ममता बनर्जी. वही ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) जो इस समय पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं. वही ममता बनर्जी जो बिल्कुल ही साधारण सफेद साड़ी में अक्सर नजर आती हैं. वही ममता बनर्जी जो कि आपको साधरण हवाई चप्पलों में कभी भी नजर आ जाएंगी. वही ममता बनर्जी जिन्हें भद्र लोक (पश्चिम बंगाल) के लोग बहुत ही नेकनीयत और खरा मानते हैं. लेकिन, बस एक झटका. बस एक झटका ऐसा लगा कि भद्र लोक में रह रहे इंसानों की तंद्रा टूट गई.
घेरे में आई ईमानदारी
निष्पक्ष और ईमानदारी के आवरण में घिरी ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) बस एक आघात में ही टूट कर चकनाचूर हो गई. भद्र लोक के मानुष अपने आंखों के सामने उस मंजर को देखा कि कैसे अपनेपन के मोह में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) टूट सकती हैं. भद्र मानुषों ने यह भी देखा कि बस एक एक्शन और ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की साफ-सुथरी छवि सवालों के घेरे में आ गई.
ईमानदारी के मोती धरातल पर धरासाई
भारत भर के लोगों ने देखा कि ईमानदारी के धागे में गुंधी हुई ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की मणी पलक झपकते ही धरातल पर धरासाई हो गया. ईमानदारी वाली ये मणी धरातल पर मात्र एक एक्शन होते ही यहां-वहां चारो तरफ बिखरने लगा. इससे पहले की हम आपको मूल खबर पर लिए चलें उससे पहले हम बताते हैं ममता का पर्यायवाची. ममता का पर्यायवाची वात्सल्य भी होता है और वात्सल्य का एक अर्थ होता है लगाव.
प्राइवेट कंपनी के लिए दिखा लगाव
ममता बनर्जी का यह लगाव दिखा एक प्राइवेट कंपनी के लिए. और यही लगाव भद्र लोक में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के उस चेहरे को उजागर कर दिया जिस पर ईमानदारी का छद्म परदा डला हुआ था. यानी कि आईपैक कंपनी पर ED की कार्रवाई ने ममता बनर्जी को विचलित कर दिया. आईपैक पर ED के छापे की खबर सुनते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बदहवास भागते हुए वहां पहुंची. एक राज्य की मुख्यमंत्री अपने सारे जरूरी काम को दरकिनार कर पहुंच गई पॉलिटिकल कंसल्टेंट कंपनी आईपैक के दफ्तर. और भिड़ गई ED के अधिकारियों से.
ED से छीनीं आईपैक की फाइलें
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की न सिर्फ भिड़ने की खबर आई बल्कि यह भी खबरें आई कि उन्होंने ED के अधिकारियों से आईपैक कंपनी की फाईलें छीनीं. अब सोशल मीडिया पर इस बात की चर्चा है कि जिन फाइलों को मुख्यमंत्री ने छीना उसमें थे काले कारनामे. इन फाइलों को लेकर कोई कह रहा है कि उसमें मुख्यमंत्री के काले कारनामे थे तो कोई कह रहा है कि उसमें थे आईपैक के अनैतिक कार्य.
बंगाल की राजनीति में ये शेर है फिट
लेकिन, लोगों ने जो देखा और कहा उनके मुताबिक ये शेर आज बंगाल की राजनीति में फिट बैठता है. नए किरदार आते जा रहे हैं, मगर नाटक पुराना चल रहा है. वही दुनिया वही सांसें वही हम, वही सब कुछ पुराना चल रहा है. राहत इंदौरी के इस शेर को लोग इसलिए याद कर रहे हैं कि जब वाम दलों ने कांग्रेस से सत्ता छीनने की शुरुआत की थी तब सूबे का सियासी पारा कुछ इस तरह से ही चढ़ने लगा था.
कांग्रेस-वाम का घमासान
लोग याद कर रहे हैं उस दौर को भी जब ममता बनर्जी की पार्टी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने वाम दलों से सत्ता छीनी थी. और आज जब बीजेपी राज्य की सत्ता पर काबिज होना चाहती है तो कमोबेश वैसा ही माहौल बना हुआ है भद्र लोक यानी की पश्चिम बंगाल का. हर तरफ राजनीतिक उथल-पुथल. हर ओर कार्यकर्ताओं के बीच घमासान और हर ओर नेताओं की तू-तू, मैं-मैं.
TMC-BJP के बीच तकरार
राज्य की राजनीति में टीएमसी हर हाल में सत्ता में आने की जुगत में जुटी हुई है. वहीं, प्रदेश की सियासत में मुख्य विपक्षी दल के रूप में बैठी बीजेपी हर संभव कोशिश में है कि ममता बनर्जी को उखाड़ फेंका जाए. बीजेपी चाहती है कि ऐन केन प्रकारेण राज्य के मतदाताओं को अपने पाले में वोट दिलवाया जाए.
राज्य में रैलियों का दौर शुरू
ऐसे में माना जा रहा है कि चुनाव घोषणा के पूर्व वोटरों को लुभाने के लिए ममता बनर्जी अपने राज्य के राजस्व का मुंह पूरी तरह से खोल सकती है. वहीं केंद्र में बैठी बीजेपी नीत सरकार भी हर संभव कोशिश में है कि किसी भी तरह से वोटरों को अपने पाले में किया जाए. दोनों दलों की ओर से बैठकों और रैलियों का दौर शुरू हो चुका है.
भरोसा किस पर- तीन पत्ती या कमल का फूल
हालांकि टीएमसी के नेता अभी के मौजूदा हालात को देखते हुए राहत इंदौरी का शेर गुनगुना रहे हैं- मिरी गुम-गश्तगी पर हँसने वालो, मिरे पीछे ज़माना चल रहा है. वहीं बीजेपी के कार्यकर्ता और नेता राहत इंदौरी के इस शेर को गाते फिर रहे हैं- वही महशर वही मिलने का वा’दा, वही बूढ़ा बहाना चल रहा है. अब देखना ये बड़ा दिलचस्प होगा कि भद्र लोक के निर्णायक मानुष तीन पत्ती पर फिर से भरोसा जताते हैं या कमल के फूल से अपने घरों को सजाते हैं.
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