US Iran War Impact Condom Market: जब दो देशों के बीच युद्ध होता है, तो अक्सर पेट्रोल, डीजल या खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने की बात होती है. लेकिन ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव ने इस बार सीधे आम इंसान के बेडरूम में दस्तक दे दी है. दुनिया की सबसे बड़ी कंडोम निर्माता कंपनी ‘कारेक्स’ (Karex) के सीईओ ने चेतावनी दी है कि वैश्विक सप्लाई चेन बिगड़ने के कारण कंडोम की कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी हो सकती है. यह खबर न केवल ग्राहकों की जेब पर असर डालेगी, बल्कि वैश्विक बाजार में एक बड़े संकट की ओर भी इशारा कर रही है.
कच्चे माल की कीमतों में बेतहाशा उछाल (Condom price hike By US Iran War)
कंपनी के सीईओ गो मिया कियाट (Goh Miah Kiat) ने स्पष्ट किया कि मध्य पूर्व में जारी तनाव की वजह से ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल का प्रवाह बुरी तरह प्रभावित हुआ है. फरवरी के अंत में संघर्ष शुरू होने के बाद से ही कंडोम बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की लागत आसमान छू रही है.
- सिलिकॉन ऑयल की कीमत करीब 30% तक बढ़ गई है
- नाइट्राइल लेटेक्स के दाम लगभग दोगुने हो चुके हैं
- नेचुरल रबर की कीमत में जनवरी से अब तक एक-तिहाई (33%) का इजाफा हुआ है
- इसके अलावा, पैकेजिंग में उपयोग होने वाली एल्युमिनियम फॉयल भी काफी महंगी हो गई है
शिपिंग और सप्लाई चेन में भयंकर संकट (Condom Global supply chain)
युद्ध की वजह से समुद्री रास्ते असुरक्षित हो गए हैं, जिससे जहाजों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है. जो माल पहले एक महीने में यूरोप और अमेरिका पहुंच जाता था, उसे अब वहां तक पहुंचने में दो महीने लग रहे हैं. सीईओ गोह ने कहा, “वर्तमान स्थिति निश्चित रूप से बहुत नाजुक है और कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. हमारे पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है और हमें बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालना ही होगा.”
दिग्गज ब्रांड्स पर पड़ेगा सीधा असर
मलेशिया स्थित कारेक्स कंपनी हर साल लगभग 5 अरब से ज्यादा कंडोम का उत्पादन करती है. यह कंपनी दुनिया के सबसे मशहूर ब्रांड्स जैसे ‘ड्यूरेक्स’ (Durex) और ‘ट्रोजन’ (Trojan) की प्रमुख सप्लायर है. इसके अलावा, यह ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) और संयुक्त राष्ट्र (UN) के वैश्विक सहायता कार्यक्रमों को भी आपूर्ति करती है. इसका सीधा मतलब है कि आने वाले दिनों में ग्राहकों को इन प्रोडक्ट्स के लिए ज्यादा पैसे चुकाने होंगे.
इस संकट के बीच एक चौंकाने वाला ट्रेंड यह भी है कि इस साल कंडोम की वैश्विक मांग में करीब 30 प्रतिशत का भारी उछाल आया है. अर्थशास्त्र के नजरिए से युद्ध या आर्थिक मंदी के दौरान लोग अक्सर भविष्य के अनचाहे खर्चों को रोकने के लिए परिवार नियोजन को लेकर ज्यादा गंभीर हो जाते हैं. सीईओ ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो बाजार में न केवल कीमतें और बढ़ेंगी, बल्कि कंडोम की भारी किल्लत (Shortage) भी देखने को मिल सकती है.
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