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Ajab Gajab News: उत्तर प्रदेश के रामपुर से एक ऐसा अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जिसे सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे. दो पत्नियों के बीच छिड़े ‘गृहयुद्ध’ को शांत करने के लिए बुलाई गई गांव की पंचायत ने एक ऐसा टाइम-टेबल और बजट चार्ट जारी किया है, जिसकी चर्चा अब पूरे इलाके से लेकर सोशल मीडिया तक हो रही है.
रामपुर में दो पत्नियों के विवाद को सुलझाने के लिए पंचायत ने अनोखा फरमान सुनाया है, जिसके तहत पति को हफ्ते में 3-3 दिन दोनों पत्नियों के साथ रहना होगा और 7वें दिन अपनी मर्जी से रहने की छूट मिलेगी, साथ ही पहली पत्नी को मासिक राशन और ₹500 साप्ताहिक खर्च देना भी अनिवार्य किया गया है.
14 साल पुरानी पहली शादी, फिर हुई दूसरी पत्नी की एंट्री
रामपुर जिले के दढ़ियाल क्षेत्र के रहने वाले एक युवक ने 14 साल पहले पहली शादी की थी और सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन इसके 10 साल बाद उसने दूसरी शादी रचा ली. दोनों पत्नियों से उसकी दो-दो बेटियां भी हुईं, लेकिन असली विवाद तब शुरू हुआ जब पहली पत्नी ने आरोप लगाया कि पति दूसरी शादी के बाद उसे और बेटियों को पूरी तरह भूल चुका है तथा न तो घर का खर्च उठा रहा है और न ही परिवार को समय दे रहा है.
पुलिस चौकी से सीधे पंचों के दरबार में पहुंचा ‘पति देव’ का केस
पति की इस अनदेखी से तंग आकर पहली पत्नी ने आखिरकार दढ़ियाल पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज कराई. मामला कानूनी पचड़े में फंसता देख गांव के जिम्मेदार लोग आगे आए और दोनों पक्षों को बैठाकर पंचायत बुलाई. कई घंटों तक चली मैराथन बैठक के बाद पंचों ने पाया कि दोनों पत्नियों के विवाद का सबसे बुरा असर चारों मासूम बेटियों पर पड़ रहा है, इसलिए परिवार को टूटने से बचाने के लिए एक अनोखा बीच का रास्ता निकालना बेहद जरूरी हो गया था.
3-3 दिन का बंटा साथ और 7वें दिन मिली मनमर्जी की ‘आजादी’
लंबी चर्चा के बाद पंचों ने आपसी सहमति से पति के रहने और खर्च का ऐसा वीकली शेड्यूल बनाया जिसे सुनकर हर कोई दंग रह गया. पंचायत के फरमान के मुताबिक पति को पहली पत्नी के घर हर महीने पूरा राशन पहुंचाना होगा और उनके रोजमर्रा के खर्च के लिए प्रति सप्ताह ₹500 नगद देने होंगे. इसके अलावा पति सप्ताह के 3 दिन पहली पत्नी और 3 दिन दूसरी पत्नी के साथ रहेगा, जबकि हफ्ते के 7वें दिन वह अपनी मर्जी से किसी भी पत्नी के साथ रहने के लिए पूरी तरह आजाद रहेगा.
इलाके में बना चर्चा का विषय, कानूनी मान्यता पर उठे सवाल
पंचायत के इस अनूठे समझौते पर तीनों पक्षों ने फिलहाल सहमति जता दी है और यह फैसला पूरे इलाके सहित सोशल मीडिया पर गजब का टॉपिक बना हुआ है. हालांकि यह केवल गांव के स्तर पर किया गया एक अनौपचारिक समझौता है और इसे किसी भी अदालत का कानूनी आदेश नहीं माना जाता, ऐसे में अब देखना यह होगा कि पंचायत का यह 3-3 दिन वाला अनूठा फॉर्मूला आखिर कब तक टिक पाता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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