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अइज़ोल बना रेल नेटवर्क से जुड़ने वाला चौथा पूर्वोत्तर राजधानी शहर, ट्रायल रन सफल

मिजोरम की राजधानी अइज़ोल अब राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जुड़ गई है. बैराबी-सैरांग रेल लाइन की सफलता के साथ अइज़ोल पूर्वोत्तर की चौथी राजधानी बन गई है जो ट्रेन सेवा से जुड़ी है.

Indian Railways
Prashant Rai Edited by Prashant Rai

पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है. मिजोरम की राजधानी अइज़ोल अब भारतीय रेलवे नेटवर्क से जुड़ गई है. बैराबी से सैरांग तक बनी नई रेलवे लाइन के माध्यम से यह कनेक्शन स्थापित हुआ है. यह परियोजना मिजोरम के लिए ऐतिहासिक है और राज्य को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी.

अब तक मिजोरम में रेलवे की पहुंच केवल कोलासिब ज़िले के बैराबी स्टेशन तक ही सीमित थी, जो असम की सीमा के पास स्थित है. लेकिन अब सैरांग, जो अइज़ोल से लगभग 20 किलोमीटर दूर एक उपनगर है, तक रेलवे लाइन पहुंच चुकी है. यह लाइन राज्य की राजधानी तक यात्री और माल गाड़ियों के संचालन का मार्ग प्रशस्त करेगी.

रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी है कि इस परियोजना का औपचारिक उद्घाटन जून 17 के बाद किया जाएगा. उन्होंने बताया कि रेलवे सुरक्षा आयोग (CRS) इस सप्ताह निरीक्षण करेगा. निरीक्षण की प्रक्रिया पूरी होते ही ट्रेन संचालन की शुरुआत संभव होगी. फिलहाल लाइन का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है और केवल कुछ छोटे कार्य बाकी हैं.

1 मई को नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे (NFR) ने इस लाइन पर सैरांग तक पहली सफल ट्रायल रन भी पूरी की, जिसे मिजोरम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन के रूप में देखा जा रहा है. इस नई उपलब्धि के साथ मिजोरम, असम, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश के बाद पूर्वोत्तर भारत का चौथा राज्य बन गया है जिसकी राजधानी शहर रेलवे नेटवर्क से जुड़ चुका है.

बैराबी–सैरांग नई रेलवे लाइन कुल 51.38 किलोमीटर लंबी है और इसकी संशोधित लागत ₹5,021.45 करोड़ है. परियोजना की भौतिक प्रगति 94.52% और वित्तीय प्रगति 97.13% दर्ज की गई है. यह लाइन चार खंडों में विभाजित है: बैराबी–होर्टोकी (16.72 किमी), होर्टोकी–काउनपुई (9.71 किमी), काउनपुई–मुअलखांग (12.11 किमी), और मुअलखांग–सैरांग (12.84 किमी). इनमें से पहला खंड जुलाई 2024 में शुरू हो चुका है, बाकी खंडों के जून 2025 तक चालू होने की संभावना है.

इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी चुनौती मिजोरम का दुर्गम भू-भाग रहा. पूरी परियोजना में 48 सुरंगें, 55 बड़े पुल, 87 छोटे पुल, 5 रोड ओवर ब्रिज और 6 रोड अंडर ब्रिज शामिल हैं. सबसे ऊंचा ब्रिज नंबर 196, जिसकी ऊंचाई 104 मीटर है, वो कुतुब मीनार से भी 32 मीटर ऊंचा है.

यह परियोजना केंद्र सरकार के उस विशेष अभियान का हिस्सा है जिसके तहत पूर्वोत्तर राज्यों की सभी राजधानियों को रेलवे से जोड़ा जाना है. इसी योजना के अंतर्गत कई अन्य नई रेलवे लाइनों और डबलिंग प्रोजेक्ट्स पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है.

अन्य प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं:

धनसिरी–जुबजा (कोहिमा, नागालैंड): 82.5 किमी लंबी लाइन जिसकी लागत ₹6,663.20 करोड़ है. यह दिसंबर 2029 तक पूरी होगी.

मुरकोंगसेलेक–पासीघाट (अरुणाचल प्रदेश): 26.15 किमी की यह लाइन फरवरी 2026 तक तैयार होगी. लागत ₹414.84 करोड़.

सिवोक–रंगपो (सिक्किम): 45 किमी लंबी यह परियोजना दिसंबर 2027 तक पूरी होगी. लागत ₹7,876.92 करोड़.

जिरीबाम–इम्फाल (मणिपुर): 111 किमी लंबी यह लाइन ₹14,322.79 करोड़ की लागत से बन रही है, जिसमें 91% कार्य पूरा हो चुका है.

असम में रेलवे डबलिंग परियोजनाएं भी तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं. अगठोरी–कामाख्या डबलिंग प्रोजेक्ट, जिसमें नया रेल-कम-रोड पुल भी शामिल है, दिसंबर 2029 तक तैयार होगा. वहीं, न्यू बोंगाईगांव–रंगिया–अगठोरी और न्यू बोंगाईगांव–गोलपाड़ा–कामाख्या परियोजनाएं क्रमशः अक्टूबर 2024 में शुरू हो चुकी हैं और मार्च 2027 तक पूरी होने की उम्मीद है.

19 मार्च 2024 को लोकसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, पूर्वोत्तर में फिलहाल 1,368 किलोमीटर लंबाई वाली कुल 18 रेलवे परियोजनाएं (13 नई लाइन और 5 डबलिंग) प्रगति पर हैं, जिनकी कुल लागत ₹74,972 करोड़ है. अब तक 313 किलोमीटर ट्रैक का संचालन शुरू हो चुका है और ₹40,549 करोड़ की राशि खर्च की जा चुकी है.

पिछले तीन वर्षों (2021-22 से 2024-25) में, रेलवे मंत्रालय ने पूर्वोत्तर में कुल 2,499 किलोमीटर लंबाई के 21 नए सर्वेक्षण (17 नई लाइन और 4 डबलिंग) स्वीकृत किए हैं. वहीं 2025-26 के लिए ₹10,440 करोड़ का बजट आवंटन किया गया है.

अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत भी पूर्वोत्तर क्षेत्र को बड़े स्तर पर शामिल किया गया है. सैरांग, इम्फाल, दीमापुर, नाहरलागुन, रंगपो, और त्रिपुरा के कई स्टेशन, इसके अलावा असम के 50 स्टेशनों को आधुनिक बनाया जाएगा. इन स्टेशनों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस किया जाएगा.

वर्तमान में, गुवाहाटी और न्यू जलपाईगुड़ी के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस चलाई जा रही है. साथ ही, दो नई अमृत भारत ट्रेनें भी पूर्वोत्तर के लिए प्रस्तावित हैं.

-भारत एक्सप्रेस



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