Halwa Ceremony Budget 2025: भारतीय परंपरा में कोई भी शुभ काम मीठा खाकर शुरू करने की मान्यता है. जैसे किसी नए काम की शुरुआत में दही-चीनी खाना अच्छी किस्मत और सफलता का प्रतीक माना जाता है, वैसे ही वित्त मंत्रालय में भी एक खास परंपरा निभाई जाती है. हर साल बजट पेश करने से पहले, वित्त मंत्रालय में हलवा सेरेमनी का आयोजन किया जाता है. लेकिन यह सेरेमनी क्या होती है और इसका क्या महत्व है?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2025 को केंद्रीय बजट पेश करेंगी. यह मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का दूसरा बजट होगा और निर्मला सीतारमण का लगातार आठवां बजट, जिसमें एक अंतरिम बजट भी शामिल है.
क्या है हलवा सेरेमनी?
हलवा सेरेमनी वित्त मंत्रालय की एक परंपरा है, जिसे बजट पेश होने से पहले आयोजित किया जाता है. यह सेरेमनी बजट की छपाई शुरू होने का प्रतीक होती है. यह आयोजन दिल्ली स्थित नॉर्थ ब्लॉक (वित्त मंत्रालय) के बेसमेंट में होता है, जहां बजट की छपाई के लिए विशेष प्रिंटिंग प्रेस मौजूद है.
इस दौरान, विशाल कढ़ाही में हलवा बनाया जाता है और वित्त मंत्रालय के कर्मचारियों को परोसा जाता है. परंपरा के अनुसार, वित्त मंत्री खुद कढ़ाही में हलवा चलाकर इस प्रक्रिया की शुरुआत करते हैं.
हलवा सेरेमनी का महत्व
यह सेरेमनी सिर्फ एक परंपरा या उत्सव नहीं, बल्कि बजट निर्माण प्रक्रिया के अंतिम चरण का संकेत भी है.
बजट दस्तावेजों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए, हलवा सेरेमनी के बाद बजट से जुड़ी टीम को बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग-थलग (क्वारंटाइन) कर दिया जाता है. वित्त मंत्रालय के नॉर्थ ब्लॉक का बेसमेंट एक किले में तब्दील हो जाता है, जिससे किसी भी जानकारी के लीक होने की संभावना न रहे.
करीब 9-10 दिनों तक वित्त मंत्रालय के अधिकारी और कर्मचारी जो बजट बनाने और छापने की प्रक्रिया में शामिल होते हैं, बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट जाते हैं. इस दौरान वे अपने परिवार से भी सीधे संपर्क नहीं कर सकते. यदि किसी आपात स्थिति में परिवार को कोई संदेश देना हो, तो इसके लिए एक विशेष नंबर दिया जाता है, लेकिन सीधी बातचीत की अनुमति नहीं होती.
हलवा सेरेमनी का इतिहास
हलवा सेरेमनी केंद्रीय बजट की परंपरा का एक अहम हिस्सा रहा है. इस सेरेमनी की शुरुआत 1950 में हुए बजट लीक के बाद हुई, जब बजट की अहम जानकारी आधिकारिक रूप से पेश होने से पहले ही लीक हो गई थी.
इस घटना के बाद, सरकार ने बजट को सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ा फैसला लिया. पहले, बजट की छपाई राष्ट्रपति भवन में होती थी, लेकिन 1950 के बाद इसे मिंटो रोड स्थित एक सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया गया. इसके बाद, सरकार ने 1980 में इसे नॉर्थ ब्लॉक (वित्त मंत्रालय) के बेसमेंट में हमेशा के लिए से शिफ्ट कर दिया.
इसी के साथ हलवा सेरेमनी का महत्व और बढ़ गया. यह सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि बजट की गोपनीयता की अंतिम प्रक्रिया का संकेत बन गई. जब वित्त मंत्री हलवा चलाते/चलाती हैं, तो यह इस बात का प्रतीक होता है कि अब बजट पूरी तरह सील कर दिया गया है और इसकी जानकारी बजट पेश होने तक किसी के सामने नहीं आएगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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