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Jaipur Unique Temple News: अगर आप या आपके घर में कोई शादी न होने की वजह से परेशान है और हर रिश्ता टूट जाता है, तो आपको जयपुर के इस अनोखे गणेश मंदिर का चक्कर जरूर काटना चाहिए. मान्यता ऐसी है कि यहां की एक खास रस्म से कुंवारों का चट मंगनी और पट व्याह तय हो जाता है.
जयपुर का मोती डूंगरी गणेश मंदिर अपने अनूठे इतिहास और चमत्कारी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है. गणेश चतुर्थी के सिंजारा उत्सव में बप्पा को क्विंटल के हिसाब से मेहंदी चढ़ती है, जिसे लगाने से कुंवारों की शादी में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं और एक साल में शादी तय होने का विश्वास माना जाता है.
जहां बैलगाड़ी रुकी, वहीं बस गए गणपति
बात साल 1761 की है, जब मेवाड़ के राजा बैलगाड़ी पर भगवान गणेश की एक विशाल मूर्ति लेकर लौट रहे थे. राजा ने कसम खाई थी कि बैलगाड़ी जहाँ पहली बार खुद-ब-खुद रुक जाएगी, बप्पा की स्थापना वहीं होगी. और गाड़ी कहां रुकी? जयपुर की मोती डूंगरी पहाड़ियों की तलहटी में! बस तभी से सेठ जय राम पालीवाल के हाथों बना यह मंदिर जयपुर का सबसे अनूठा आस्था केंद्र बन गया.
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चमत्कारी मेहंदी से 1 साल में बजती है शहनाई
इस मंदिर का सबसे मजेदार और अजब-गजब पहलू है गणेश चतुर्थी पर मनाया जाने वाला ‘सिंजारा उत्सव’. इस दिन बप्पा को कोई एकाध किलो नहीं, बल्कि कई क्विंटल मेहंदी चढ़ाई जाती है. गजब का दावा तो यह है कि जिन कुंवारों की शादी में लगातार अड़चनें आ रही हों, वे अगर यह चढ़ाई हुई मेहंदी अपने हाथों में लगा लें, तो महज एक साल के अंदर उनकी शादी का योग पक्का हो जाता है.
जयपुर का पहला ‘शादी का कार्ड’ इन्हीं को जाता है
जयपुर के लोगों का बप्पा के साथ एक अनोखा और पारिवारिक रिश्ता है. शहर में चाहे किसी के घर नया वाहन आए या शादी का पहला कार्ड छपे, सबसे पहला न्योता या पूजा इसी मोती डूंगरी मंदिर में दी जाती है. यहां तक कि दूल्हा-दुल्हन भी शादी के ठीक बाद सबसे पहले बप्पा के दर पर ही माथा टेकने पहुंचते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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