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PM मोदी-अमित शाह का ‘समाधान’ सिद्धांत रंग लाया, देश से नक्सलवाद कुचला गया, शांति और समृद्धि की हुई नई शुरुआत

SAMADHAN Strategy: इस साल मई का महीना भारत के लिए काफी अच्‍छा रहा. नक्सलवाद, जो दशकों से देश की आंतरिक सुरक्षा और विकास के लिए सबसे बड़ा खतरा बना हुआ था, अब अपने अंत की ओर बढ़ रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की जोड़ी ने लंबे समय से चली आ रही इस चुनौती को खत्म करने के लिए एक अभूतपूर्व रणनीति अपनाई. जहां पहले की सरकारें इस मुद्दे पर असमंजस में रहती थीं और आधे-अधूरे उपाय करती थीं, वहीं वर्तमान नेतृत्व ने स्पष्टता और दृढ़ता के साथ नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ने का संकल्प लिया है.

इस साल अब तक 300 से अधिक नक्सलियों को मार गिराया गया है, जिसमें हाल ही में छत्तीसगढ़ में नंबाला केशव राव उर्फ बसवराज की मौत ने नक्सलवाद को गहरा झटका दिया है.

समाधान: बहुआयामी रणनीति

मोदी-शाह की जोड़ी ने नक्सलवाद को खत्म करने के लिए ‘समाधान’ सिद्धांत को अपनाया, जिसमें स्मार्ट लीडरशिप, आक्रामक रणनीति, प्रेरणा और प्रशिक्षण, कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी, तकनीक का उपयोग, और वित्तीय संसाधनों तक नक्सलियों की पहुंच को रोकना शामिल है. इस रणनीति के तहत सुरक्षा बलों ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत की है.

छत्तीसगढ़, झारखंड और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में नक्सल हिंसा की घटनाओं में 53% की कमी आई है, और मौतों की संख्या में 70% की गिरावट दर्ज की गई है. यह आंकड़े सरकार की सफलता की कहानी बयां करते हैं. हालांकि, यह जीत केवल सैन्य स्तर पर नहीं है; यह भारतीय लोकतंत्र की जीत है, जो राज्य की वैधता और शांति की स्थापना का प्रतीक है.

विकास और पुनर्वास का संतुलन

नक्सलवाद के खिलाफ इस लड़ाई में सरकार ने सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ विकास और पुनर्वास पर भी जोर दिया है. छत्तीसगढ़ के बस्तर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 9,000 से अधिक घर बनाए गए हैं, जिससे हिंसा से प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक जीवन मिला है. शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कल्याणकारी योजनाओं को पूरी तरह लागू किया गया है.

इसके अलावा, 2024 में छत्तीसगढ़ में 880 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जिसमें पिछले तीन महीनों में 521 शामिल हैं. सरकार की नई आत्मसमर्पण नीति, जो वित्तीय सहायता और नौकरियों का वादा करती है, ने कई नक्सलियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया है. जयमती बंजम और धनंजय जैसे पूर्व नक्सलियों की कहानियां इस नीति की सफलता को दर्शाती हैं.

शांति और समृद्धि की नई शुरुआत

नक्सलवाद का अंत न केवल एक सैन्य जीत है, बल्कि यह उन क्षेत्रों के लिए एक नई शुरुआत है, जो लंबे समय से हिंसा और अविकास की छाया में थे. गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है, और मौजूदा प्रगति को देखते हुए यह लक्ष्य हासिल करना संभव लगता है. यह अभियान भारत के उन क्षेत्रों में शांति और समृद्धि लाने का वादा करता है, जो कभी ‘रेड कॉरिडोर’ के नाम से कुख्यात थे. यह भारत की एकता, लोकतंत्र और विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है.

Bharat Express Desk

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