग ड्राइवरों को पहले ही संकेत दे देता है कि वे एक स्पीड-रिस्ट्रिक्टेड और वन्यजीव-संवेदनशील क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं.
Red Roads, Green Intent: NHAI is redefining highway safety while protecting wildlife and forest ecology
🔸India’s First ‘Table-Top Red Marking’ on a Highway
🔸25 dedicated animal underpasses provided along the 11.96 km stretch at identified animal movement locations
Read here:… pic.twitter.com/Uk92DtOfEr
— PIB India (@PIB_India) December 15, 2025
कहां लागू हुई यह पहल?
NHAI के मुताबिक, यह व्यवस्था 11.96 किलोमीटर लंबे हाईवे प्रोजेक्ट के तहत बनाई गई है, जिसमें से 2 किलोमीटर का घाट सेक्शन खास तौर पर इस नई तकनीक के साथ तैयार किया गया है. यह हिस्सा टाइगर रिजर्व के बीच से गुजरता है, जहां वन्यजीवों की आवाजाही ज्यादा रहती है.
जानवरों के लिए सुरक्षित रास्ते भी तैयार
सिर्फ लाल मार्किंग ही नहीं, बल्कि जानवरों की सुरक्षित आवाजाही के लिए 25 अंडरपास भी बनाए गए हैं, ताकि वे सड़क पार किए बिना नीचे से निकल सकें. इसके अलावा, हाईवे के किनारे आठ फीट ऊंची फेंसिंग लगाई गई है, जो जानवरों को सड़क पर आने से रोककर उन्हें अंडरपास की ओर मार्गदर्शन करती है.
स्पीड कंट्रोल के लिए स्पीड डिटेक्शन सिस्टम लगाए गए हैं, जबकि छोटे पुलों पर कैमरे भी लगाए गए हैं, जो जानवरों की गतिविधियों पर नजर रखते हैं.
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देशभर में लागू हो सकता है मॉडल
यह परियोजना NHAI की ग्रीन हाईवे पहल का हिस्सा है. अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो आने वाले समय में इसे देश के अन्य वन्यजीव-संवेदनशील हाईवे सेक्शनों पर भी लागू किया जा सकता है. यह कदम न सिर्फ इंसानी जान बचाने में मदद करेगा, बल्कि जंगल के बाशिंदों के लिए भी एक सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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