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GST 2.0: मिडिल क्लास को राहत, किसान को सहारा और हेल्दी इंडिया की रफ्तार तेज

जीएसटी 2.0 में बड़ा बदलाव! सरकार ने टैक्स स्लैब घटाकर आम जनता, किसानों और मध्यम वर्ग को राहत दी है. विलासिता व पाप वस्तुओं पर 40% कर, जबकि रोज़मर्रा की ज़रूरी वस्तुएँ अब सस्ती हो गई है.

GST 2.0

GST 2.0: जीएसटी 2.0 में व्यापक बदलाव सिर्फ़ एक कर सुधार नहीं है; यह एक राजनीतिक बयान है. मध्यम वर्ग से लेकर किसानों तक, भारत की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था का पुनर्गठन बिहार चुनाव से पहले प्रमुख मतदाता वर्गों को खुश करने के लिए सावधानीपूर्वक किया गया प्रतीत होता है. 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत की चार-स्तरीय संरचना को केवल दो मुख्य स्लैब—5 और 18 प्रतिशत—से बदला जा रहा है, जबकि विलासिता और ‘पाप वस्तुओं’ के लिए 40 प्रतिशत की नई दर लागू की गई है. ऐसा लगता है कि स्लैब में बदलाव आर्थिक और चुनावी दोनों ही दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए बहुत ही सटीकता से किए गए हैं. यहाँ बताया गया है कि प्रत्येक समूह को कैसे लाभ होगा.

मध्यम वर्ग: आकांक्षात्मक लाभ, राजनीतिक दांव

भारत की लगभग 31 प्रतिशत आबादी वाला मध्यम वर्ग एक आर्थिक चालक और एक महत्वपूर्ण चुनावी समूह दोनों है. भाजपा पहले ही केंद्रीय बजट में कर कटौती के ज़रिए इस वर्ग को लुभाने की कोशिश कर चुकी है, और जीएसटी 2.0 इसे और आगे ले जाता है.

सरकार ने मध्यम वर्ग के उपभोग और आकांक्षाओं से जुड़ी कई वस्तुओं पर जीएसटी में कटौती की है—छोटी कारें, एलईडी टीवी, एयर कंडीशनर, सिनेमा टिकट, चॉकलेट, पेंसिल, ज्योमेट्री बॉक्स—इन पर कर की दरें घटाकर 18 प्रतिशत कर दी गई हैं. साबुन, शैंपू, हेयर ऑयल, टूथपेस्ट, टूथब्रश, टैल्कम पाउडर, मोमबत्तियाँ, शेविंग किट, माचिस और यहाँ तक कि स्टेशनरी और खिलौनों जैसी रोज़मर्रा की वस्तुओं पर अब केवल 5 प्रतिशत कर लगता है, जो पहले 12-18 प्रतिशत था.

स्वास्थ्य सेवा खर्च, जो कई परिवारों के लिए एक बड़ा खर्च है, पर भी ध्यान दिया गया है. जीवन और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम अब जीएसटी-मुक्त हैं, जबकि कैंसर और दुर्लभ बीमारियों के इलाज सहित 33 जीवन रक्षक दवाओं को पूरी तरह से कर-मुक्त कर दिया गया है. डायग्नोस्टिक किट, थर्मामीटर और अधिकांश अन्य दवाओं पर कर की दरें घटाकर 5 प्रतिशत कर दी गई हैं. बिहार चुनाव नजदीक होने के कारण, इन बदलावों को राज्य में मध्यम वर्ग की साख बनाए रखने के लिए एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ उनका वोट नतीजों को बदल सकता है.

किसान और डेयरी क्षेत्र: टैरिफ वार्ता में एक सीमा रेखा

भारत की कृषि अर्थव्यवस्था ने नीति निर्माण में किसानों को लंबे समय से एक अनिवार्य प्राथमिकता बना रखा है. राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) के आंकड़ों के अनुसार, देश में 3.7 करोड़ से 11.8 करोड़ किसान और लगभग 9.3 करोड़ कृषि परिवार हैं. अकेले डेयरी क्षेत्र में ही 7.0 से 8.0 करोड़ किसान शामिल हैं. जीएसटी 2.0 उनके महत्व को स्वीकार करता है. कृषि और ग्रामीण आजीविका के लिए महत्वपूर्ण वस्तुओं पर कर दरों में कटौती की गई है—कृषि उपकरण, घी, मक्खन, पनीर, जैम, सॉस, सूप, नमकीन, और यहाँ तक कि बादाम, काजू और पिस्ता जैसे सूखे मेवों पर भी अब 5 प्रतिशत कर लगता है, जो पहले 12-18 प्रतिशत था.

महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता के दौरान कृषि और डेयरी दोनों क्षेत्रों को संरक्षित किया गया है. भारत ने इन्हें विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए खोलने से इनकार कर दिया है, इसके बजाय घरेलू उत्पादकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है. यह ग्रामीण भारत को आर्थिक रूप से सुरक्षित रखने की व्यापक राजनीतिक प्राथमिकता के अनुरूप है.

स्वस्थ भारत: बुरी चीज़ों पर कर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाने से लेकर नागरिकों से तेल और चीनी का सेवन कम करने का आग्रह करने तक, लगातार स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा दिया है. जीएसटी 2.0 स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माने जाने वाले उत्पादों पर 40 प्रतिशत का नया ‘पाप कर’ लगाकर इस दृष्टिकोण को और पुष्ट करता है. इसमें तंबाकू, पान मसाला, ज़र्दा, गुटखा और चीनी मिलाए गए वातित या कैफीनयुक्त पेय पदार्थ शामिल हैं. संदेश स्पष्ट है: सरकार अस्वास्थ्यकर विकल्पों को महँगा बनाना चाहती है और साथ ही सचेत उपभोग को प्रोत्साहित करना चाहती है.

स्वदेशी प्रोत्साहन: घरेलू उद्योग पर ध्यान

जीएसटी में यह बदलाव सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और आयात पर निर्भरता कम करने के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप है. स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए, कर व्यवस्था अब घरेलू स्तर पर निर्मित वस्तुओं जैसे सौंदर्य प्रसाधन, हथकरघा और बुने हुए कपड़ों को प्राथमिकता देती है. इस कदम से छोटे व्यवसायों और स्थानीय कारीगरों को लाभ होने की उम्मीद है, साथ ही वैश्विक व्यापार भागीदारों को यह संदेश भी जाएगा: भारत अपनी आर्थिक संप्रभुता की रक्षा के लिए गंभीर है.

त्योहारों के मौसम में मिठास

दिवाली और त्योहारों का मौसम नज़दीक आ रहा है, ऐसे में जीएसटी 2.0 लागू करने का समय कोई संयोग नहीं है. सरकार इस कर पुनर्निर्धारण को एक उत्सवपूर्ण सुधार के रूप में पेश कर रही है, जो परिवारों को राहत देगा, घरेलू क्षेत्रों को ऊर्जा प्रदान करेगा और एक राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तिमाही की नींव रखेगा.

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-भारत एक्सप्रेस 



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