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ब्रेंट क्रूड पहुंचा 114 डॉलर के पार, क्या आम आदमी की जेब पर पड़ेगी भारी मार?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने और शेयर बाजार में गिरावट के बीच, क्या महंगे कच्चे तेल से देश में महंगाई बढ़ेगी और आम आदमी की जेब पर असर पड़ेगा?

Crude Oil Price Hike Brent Crude 114 Dollars India Inflation Impact

Crude Oil Price Hike:

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आया बेतहाशा उछाल अब देश के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. ब्रेंट क्रूड के दाम उछलकर करीब 114 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंचे हैं, जिसका सीधा असर हमारे शेयर बाजार पर भी साफ दिखने लगा है. बीते 23 अक्टूबर को सेंसेक्स 73,123 और निफ्टी 22,600 के स्तर पर बंद हुआ. पूरे हफ्ते बाजार में गिरावट का दौर बना रहा. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस महंगे तेल की वजह से पेट्रोल-डीजल से लेकर रसोई और खाने-पीने की चीजें भी महंगी हो जाएंगी?

क्या आम आदमी तक पहुंचेगी महंगे तेल की आंच?

चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का ज्यादातर हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चा तेल महंगा होने से देश का आयात बिल सीधे तौर पर बढ़ जाता है. अगर डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर रहता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें ऐसी ही बनी रहीं, तो सरकार और देश पर आर्थिक दबाव बढ़ना तय है.

अब आम आदमी के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ेंगे? जानकारों का मानना है कि ग्लोबल मार्केट में तेजी आने के तुरंत बाद घरेलू कीमतें नहीं बढ़तीं, क्योंकि इसमें टैक्स और ऑयल कंपनियों की लागत भी जुड़ी होती है. लेकिन अगर यह तेजी लंबे समय तक खिंचती है, तो पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखना सरकार और कंपनियों के लिए बहुत मुश्किल हो जाएगा. तेल महंगा होने पर माल ढुलाई और ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ेगी, जिसका असर बाजार में बिकने वाली हर जरूरी चीज पर पड़ना लाजमी है.

रसोई और थाली पर कितना असर?

महंगे ईंधन की मार सिर्फ गाड़ियों के टैंक तक सीमित नहीं रहती. खेती में डीजल का इस्तेमाल होता है, फसलें मंडियों तक ट्रकों से पहुंचती हैं और फिर उनकी पैकेजिंग होती है. अगर ढुलाई का खर्च बढ़ेगा, तो दाल, सब्जियां और रोजमर्रा के सामान महंगे होना तय है. हालांकि, खाने-पीने की महंगाई सिर्फ तेल पर निर्भर नहीं करती, इसमें मौसम और फसलों की पैदावार का भी हाथ होता है, लेकिन महंगाई का खतरा जरूर मंडराने लगा है. फिलहाल, निवेशकों की घबराहट और महंगे तेल के दबाव के बीच देश की अर्थव्यवस्था के सामने चुनौती यही है कि विकास की रफ्तार के साथ महंगाई को कैसे काबू में रखा जाए.

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-भारत एक्सप्रेस



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