Dr Priti Adani at CHIPS 2026: भारत को सेमीकंडक्टर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए केवल उन्नत कारखाने ही नहीं, बल्कि कुशल कार्यबल और शोध-आधारित मानव प्रतिभा सबसे बड़ी पूंजी है. यह बात अदाणी यूनिवर्सिटी की प्रेसिडेंट डॉ. प्रीति अदाणी ने शनिवार को अहमदाबाद में आयोजित ‘कॉन्क्लेव ऑन हार्डवेयर, इनोवेशन, प्रोसेसिंग एंड सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजीज’ (CHIPS 2026) के उद्घाटन सत्र में कही. उन्होंने देश के सेमीकंडक्टर ईकोसिस्टम को सशक्त बनाने के लिए उद्योग जगत और अकादमिक संस्थानों के बीच गहरे समन्वय का आह्वान किया.
कॉन्क्लेव में उपस्थित उद्योगपतियों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा कि हमारी तकनीकी प्रगति का वास्तविक पैमाना यह नहीं होगा कि हमारी मशीनें कितनी बुद्धिमान बन रही हैं, बल्कि यह होगा कि हम एक बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए मानव बुद्धि (Human Intelligence) का कितनी समझदारी से विकास और उपयोग करते हैं.
नाखून से भी छोटी चिप के पीछे खड़ा है विशाल ढांचा
डॉ. प्रीति अदाणी ने रेखांकित किया कि एक सेमीकंडक्टर चिप भले ही नाखून से भी छोटी होती है, लेकिन इसके पीछे वर्षों का शोध, विशेष सामग्री, आधुनिक विनिर्माण, असाधारण परिशुद्धता और उच्च कुशल मानव संसाधन का एक विशाल तंत्र कार्य करता है.
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जो परिणाम आज स्क्रीन पर दिखाई दे रहे हैं, वे उन्नत चिप्स, डेटा सेंटर, निर्बाध बिजली आपूर्ति और कूलिंग सिस्टम के साझा तालमेल से ही संभव हैं. तकनीकी प्रगति कभी किसी एक पृथक खोज से नहीं, बल्कि कई क्षमताओं को एक साथ जोड़ने से ही साकार होती है.
100 बिलियन डॉलर का AI इन्फ्रास्ट्रक्चर विजन
अदाणी समूह के व्यापक विजन का उल्लेख करते हुए डॉ. प्रीति अदाणी ने बताया कि समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने वर्ष 2035 तक रिन्यूएबल एनर्जी से संचालित AI इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है.
विशाखापट्टनम में गूगल के साथ साझेदारी में बन रहा AI हब, हाइपरस्केलर्स और नियो क्लाउड्स इसी दिशा में बढ़ते ठोस कदम हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ (ISM) ने देश के भीतर नई ऊर्जा भरी है, जबकि गुजरात के धोलेरा और साणंद में आकार ले रही परियोजनाएं भारत की इस महत्वाकांक्षा को जमीनी रूप दे रही हैं.
अदाणी यूनिवर्सिटी का नया ग्लोबल कैंपस
डॉ. अदाणी ने स्पष्ट किया कि विश्वस्तरीय ढांचा खड़ा करने के साथ-साथ उन प्रतिभाओं को तराशना आवश्यक है जो इन प्रणालियों को समझ सकें, सवाल उठा सकें और भविष्य में इनसे बेहतर तकनीक तैयार कर सकें. अदाणी यूनिवर्सिटी अहमदाबाद में अपने आगामी बहुविषयक वैश्विक परिसर में सेमीकंडक्टर डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग की विशेषज्ञता विकसित कर रही है.
उन्होंने बताया कि युवा इंजीनियर्स के लिए विशेष डिग्री प्रोग्राम, उद्योग से जुड़े प्रोफेशनल्स के लिए एडवांस्ड एग्जीक्यूटिव एजुकेशन और फैकल्टी डेवलपमेंट पर विशेष बल दिया जा रहा है. विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल तकनीक के उपभोक्ता तैयार करना नहीं, बल्कि स्वतंत्र समस्या-समाधानकर्ता (Problem Solvers) तैयार करना है.
चिप्स 2026 में महामंथन
अदाणी यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित इस एकदिवसीय राष्ट्रीय कॉन्क्लेव में क्वालकॉम (Qualcomm), एनएक्सपी सेमीकंडक्टर्स (NXP Semiconductors), माइक्रोन टेक्नोलॉजी (Micron Technology), सिनोप्सिस (Synopsys), इन्फिनियोन टेक्नोलॉजीज (Infineon Technologies) और सिरिल अमरचंद मंगलदास के वैश्विक विशेषज्ञों ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे.
आईआईटी मंडी (IIT Mandi), वीएलएसआई सोसाइटी ऑफ इंडिया (VLSI Society of India) और गुजरात स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स मिशन (GSEM) के सहयोग से आयोजित इस कॉन्क्लेव में तीन विशेष पैनल चर्चाएं हुईं.
- भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन का भविष्य: घरेलू डिजाइन क्षमताओं को मजबूत करने पर केंद्रित
- सेमीकंडक्टर विनिर्माण: भारत के तकनीकी भविष्य को आकार देने में विनिर्माण की भूमिका
- सेमीकंडक्टर क्षेत्र में करियर के अवसर: उभरते नए रोल्स, कौशल आवश्यकताएं और करियर के रास्ते
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समारोह के समापन पर डॉ. प्रीति अदाणी ने उद्योग जगत के दिग्गजों को अपनी अनसुलझी चुनौतियां यूनिवर्सिटी की प्रयोगशालाओं में लाने का आमंत्रण दिया, ताकि नवाचार केवल कागजों तक सीमित न रहकर वास्तविक समस्याओं के समाधान का रूप ले सके.
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