Nirmala Sitharaman GST Tax Changes: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि सरकार द्वारा इस महीने की शुरुआत में लागू किए गए नए दौर के जीएसटी (GST 2.0) सुधारों ने टैक्स स्ट्रक्चर को न सिर्फ आसान बनाया है बल्कि उन पुराने विवादों को भी सुलझा दिया है, जो पिछले कई सालों से व्यवसायियों और अदालतों के बीच फंसे रहते थे.
चेन्नई सिटिज़न्स फोरम द्वारा आयोजित ‘टैक्स रिफॉर्म्स फॉर राइजिंग भारत’ कार्यक्रम में उद्योग जगत से बातचीत करते हुए सीतारमण ने कहा कि जीएसटी में सबसे बड़ी दिक्कत वर्गीकरण (classification) की थी. एक ही तरह के सामान को अलग-अलग स्लैब में रख दिया जाता था, जिससे व्यापारी और ग्राहक दोनों ही उलझन में रहते थे. व्यापारियों को यह समझ ही नहीं आता था कि कौन-सा सामान किस टैक्स दर के तहत आता है. अलग-अलग राज्यों की अदालतें भी अलग-अलग व्याख्या करती थीं.
पॉपकॉर्न का उदाहरण देकर समझाया
सीतारमण ने याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने जीएसटी काउंसिल की पिछली बैठक में पॉपकॉर्न का उदाहरण दिया था. उन्होंने बताया, अगर पॉपकॉर्न सड़क किनारे ठेले वाले से खरीदा जाए तो उस पर कोई टैक्स नहीं है और आगे भी नहीं होगा. लेकिन वही पॉपकॉर्न अगर पैक होकर नमकीन के रूप में बेचा जाए तो उस पर 5% जीएसटी लगता है और अगर कारमेल पॉपकॉर्न हो तो 18% टैक्स. इसे हमने समझाया भी था, लेकिन सोशल मीडिया पर काफी बवाल हुआ.
वित्त मंत्री ने कहा- विसंगतियां खत्म हो गई हैं
वित्त मंत्री ने कहा कि अब ऐसी विसंगतियां खत्म कर दी गई हैं. सिर्फ खाद्य पदार्थ ही नहीं, सभी श्रेणियों में वर्गीकरण की समस्या हल हो गई है. अब एक ही तरह के सामान पर एक समान टैक्स दर होगी. नए सुधारों के तहत सभी खाद्य सामग्री या तो 5% जीएसटी में आएंगी या फिर पूरी तरह टैक्स मुक्त होंगी.
जीएसटी 2.0 में बड़े बदलाव
3 सितंबर को हुई 56वीं जीएसटी काउंसिल बैठक में 12% और 28% के स्लैब खत्म कर दिए गए और मुआवजा उपकर (compensation cess) भी हटा दिया गया. अब टैक्स स्ट्रक्चर को आसान बनाते हुए ज्यादातर सामान और सेवाओं को सस्ता कर दिया गया है. 300 से ज्यादा चीजों पर टैक्स घटाकर या तो 5% कर दिया गया है या फिर पूरी तरह खत्म कर दिया गया है. इनमें डेयरी प्रोडक्ट्स, दवाइयां, इंश्योरेंस और रोज़मर्रा के उपभोक्ता सामान शामिल हैं. नए रेट 22 सितंबर से लागू होंगे.
सीतारमण ने कहा,
करीब 99% चीजें जो पहले 12% टैक्स में आती थीं, अब 5% में आ गई हैं. सुबह से रात तक लोग जिन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं, उन पर इसका सीधा असर पड़ेगा. एचयूएल, गोदरेज और डाबर जैसी बड़ी कंपनियों ने सरकार को भरोसा दिया है कि वे टैक्स कटौती का पूरा फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचाएंगी.
आसान रिफंड और तेज रजिस्ट्रेशन
उद्योग जगत की शिकायत रही है कि जीएसटी रिफंड में देरी होती है. इस पर वित्त मंत्री ने कहा कि नए कानून में 90% क्लेम का तुरंत प्रोविजनल रिफंड मिल जाएगा. वहीं नए कारोबारियों के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया तीन दिन में पूरी हो जाएगी.
उन्होंने कहा कि सिस्टम को साफ कर दिया गया है. वर्गीकरण की समस्याएं खत्म हो गई हैं और ज्यादातर सामान अब 5% टैक्स स्लैब में हैं. इसलिए जीएसटी 2.0 एक तरह से सिस्टम-क्लीनिंग रिफॉर्म है.
सीतारमण ने जीएसटी 2.0 के गिनाए 5 मूल सिद्धांत
- रोजमर्रा की चीजों पर टैक्स घटाना
- गरीब और मध्यमवर्ग को सीधा फायदा पहुंचाना
- किसानों को राहत देना
- छोटे और मझोले उद्योगों (MSMEs) के लिए इनपुट कॉस्ट कम करना
- अर्थव्यवस्था के अहम क्षेत्रों को मजबूत करना
इस कार्यक्रम में सीआईआई, फिक्की, हिंदुस्तान चैंबर ऑफ कॉमर्स और इंश्योरेंस ब्रोकर एसोसिएशन ऑफ इंडिया जैसी बड़ी औद्योगिक संस्थाओं ने हिस्सा लिया. इन संगठनों ने जहां टैक्स दरों में कटौती का स्वागत किया, वहीं कुछ उद्योगों से जुड़ी चिंताएं भी सामने रखीं.
– भारत एक्सप्रेस
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