ओडिशा की पावन धरती से आज भारत के औद्योगिक इतिहास का एक नया स्वर्णिम अध्याय शुरू हो गया है. मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और उद्योग मंत्री संपद चरण स्वाइन की उपस्थिति में अडाणी समूह ने राज्य के विकास को एक नई और वैश्विक उड़ान देने के लिए एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. कुरुक्षेत्र से लेकर सुदूर पूर्व तक फैले भारत के आर्थिक मानचित्र में ओडिशा अब कच्चे माल के आपूर्तिकर्ता से बदलकर एक वैश्विक ‘वैल्यू-एडेड मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनने की राह पर तेजी से कदम बढ़ा चुका है.
इस ऐतिहासिक अवसर पर अडाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड के प्रबंध निदेशक करण अडाणी ने भुवनेश्वर में आयोजित समारोह में दुनिया के सबसे बड़े एल्युमीनियम इकोसिस्टम प्रोजेक्ट्स में से एक का आधिकारिक एलान किया. अडाणी समूह ने IHC अबू धाबी के साथ मिलकर ओडिशा में 11.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर (यानी करीब ₹1.08 लाख करोड़) के निवेश की बिसात बिछाई है, जो न केवल पूर्वी भारत के आर्थिक भूगोल को बदल देगा, बल्कि साल 2047 तक ‘विकसित भारत’ के संकल्प की मजबूत आधारशिला बनेगा.
क्या है अडाणी ग्रुप का पूरा विजन?
यह मेगा प्रोजेक्ट वैश्विक स्तर पर अपनी तरह का सबसे बड़ा और गहराई से प्रभाव डालने वाला एल्युमीनियम वैल्यू चेन इकोसिस्टम है. करण अडाणी के संबोधन के अनुसार, सांख्यिकी के आंकड़ों से अलग यह परियोजना नए औद्योगिक भविष्य की मजबूत नींव रखेगी.
- लगभग 4 मिलियन टन क्षमता की एक विशाल एलुमिना रिफाइनरी स्थापित की जाएगी
- करीब 2 मिलियन टन उत्पादन क्षमता वाला एक अत्याधुनिक एल्युमीनियम स्मेल्टर तैयार होगा
- स्थानीय उद्यमियों और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सालाना 1 मिलियन टन क्षमता का डाउनस्ट्रीम एल्युमीनियम पार्क बनेगा
- चौबीसों घंटे बिजली देने के लिए लगभग 4,000 मेगावाट (MW) कैप्टिव पावर की व्यवस्था होगी
- पर्यावरण संतुलन के लिए 400 मेगावाट (MW) का विशेष ग्रीन एनर्जी कंपोनेंट भी शामिल किया गया है
युवाओं को मिलेंगे नौकरी के अवसर
इस निवेश का सबसे बड़ा और सीधा लाभ ओडिशा के स्थानीय युवाओं और परिवारों को मिलने जा रहा है. आंकड़ों के पीछे छिपे मानवीय सपनों को रेखांकित करते हुए करण अडाणी ने स्पष्ट किया कि इस मेगा प्रोजेक्ट के जरिए राज्य में रोजगार की अभूतपूर्व बहार आने वाली है. इस MoU पर करण अडानी ने कहा कि
‘इन संख्याओं के पीछे केवल आंकड़े नहीं, बल्कि एक-एक परिवार का सपना, युवाओं का कौशल विकास, छोटे स्थानीय व्यवसायों को मिलने वाले ऑर्डर्स और स्थानीय उद्यमियों के लिए एक बड़ा वैश्विक बाजार छिपा हुआ है. यह प्रोजेक्ट ओडिशा के बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए है.’
- प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य के दौरान लगभग 35,000 नौकरियों के अवसर पैदा होंगे
- परियोजना के पूरी तरह चालू होने के बाद स्थाई संचालन के दौरान करीब 18,500 लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा
खनिजों की खान से ‘समृद्ध ओडिशा 2036’ का सफर
ओडिशा प्राकृतिक रूप से भारत की सबसे समृद्ध खनिज भूमि है, जिसके पास देश का सबसे बड़ा बॉक्साइट रिजर्व, 50% से अधिक लौह अयस्क (Iron Ore) का भंडार और प्रचुर मात्रा में कोयला, मैंगनीज, क्रोमाइट और डोलोमाइट का खजाना मौजूद है. अडाणी समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी के विजन को साझा करते हुए करण अडाणी ने कहा कि वे ओडिशा को केवल पूर्वी भारत के एक राज्य के रूप में नहीं, बल्कि भारत के आर्थिक विकास के धड़कते हुए दिल (Heart of Eastern India) के रूप में देखते हैं.
ये भी पढ़ें: ‘बात तो होगी मगर…’, BJP सांसद गुलाम अली खटाना ने बताया कब होगा पाकिस्तान से संवाद?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत @2047’ के राष्ट्रीय मिशन को साकार करणे के लिए ‘समृद्ध ओडिशा @2036’ (ओडिशा के गठन के 100 वर्ष) का लक्ष्य पाना अनिवार्य है. यह प्रोजेक्ट ओडिशा के खनिजों की यहीं पर वैल्यू-एडिशन करके उसे दुनिया भर के बाजारों में निर्यात करणे का मार्ग प्रशस्त करेगा, जिससे राज्य के राजस्व और वैश्विक साख में ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज होगी.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.
