GST Rate Cut on Cement: अपने सपनों का घर बनाने या खरीदने की लागत जल्द ही कम हो सकती है, क्योंकि सरकार ने कल 56वीं जीएसटी परिषद की बैठक में सीमेंट पर जीएसटी को 28% से घटाकर 18% करने का फैसला किया है. जीएसटी अधिसूचना के अनुसार, “पोर्टलैंड सीमेंट, एल्युमिनस सीमेंट, स्लैग सीमेंट, सुपर सल्फेट सीमेंट और इसी तरह के हाइड्रोलिक सीमेंट, चाहे वे रंगीन हों या क्लिंकर के रूप में हों,” पर जीएसटी दर 22 सितंबर, 2025 से 28% से घटकर 18% हो जाएगी.
सीमेंट कंपनियां इस लाभ का कितना और कब देगी लाभ?
हालांकि, घर खरीदारों के लिए वास्तविक बचत इस बात पर निर्भर करेगी कि सीमेंट कंपनियां इस लाभ का कितना और कब लाभ देती हैं. जैसा कि इक्रा लिमिटेड की उपाध्यक्ष और सह-समूह प्रमुख, अनुपमा रेड्डी बताती हैं, “सीमेंट पर जीएसटी को 28% से घटाकर 18% करने के सरकार के फैसले से ग्रामीण आवास क्षेत्र को प्रमुख लाभ होगा, क्योंकि इस कर कटौती से कुल निर्माण खर्च में 0.8%-1.0% की कमी आएगी. 26-28 रुपये प्रति बैग का मूल्य लाभ खुदरा ग्राहकों को हस्तांतरित किया जाएगा, जिससे सीमेंट निर्माताओं की लाभप्रदता पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा.”
जैसा कि रेड्डी आगे बताती हैं, विशेष रूप से ग्रामीण आवास में, कुल निर्माण लागत में सीमेंट का योगदान लगभग 10-12% होता है.
एमएनबी बिल्डफैब के प्रबंध निदेशक, नकुल बजाज भी इस बात से सहमत हैं और कहते हैं कि सीमेंट निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण सामग्री में से एक है, और इस युक्तिकरण से कुल परियोजना लागत में 5-7% की कमी आने की उम्मीद है, जो कि किफायती और मध्यम आय वर्ग की आवास परियोजनाओं के लिए विशेष रूप से प्रभावशाली है.
सीमेंट पर जीएसटी में कमी से आवास लागत कैसे कम होगी?
सीमेंट पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% करने से, सीमेंट के प्रति बैग की कुल कर-पश्चात लागत कम हो जाएगी, जिससे बिल्डरों की कुल निर्माण लागत कम हो जाएगी. अगर डेवलपर्स इस कर लाभ को आगे बढ़ाते हैं, तो घरों की प्रति वर्ग फुट कीमतें कम हो सकती हैं. विशेषज्ञों का सुझाव है कि कम निर्माण लागत का मतलब है कि उपभोक्ताओं के लिए कीमतों में तुरंत सुधार या अधिक आकर्षक प्री-लॉन्च ऑफर. इसके अलावा, अगर कोई व्यक्ति निर्माणाधीन घर बना रहा है, तो प्रत्येक सीमेंट बैग पर कम जीएसटी के रूप में और इसलिए, कच्चे माल के रूप में सस्ता सीमेंट मिलने का लाभ सीधे उनकी जेब में जाएगा.
सीए सिद्धार्थ सुराना कहते हैं, “जहाँ ज़्यादातर रियल एस्टेट डेवलपर्स इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के बिना 5% जीएसटी योजना का विकल्प चुनते हैं, और बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं का एक बड़ा हिस्सा छूट प्राप्त है या आईटीसी का दावा नहीं करता है, वहीं सीमेंट सबसे बड़े लागत कारकों में से एक बना हुआ है.” “इसलिए यह दर कटौती सिर्फ़ कर राहत से कहीं बढ़कर है—इसका सीधा असर परियोजना लागत में कमी और नकदी प्रवाह में सुधार के रूप में सामने आता है, और आवास की सामर्थ्य तथा बुनियादी ढाँचे के विकास को मज़बूत बढ़ावा देता है,” वे आगे कहते हैं.
बिल्डरों के लिए कम परियोजना लागत से नए घरों की लागत कम होने की संभावना है. कोलियर्स इंडिया के वरिष्ठ निदेशक और अनुसंधान प्रमुख विमल नादर कहते हैं, “सीमेंट पर जीएसटी में कटौती परियोजना लागत ढाँचे को बदलने में अहम भूमिका निभाएगी, क्योंकि सीमेंट निर्माण की कुल लागत का एक प्रमुख घटक है. आवासीय अचल संपत्ति, विशेष रूप से नए घर खरीदारों को लाभ होगा क्योंकि डेवलपर्स कम लागत का लाभ आवास की कम कीमतों के रूप में उन्हें दे सकते हैं.”
इस कदम का किफायती आवास पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
ANAROCK के शोध के अनुसार, किफायती आवास श्रेणी (जिसमें 45 लाख रुपये से कम कीमत वाली संपत्तियाँ शामिल हैं) की कुल बिक्री में हिस्सेदारी 2019 के 38% से घटकर 2024 में केवल 18% रह गई है. अगर जीएसटी दर में इस कटौती का असर घरों की कीमतों में कमी के रूप में देखा जाए, तो नए घर घर खरीदारों के लिए ज़्यादा किफ़ायती हो जाएँगे. शोध में आगे कहा गया है, “नई आपूर्ति का हिस्सा 2019 के 40% से और भी ज़्यादा नाटकीय रूप से घटकर 2025 की पहली छमाही में सिर्फ़ 12% रह गया. अगर निर्माण लागत में आई कमी का बोझ घर खरीदारों पर डाला जाए, तो इन क्षेत्रों में माँग बढ़ सकती है. भारत के शहरी बाज़ारों में इस समय लगभग 1 करोड़ बजट घरों की कमी है, और इस तरह के हस्तक्षेप इस अंतर को पाटने में मदद कर सकते हैं.”
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-भारत एक्सप्रेस
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